उत्तराखंड क्रांति दल के संरक्षक, वरिष्ठ राज्य आंदोलनकारी और पूर्व कैबिनेट मंत्री दिवाकर भट्ट जी आज पुलिस महानिदेशक कार्यालय देहरादून उत्तराखंड में आशुतोष नेगी और आशीष नेगी की गलत तरीके से हुई गिरफ्तारी के विरोध में ज्ञापन सौंपने गए। लेकिन तस्वीरों में डीजीपी दीपम सेठ कहीं नजर नहीं आ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल – क्या प्रदेश निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले इतने वरिष्ठ नेता के ज्ञापन को स्वीकार करने के लिए डीजीपी के पास समय नहीं था? क्या यह महज संयोग था या फिर एक सुनियोजित उपेक्षा?
अगर डीजीपी किसी आपातकालीन कार्य में व्यस्त थे या शहर से बाहर थे, तो यह अलग बात है। लेकिन अगर ऐसा नहीं था, तो ये सिर्फ दिवाकर भट्ट जी का नहीं, बल्कि समस्त राज्य आंदोलनकारियों का अपमान है। यह इस प्रदेश का अपमान हैं। हम इस अनादर की कड़ी निंदा करते हैं और सरकार व प्रशासन से स्पष्ट जवाब की मांग करते हैं।

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