उत्तराखंड में चकराता से कांग्रेस विधायक और पूर्व प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह ने एक बार फिर चुनाव ना लड़ने की बात दोहराई है। प्रीतम सिंह ने साफ किया है कि लोकसभा का चुनाव वो किसी भी हालत में नहीं लड़ेंगे। प्रीतम सिंह पहले से ही अपनी इसी बात पर कायम हैं।
प्रीतम को शायद पहले ही अंदाजा है कि बीजेपी से मुकाबला करना और जीत पाना बहुत मुश्किल है। इसीलिए एक और हार वो नहीं मोल लेना चाहते। 2019 में प्रीतम सिंह टिहरी लोकसभा सीट से लड़े थे तब उनकी करारी हार हुई थी। उत्तराखंड बनने के बाद पहली बार किसी चुनाव में वो हारे थे। ऐसे में दूसरी हार से बचने के लिए ही वो चुनाव मैदान में उतरने के मूड में नहीं हैं। प्रीतम सिंह ने ये भी कहा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने जो संगठन बनाया है और जो व्यूह रचना की है उन्हें जिताने के लिए पूरी ताकत से काम किया जाएगा। प्रीतम ने ये भी कहा है कि वो चकराता के छोटे कार्यकर्ता हैं और इसी सीट से लोकसभा उम्मीदवार को वोट दिला सकते हैं। बड़ा सवाल ये है कि प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष जैसे पद संभाल चुके नेता के पास अपनी विधानसभा के अलावा दूसरी जगह कोई जनाधार ही नहीं है तो फिर कांग्रेस में जीत की उम्मीद कैसे की जा सकती है?

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