लोकसभा चुनाव के उम्मीदवार तय करने के लिए उत्तराखंड कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक आज दिल्ली में होगी। स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास और प्रभारी कुमारी शैलजा समेत दूसरे सदस्य भी इसमें मौजूद रहेंगे। पीसीसी चीफ करन माहरा भी इस बैठक में मौजूद रहेंगे ।
उम्मीद की जा रही है कि आज की बैठक में हर सीट से उम्मीदवारों के तीन-तीन या पांच पांच नाम का पैनल फाइनल किया जाएगा और वही पैनल सीईसी यानी कांग्रेस इलेक्शन कमेटी को भेजा जाएगा । कांग्रेस इलेक्शन कमेटी ही तय करेगी इन पैनल में से जो नाम आएंगे अलग-अलग सीटों से अलग-अलग दावेदारों के उनमें से उम्मीदवार किसे बनाया जाए।
5 सीटों पर अबतक कुल 35 दावेदार
पिछली बार जब बैठक हुई थी तब कांग्रेस ने दावा यह किया था की कुल 35 दावेदार हैं जो लोकसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं अब इन 35 नाम में से ही कुछ नाम तय किए जाएंगे उसके आधार पर उम्मीदवारों का चयन होगा। आज की बैठक काफी महत्वपूर्ण है, देखना ये है कि किस तरीके से नाम का पैनल बनाया जाता है आज ही लिस्ट फाइनल हो जाती है पैनल वाली या फिर एक और राउंड की बैठक करनी पड़ेगी। कांग्रेस के सामने चुनौती यह है की तमाम बड़े नेता चुनाव लड़ने से इनकार कर रहे हैं वह चाहे प्रीतम सिंह हों गणेश गोदयाल हों यशपाल आर्य हों या फिर हरीश रावत हों वो भी आधे अधूरे मन से कह रहे हैं कि मैं नहीं लड़ना चाहता और उनके मन में क्या है ये फिलहाल कोई समझ नहीं पाया है तो इन हालात में उम्मीदवार कौन होगा यह तय करना कांग्रेस के लिए भी एक टेढ़ी खीर है क्योंकि अगर जो नेता चुनाव नहीं लड़ने की बात कर रहे हैं उन्हें टिकट दिया जाता है तो फिर वह आधे अधूरे मन से लड़ेंगे तो जीत को लेकर संघर्ष बढ़ जाएगा और जो दूसरे दावेदार हैं जो लड़ने के इच्छुक हैं अगर उन्हें टिकट नहीं मिला तो फिर उनकी नाराजगी किस स्तर तक जाएगी यह भी कांग्रेस के सामने चुनौती है।
इसीलिए आज की बैठक इस लिहाज से भी महत्वपूर्ण है कि पैनल का सिलेक्शन सही तरीके से हो सीईसी के पास सही तरीके से सही रूप में एक पैनल जाए और इस पैनल में से बेहतर नाम आए जो सबसे मजबूत उम्मीदवार हो जो लड़ने की भी इच्छा रखता हो और जो लड़ना भी चाहता हो ऐसे कैंडिडेट को क्या कांग्रेस टिकट देगी या फिर उन्हीं नेताओं पर दांव लगाएगी जो बार-बार कह रहे हैं कि हम चुनाव नहीं लड़ना चाहते।
हरिद्वार में दिलचस्प मुकाबला
हरिद्वार सीट पर मुकाबला दिलचस्प माना जा रहा है एक तरफ हरीश रावत हैं जो स्वाभाविक दावेदार माने जाते हैं। हरीश रावत खुद कह रहे हैं कि उनके बेटे को टिकट दिया जाए अब करन माहरा का नाम भी हरिद्वार से सामने आया है। हालांकि माहरा ने कल ये जरूर कहा है कि वो कहीं से कहीं तक दावेदार नहीं है लेकिन आलाकमान अगर कहेगा तो वो चुनाव लड़ने के लिए तैयार हैं। यानी हरिद्वार में टकराव किस स्तर तक अब कांग्रेस के भीतर जाएगा ये दिलचस्प है। दूसरे भी कई दावेदार हैं हरिद्वार से हरक सिंह रावत ने दावा किया है कुछ और नेता भी हैं जो हरिद्वार से लड़ना चाहते हैं तो संभावनाएं टटोली जा रही हैं। आज तकरीबन 1:00 बजे दोपहर पर बैठक शुरू होनी है टाइम आगे भी बढ़ सकता है लेकिन उम्मीदवारों के चयन को लेकर आज एक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी अगर आज पैनल फाइनल होता है फिर वह सीईसी के पास जाता है तो उम्मीद फिर यही है कि जल्द ही कांग्रेस की लिस्ट आ जाएगी।
देहरादून से दिल्ली तक चुनौती
हालांकि नाम को लेकर लेकर चिंतन और मंथन बहुत गंभीरता से करना पड़ेगा क्योंकि बड़े नेताओं के अलग-अलग तेवर ये बता रहे हैं कि सब कुछ ठीक नहीं चल रहा और इस स्थिति में टिकट किसे मिलेगा यह तय करना काफी मुश्किल भरा काम है । उदाहरण के लिए प्रीतम सिंह को देख ले वह कह रहे हैं कि चुनाव वह नहीं लड़ना चाहते और पार्टी जिसे भी उम्मीदवार बनाएगी उसे वह चकराता विधानसभा में जरूर जितवा सकते हैं बाकी जो इस लोकसभा सीट में 13 सीट आती हैं वहां वो कुछ नहीं कर पाएंगे क्योंकि वो कांग्रेस के एक छोटे से कार्यकर्ता हैं। अब कांग्रेस के लिए यही एक चुनौती है कि एक नेता जो बड़ा नेता बताया जाता है पार्टी में जो प्रदेश अध्यक्ष भी रहे हैं नेता प्रतिपक्ष भी रहे हैं मुख्यमंत्री बनने के दौड़ में भी 2022 में खुद को शामिल कर रहे थे और अब वो ये कह रहे हैं कि वो सिर्फ चकराता विधानसभा तक सीमित हैं तो फिर यही कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती है और इसी चुनौती से बाहर निकलना कांग्रेस की मौजूदा नेतृत्व के लिए वह चाहे स्टेट लेवल का हो चाहे सेंट्रल लेवल का हो बड़ा चुनौती वाला काम है। अब देखना है कि टिकट बंटवारा किस तरीके से होता है कौन वो चेहरे होते हैं जिन पर पार्टी दांव लगती है और उन चेहरों को दूसरे जो नेता हैं जो पार्टी में पहले से हैं मजबूत माने जाते हैं वह कितना सपोर्ट करते हैं और पांच में से कांग्रेस कितनी सीट जीत पाती है। क्योंकि 2014 के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस के लिए सुख लगातार पढ़ा हुआ है और राजनीतिक लिहाज से कांग्रेस संकट में है।

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