चंपावत में पशुपालकों ने आंचल दुग्ध संघ के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी समस्याओं को लेकर बार बार की जा रही अनदेखी से आहत होकर डीएम को ऑनलाइन ज्ञापन भेजा गया है। पशुपालकों ने साफ किया कि आज की समय में जहां पानी की एक लीटर की बोतल 20 रू से कम नहीं मिलती है वही पशुपालक को अपना दूध 26 से 32 रू प्रति लीटर मजबूरी में आँचल डेरी को देना पड़ता है। आंचल दुग्ध संघ को दुग्ध देने के बाद 3.50% फैट होने में पशुपालक को 26-28 रू प्रति किलो मिलता है।
जबकि हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा इतना फैट होने पर पशुपालक को 61 रू प्रति किलो गाय के दूध में और 71 रू प्रति किलो भैस के दूध में न्यूनतम समर्थन मूल्य दिया जा रहा है। उनका लक्ष्य सिर्फ और सिर्फ पशुपालक को सदृढ़ करना और पलायन रोकना है। इसके अलावा सरकार द्वारा मिलने वाले पशु आहार, साइलेज और भूसे में 50% अनुदान भी पशुपालक को उसके घर तक पहुँचाने के बाद मिल रहा है।
उत्तराखंड का पशुपालक ख़ुद को असहाय, शोषित और कमज़ोर महसूस कर रहा है। पशुपालक निरंतर दुग्ध व्यवसाय से अपना मोह भंग कर चुका है। आज पशुपालक बैंक से लाखो का ऋण लेकर यह पशुपालन कर रहा है। लेकिन बुनियादी सुविधाएं ना मिल पाना उसे इस व्यवसाय से दूर कर रहे है। पशुपालक की अत्यंत आवश्यक मांग है की उसे भी हिमाचल प्रदेश की तर्ज में पशुपालक की व्यथा को समझते हुए न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्तराखंड में तत्काल प्रभाव से लागू किया जाये।

More Stories
कौलागढ़ में कांग्रेस की संविधान बचाओ यात्रा, बीजेपी के खिलाफ हल्लाबोल
उत्तराखंड कांग्रेस चार्जशीट कमेटी का धामी सरकार के खिलाफ मोर्चा, जमीनों की बंदरबांट का लगाया आरोप
चीरबासा हेलीपेड पर बंद हुआ केदारनाथ मार्ग