2 October 2026

Pahad Ka Pathar

Hindi News, हिंदी समाचार, Breaking News, Latest Khabar, Samachar

मूल निवास और भू कानून पर आंदोलन

मूल निवास और भू कानून पर आंदोलन

मूल निवास को लेकर सरकार के आदेश को मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति ने आंखों में धूल झोंकने वाला करार दिया है। साथ ही 24 दिसंबर को देहरादून में होने वाली महारैली में लोगों से पहुंचने की अपील की है। संघर्ष समिति के‌ संयोजक मोहित डिमरी और समेत सभी सदस्यों ने साफ किया है कि सरकार साजिश के तहत आंदोलन खत्म कराने के मूड में है लेकिन ऐसा नहीं होने दिया जाएगा। पूरा मामला अब जनता के बीच है और जनता को ही फैसला करना है।

संघर्ष समिति का रुख साफ

आगामी 24 दिसंबर को होने वाली उत्तराखण्ड मूल निवास स्वाभिमान महारैली को लेकर मिल रहे अभूतपूर्व समर्थन के मद्देनजर राज्य सरकार सक्रिय हो गई है. सरकार की तरफ से आन्दोलन के प्रमुख साथियों (मूल निवास भू कानून समन्वय संघर्ष समिति) से संपर्क किया जा रहा है. हम सरकार की इस पहल और सक्रियता का सम्मान करते हुए स्पष्ट करना चाहते हैं कि यह जन आन्दोलन है, जिसका नेतृत्व उत्तराखण्ड की आम जनता कर रही है. इसलिए इस आंदोलन से सम्बंधित कोई भी फैसला आम जनता के बीच से ही निकलेगा. एक या दो साथियों से वार्ता करने से कोई हल नहीं निकलेगा.

See also  डीएवी पीजी कॉलेज छात्रसंघ चुनाव में सरकारी दबाव का आरोप, कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर उठाए सवाल

उत्तराखंड की जनता अपनी अस्मिता और अधिकारों को लेकर अब आर-पार की लड़ाई के लिए तैयार हो चुकी है।

1. हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि आन्दोलन संचालन समिति की तरफ से कोई भी साथी 24 तारीख से पहले सरकार से वार्ता करने के लिए अधिकृत नहीं किया गया है. हम सरकार के प्रस्ताव को विनम्रता पूर्वक अस्वीकार कर रहे हैं.

2. आगामी 24 दिसंबर की ‘उत्तराखण्ड मूल निवास स्वाभिमान महारैली’ पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक ही होगी।

3. हमारा मानना है कि इस विषय पर वार्ता करने की फिलहाल कोई जरूरत नहीं है. सरकार अपनी तरफ से निर्णय लेने के लिए सक्षम है. अतः हमारा निवेदन है कि हमारी निम्न मांगों पर सरकार स्पष्ट आदेश जारी करे.

See also  एसआईआर को लेकर काजी निजामुद्दीन ने उठाए सवाल

– मूल निवास कानून लागू हो. मूल निवास की कट ऑफ डेट की तारीख 26 जनवरी 1950 घोषित की जाय.

– ठोस भू कानून लागू हो. शहरी क्षेत्र में 250 मीटर भूमि खरीदने की सीमा लागू हो. ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि विक्री पर पूर्ण प्रतिबन्ध लगे. गैर कृषक द्वारा कृषि भूमि खरीदने पर रोक लगे. पर्वतीय क्षेत्र में गैर पर्वतीय मूल के निवासियों के भूमि खरीदने पर तत्काल रोक लगे.

– राज्य गठन के बाद से वर्तमान तिथि तक सरकार द्वारा विभिन्न व्यक्तियों, संस्थानों, कंपनियों आदि को दान तथा लीज पर दी गई भूमि का ब्यौरा सार्वजनिक किया जाए.

– प्रदेश में विशेषकर पर्वतीय क्षेत्र में लगने वाले जिन भी उद्यमों, परियोजनाओं में भूमि अधिग्रहण या खरीदने की अनिवार्यता है या भविष्य में होगी, उन सभी में स्थानीय ग्राम निवासी का 25% तथा जिले के मूल निवासी का 25 प्रतिशत हिस्सा अवश्य सुनिश्चित किया जाए. ऐसे सभी उद्यमों में 80 प्रतिशत रोजगार स्थानीय व्यक्ति को सुनिश्चित किया जाये.

See also  आपदा प्रबंधन विभाग में आज दी गई अहम ट्रेनिंग