18 September 2026

Pahad Ka Pathar

Hindi News, हिंदी समाचार, Breaking News, Latest Khabar, Samachar

गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को AI से जोड़ने की कवायद

गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को AI से जोड़ने की कवायद

देवभूमि उत्तराखण्ड की लोकभाषाओं गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाया गया। इस अवसर पर “भाषा डेटा कलेक्शन पोर्टल (Bhasha AI Portal)” का भव्य शुभारंभ अमेरिका के सिएटल और कनाडा के सरे-वैंकूवर में किया गया।

इस ऐतिहासिक लॉन्च का शुभारंभ उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के वीडियो संदेश के माध्यम से हुआ। मुख्यमंत्री ने इस पहल को “उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक अस्मिता को डिजिटल युग से जोड़ने वाला युगांतकारी प्रयास” बताया और अमेरिका व कनाडा में रहने वाले उत्तराखण्डी प्रवासियों को अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को AI से जोड़ने की कवायद

मुख्यमंत्री ने अपने संदेश में कहा कि जब तक हमारी भाषा जीवित है, हमारी संस्कृति जीवित है। उत्तराखण्ड सरकार सदैव अपनी मातृभाषाओं के संरक्षण और संवर्धन के लिए तत्पर है और इस ऐतिहासिक पहल में पूर्ण सहयोग करेगी।

इस पोर्टल के माध्यम से गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाओं के लगभग 10 लाख (1 मिलियन) शब्द, वाक्य, कहावतें, और कहानियाँ एकत्र की जाएंगी, ताकि AI प्लेटफ़ॉर्म इनसे सीखकर भविष्य में हमारी भाषाओं में संवाद कर सकें।

See also  पुण्यतिथि पर अंकिता भंडारी को दी गई श्रद्धांजलि, जांच में सुस्ती को लेकर उठाए सवाल

यह ऐतिहासिक लॉन्च Devbhoomi Uttarakhand Cultural Society Canada द्वारा आयोजित भव्य कार्यक्रम में हुआ, जिसमें लगभग 4000 से अधिक प्रवासी उत्तराखण्डी उपस्थित रहे। इस लॉन्चिंग में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (वीडियो संदेश), पद्मश्री प्रीतम भरतवाण (लोकगायक, जागर एवं ढोल सागर अकादमी), सचिदानंद सेमवाल (AI आर्किटेक्ट, अमेरिका), अमित कुमार, सोसाइटी के अध्यक्ष बिशन खंडूरी, टोरंटो से मुरारीलाल थपलियाल, एवं भारत दूतावास के प्रतिनिधिगण प्रमुख रूप शामिल हुए।

पद्मश्री प्रीतम भारतवाण ने कर्णप्रयाग (बद्रीनाथ क्षेत्र) से ऑनलाइन जुड़कर अपने संदेश में कहा कि जब तक हमारी भाषा जीवित है, हमारी संस्कृति और हमारी पहचान जीवित है। भाषा बचेगी तो संस्कार भी बचेंगे। उन्होंने इस पहल को ऐतिहासिक बताते हुए अपनी जागर एवं ढोल सागर अकादमी की ओर से निरंतर सहयोग देने की घोषणा की।

सचिदानंद सेमवाल (AI आर्किटेक्ट, अमेरिका) ने कहा कि यह केवल एक तकनीकी परियोजना नहीं, बल्कि हमारी जड़ों से जुड़ने और उन्हें आने वाली पीढ़ियों तक जीवित रखने का एक जन-आंदोलन है। मेरे 20 वर्षों से अधिक के इंजीनियरिंग अनुभव और 4 वर्षों से अधिक के AI अनुभव का उपयोग यदि अपनी मातृभाषा के संरक्षण में हो रहा है, तो इससे बड़ा सौभाग्य मेरे जीवन के लिए और क्या होगा।

See also  15 अक्टूबर तक सड़कें गड्ढा मुक्त करने की कवायद

इस पहल को हम एक सामाजिक आंदोलन के रूप में चलाएंगे और जो भी इसमें जुड़ना चाहेगा उसका स्वागत है ।

Devbhoomi Uttarakhand Cultural Society Canada के अध्यक्ष बिशन खंडूरी ने कहा कि यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि इस ऐतिहासिक लॉन्च की मेजबानी का अवसर हमारी संस्था को मिला। यह पहल विदेशों में रह रहे सभी उत्तराखण्डियों के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी जड़ों से जोड़े रखेगा।

कार्यक्रम के दौरान सोसाइटी ने यह भी घोषणा की कि कनाडा और अमेरिका में “AI सक्षम भाषा शिक्षण केंद्र” (AI-enabled Learning Centers) स्थापित किए जाएँगे, जहाँ प्रवासी बच्चे आधुनिक तकनीक की सहायता से गढ़वाली, कुमाऊँनी और जौनसारी भाषाएँ सीख सकेंगे। ये केंद्र पद्मश्री प्रीतम भारतवाण की जागर अकादमी से संबद्ध रहेंगे।

See also  थर्मल पावर प्लांट को लेकर आई ऊर्जा विभाग की सफाई

इस अवसर पर सोसाइटी के पदाधिकारीगण शिव सिंह ठाकुर (उपाध्यक्ष), विपिन कुकरेती (महामंत्री), उमेद कठैत,  जगदीश सेमवाल,  गिरीश रतूड़ी, रमेश नेगी, जीत राम रतूड़ी, विनोद रौंतेला, तथा Devbhoomi Uttarakhand Cultural Society Canada के सभी सदस्यगण उपस्थित रहे।

इस अवसर पर भारत से ऑनलाइन मस्तू दास, शक्ति प्रसाद भट्ट, के. एस. चौहान तथा प्रोजेक्ट की कोर टीम भी जुड़ी । कनाडा के स्थानीय मीडिया, भारतीय दूतावास के प्रतिनिधि, AI विशेषज्ञों, सांस्कृतिक संगठनों और बड़ी संख्या में प्रवासी उत्तराखण्डियों की उपस्थिति ने इस आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।