पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने 2024 का आगाज भी संघर्ष के साथ करने का ऐलान किया है। हरीश रावत ने साफ किया है कि वो बेरोजगार नौजवानों के साथ डटकर खड़े रहेंगे और सरकार तक उनकी आवाज़ पहुंचाने की पूरी कोशिश करेंगे। हरीश रावत ने कहा है
वर्ष 2023 ठुमक-ठुमक चलते हुये अस्तगामी हो रहा है। 2024 के प्रकटोत्सव की लालिमा का आभास हम सबको होने लग गया है। वर्ष 2023 ने देश के आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक विमर्श के कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं को लगभग निगल दिया है। वर्ष 2023 ने बढ़ती हुई बेरोजगारी सुरसा की मुंह के तरीके से फैलती हुई महंगाई, भ्रष्टाचार का फैलता हुआ मकड़ जाल, गरीबी और अमीरी की बीच की खाई जो निरंतर बढ़ रही है, विकास, अग्निवीर, ओल्ड पेंशन स्कीम और उत्तराखंड मांगे नया भू-कानून जैसे प्रश्नों को लगभग निगल दिया है। ऐसा लगता है ये बिन्दु सार्वजानिक विमर्श के कारक नहीं रहे हैं। क्या 2024 में हम भावनात्मक, आध्यात्मिक प्रश्नों पर ही उलझे रहेंगे या भौतिकता से जुड़े हुए इन सवालों को फिर से सार्वजनिक विमर्श में ला पाएंगे यह तय होना है। शायद हमारे जीवन काल में यह आखरी अवसर होगा 2024, इसलिए मैंने तय किया है कि मैं अपना फिटनेस टेस्ट देने के लिए इन्हीं प्रश्नों पर जिसमें प्रमुख प्रश्न उत्तराखंड के बेरोजगार नौजवानों के साथ राज्य सरकार द्वारा जो छलावा किया जा रहा है, सैकड़ों संघर्षरत संगठनों को, नौजवान लड़के-लड़कियों को जो अपनी आजीविका की लड़ाई लड़ रहे हैं उनको गांधी पार्क देहरादून जैसे सार्वजनिक स्थल से दूर धकेल कर एकता विहार के अंजान कोने में अपना रोना रोने के लिए मजबूर कर दिया गया है ताकि उनके कष्ट को कोई सुन न सके। लगभग 200 लड़की-लड़कियां जो हाईकोर्ट की चौखट पर अपनी आजीविका की रक्षा के लिए टकटकी लगाए बैठे हुये हैं, ऐसे न जाने कितने संघर्षरत भाई-बहन हैं! मैं उन सबके संघर्ष को विशेष तौर पर बेरोजगार नौजवानों के संघर्ष को आगे लाने के लिए दिनांक-06 जनवरी, 2024 को दोपहर 1:30 बजे डिस्पेंसरी रोड देहरादून स्थित राजीव गांधी जी की मूर्ति से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की मूर्ति (गांधी पार्क देहरादून) तक एकांगी #पदयात्रा प्रारंभ करूंगा। “प्रारंभ” शब्द इसलिए कह रहा हूं, हो सकता है मैं एक दिन में पूरा न कर पाऊं, सड़क दुर्घटना में चोटिल होने के बाद में कितना फिट हूं मुझे मालूम नहीं है। लेकिन मैं, वर्ष 2024 का अभिनंदन बेरोजगार नौजवानों के साथ संघर्ष से करना चाहता हूं ताकि #भारत_न्याय_यात्रा को उसका पुराना सिपाही देहरादून से अपना सलाम पहुंचा सके।



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