पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने वित्त आयोग को अपने अहम सुझाव दिए हैं। हरीश रावत ने कहा कि 16 वित्त आयोग के सामने आज उत्तराखंड देहरादून में अपना पक्ष रखेगा। हिमालयी राज्यों का एक बहुत पुराना मुकदमा केंद्र सरकार के सम्मुख लम्बित है। कांग्रेस सरकार ने 2013-14 में हिमालय राज्यों को एक राशि, चाहे वह राशि एक ही हजार करोड़ रुपए की थी। मगर ग्रीन बोनस या ऑक्सीजन सर्विसेज जो भी कह लीजिए, हमसे अपेक्षा की जाती है कि हम जंगलों के आवरण को बनाए रखें और उसके लिए हमें कोई प्रोत्साहन राशि नहीं दी जाती है। ग्रीन बोनस एक प्रोत्साहन राशि है और हिमालयी राज्यों के रूप में उत्तराखंड को ग्रीन बोनस की मांग वित्त आयोग के सामने उठानी चाहिए।
देश जिस तरीके से जलवायु परिवर्तन का अभिशाप झेल रहा है उसका सबसे ज्यादा खामियाजा हिमालय राज्यों को उठाना पड़ रहा है। मुआवजा की राशि या अनुदान राशि जो भी कह लीजिए, वह देते वक्त केंद्र सरकार एक ही लाठी से सबको हांकती है। जबकि हिमालयी राज्यों में नुकसान भरपाई करना बहुत ही खर्च साध्य होता है, तीन-चार गुना खर्चा आता है। इनके मानक बदले जाने चाहिए, नहीं तो उत्तराखंड, हिमाचल, जम्मू कश्मीर मध्य हिमालयी के क्षेत्र जो इस समय दैवीय आपदा के सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र हैं, उनके लिए अपने अर्थव्यवस्था को संभालना बहुत कठिन हो जाता है। हमने वित्तीय फाइनेंशियल डेफिसिट, उत्तर प्रदेश से राज्य बनते वक्त लिया था। खैर अब तो उस डेफिसिट को कर्ज ले-ले करके भारतीय जनता पार्टी सरकार ने बहुत ही बढ़ा दिया है। हमारे समय में राज्य में कर्ज की राशि 25 हजार करोड़ रुपए थी, आज वह राशि बढ़कर के 1 लाख, 20 हजार करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गई है। लेकिन राज्य तो राज्य है, जनता तो जानता है, दोष किसी का हो, मगर जो वित्तीय फाइनेंशियल डेफिसिट है, हिमालयी राज्यों के विषय में उसकी प्रतिपूर्ति के लिए एक विशेष राष्ट्रीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। क्योंकि यह अकेले उत्तराखंड की कहानी नहीं है, सभी राज्यों की कहानी है। नहीं तो इन राज्यों का वित्तीय प्रबंधन गड़बड़ा जाएगा जिसे ठीक करना किसी भी सरकार के लिए कम से कम आज तो कठिन लगता है और जो ग्रीन बोनस का ही हिस्सा हो सकता है। मगर पर्वतीय क्षेत्रों और जंगलों के नजदीक के क्षेत्रों में लोगों के लिए कृषि आजीविका का कृषि आजीविका अर्थात खेती को करना कठिनतर होता जा रहा है इसके लिए आवश्यक है कि उत्तराखंड जैसे राज्यों को वन टाइम जंगली जानवरों से प्रोटेक्शन के लिए जंगलों की घेराबंदी के लिए राशि मिले ताकि जंगली जानवर आबाद रूप से खेतों में न आ सके और वन टाइम ग्रान्ट उत्तराखंड जैसे राज्यों को यदि पड़ती पड़ी जमीन को वो आबाद करना चाहते है तो वन टाइम ग्रांट क्योंकि उस कार्य में बड़ी धनराशि की आवश्यकता है वो वन टाईट ग्रांट की मांग उत्तराखंड जैसे राज्य को वित्त आयोग से करनी चाहिए और मैं भी एक ई लेटर डॉ.अरविंद पनगढ़िया साहब को उपरोक्त आधार पर अपने सुझावों को विस्तृता देते हुए भेजूंगा ।

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