सुप्रीम कोर्ट ने धामी सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। राजाजी टाइगर रिजर्व में डायरेक्टर के पद पर आईएफएस राहुल की नियुक्ति को लेकर कोर्ट ने गंभीर टिप्पणी की। सुप्रीम कोर्ट की ओर से साफ किया गया कि ये राजशाही या सामंतवाद का दौर नहीं है जहां राजा ने जो कहा वही होगा। कोर्ट की ओर से लगी फटकार के सरकार के लिए कई मायने हैं। सरकार ने एक महीने पहले राहुल को तैनाती दी थी मगर अब नियुक्ति रद्द कर दी गई है। अक्सर चर्चाओ मे रहने वाला वन महकमा एक बार फिर चर्चा मे है।
मामला राज्य मे एक आईएफएस अफसर की नियुक्ति से जुडा हुआ है। राजाजी टाइगर रिजर्व के नवनियुक्त निदेशक राहुल कुमार को आखिर कार राजाजी के निदेशक पद से हटा दिया गया है। जब से राहुल कुमार की नियुक्ति राजाजी टाइगर रिजर्व मे हुई थी तभी से चर्चाओ का बाजार गर्म था। वन महकमे ने राहुल के ट्रांसफर को लेकर उनके द्वारा(राहुल ) लिखें पत्र का जिक्र किया है। पत्र मे उन्होंने राजाजी को छोड़ने को लेकर पत्र लिखा था। जिसका संज्ञान लेकर महकमे ने आज उन्हें अवमुक्त कर नई तैनाती दे दी है, मगर आखिर ऐसा क्यों हुआ। राजाजी मे निदेशक की कुर्सी बेहद ही हॉट मानी जाती है। ट्रांसफर सीजन मे इस कुर्सी को पाने के लिए बड़ी जद्दोजहद होती है। भाग्यशाली अफसर ही इसे पाता है। फिलहाल इस कुर्सी की रेस मे आईएफएस धर्म सिंह मीणा, राजीव धीमान, कहकशा नसीम समेत कई आला अधिकारी है। अब देखना होगा की इस कुर्सी पर कौन अधिकारी आसीन होता है।
नियुक्ति पर सरकार में भी मतभेद का दावा
आईएफएस राहुल कुमार कॉर्बेट में तैनाती के दौरान हुए पाखरो प्रकरण मे काफी चर्चा मे रहे । जिसको लेकर उन्हें जिम कोर्बेट के निदेशक पद से हटा दिया गया था। ये मामला अभी कोर्ट मे चल रहा है। वहीं पाखरो प्रकरण मे हटाए जाने के बावजूद पिछले माह उन्हें राजाजी मे तैनाती दे दी गयी थी। इस मामले में ये भी आरोप लगा कि अधिकारियों और वन मंत्री के एतराज के बावजूद धामी ने राहुल को नियुक्ति दी थी। हालांकि बाद में वन मंत्री ने इस पर सफाई दी और सहमति से नियुक्ति का दावा किया था। मगर अब तक धामी इस पर चुप हैं।
हरीश रावत का धामी पर तंज
इस मुद्दे पर अब पूर्व सीएम हरीश रावत ने भी सीएम धामी पर तंज कसा है। हरीश रावत ने कहा है कि मंत्री की गलत सलाह राजा भर भारी पड़ रही है। हरीश रावत ने कहा है यदि #राजा का सलाहकार गलत हो मतलब मुख्यमंत्री का मंत्री गलत हो और वह उससे कुछ ऐसा काम करवा दे जो सामान्य समझ से विपरीत हो तो उसके लिए #मुख्यमंत्री को सार्वजनिक फटकार भी सुननी पड़ती है।
जब राहुल को सरकार ने राजा जी पार्क का डायरेक्टर बनाया तो मैंने उसमें कहा था कि जिस व्यक्ति के ऊपर सीबीआई की जांच चल रही है, पाखरो में अवैध पेड़ों के पातन और इलीगल कंस्ट्रक्शन आदि-आदि की, क्या पाप नहीं हुआ पाखरो में? उस व्यक्ति को राजाजी पार्क का डायरेक्टर बनाना उचित नहीं था जबकि आप उसको इसी जांच के चलते कॉर्बेट नेशनल पार्क के डायरेक्टर के पद से हटा चुके हैं और उस समय मैंने एक बात कही थी कि यह #उज्याडू़_पापी_बल्दों की सलाह मुख्यमंत्री को महंगी पड़ेगी और अब जो मुख्यमंत्री जी को फटकार माननीय सुप्रीम कोर्ट से सुननी पड़ी है, वह राज्य के लोगों के लिए चिंता का विषय है।

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