लोकसभा उम्मीदवारों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस की उलझन अभी बरकरार है। किसे टिकट दिया जाए इसको लेकर मंथन का सिलसिला कल दिनभर चलता रहा लेकिन कोई फाइनल डिसीजन नहीं हो पाया। स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक अब एक बार फिर कल यानी की 2 मार्च को होगी और इसके बाद उम्मीद ये है कि यहां से उम्मीदवार किसे बनाया जाएगा इसको लेकर आगे की प्रक्रिया होगी। जितने भी दावेदारों के नाम हैं हर सीट से वो तीन या पांच नाम का पैनल कांग्रेस की केंद्रीय चुनाव समिति है यानी सेंट्रल इलेक्शन कमिटी को भेजे जाएंगे।
फिलहाल चर्चा इस बात को लेकर है कि आलाकमान उत्तराखंड में कांग्रेस के बड़े नेताओं को मनाने की कोशिश में है कि वो चुनाव मैदान में उतरें, चुनाव लड़ें ताकि कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ सके और बीजेपी को चुनाव में हराया जा सके।
बड़े नेता मानेंगे आलाकमान की बात?
अब निगाहें कल की बैठक पर रहेंगी कि कितने-कितने नाम का पैनल किस-किस सीट से सीईसी को भेजा जाता है और उसके बाद ही आगे के लिए चुनावी रणनीति बनेगी और फिर दावेदारों की जो पूरी लिस्ट होगी उसमें से उम्मीदवार चुनकर नाम फाइनल किए जाएंगे। दिलचस्पी यही है कि किस सीट से किसे उतरा जाए, पहले बड़े नेताओं को मनाने की कोशिश है अगर बड़े नेता मान जाते हैं तो फिर सेकंड लाइन पर विचार करने की जरूरत नहीं होगी लेकिन अगर बड़े नेता नहीं मानते जैसे प्रीतम सिंह बार-बार ये कह रहे हैं कि वो नहीं लड़ना चाहते हैं गणेश गोदियाल भी कई दफा कह चुके हैं कि वो दावेदार नहीं है टिकट के वो नहीं लड़ेंगे क्योंकि पहले से पौड़ी में एक दावेदार हैं और एक उम्मीदवार जो 2019 में थे वो हैं। इसीलिए अब बड़े नेताओं को मनाने की कोशिश है । हरीश रावत भी कई बार कहते रहे हैं कि वो नहीं लड़ना चाहते हैं उनके बेटे को टिकट दिया जाए या किसी दूसरे कार्यकर्ता को टिकट दिया जाए तो अब दिलचस्प ये है कि यहां से कांग्रेस क्या डिसीजन ले पाएगी। बड़े नेता मानेंगे या नहीं मानेंगे या कांग्रेस में ऐसे ही उलझन बरकरार रहेगी और फिर आखिरी वक्त में टिकट को लेकर अफरा तफरी मचेगी और फिर वही हाल होगा जो 2014 और 2019 में हुआ था?

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