28 February 2026

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जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की मांग

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति की मांग

जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति ने विस्थापन पुनर्वास समेत जोशीमठ के विभिन्न मुद्दों पर राज्य के मुख्य सचिव और आपदा प्रबन्धन  सचिव से बद्रीनाथ विधायक राजेंद्र भण्डारी के नेतृत्व में मुलाकात की है । जिसमें कुछ मुद्दों पर स्थिति साफ हुई है कुछ पर सहमति बनी है और कुछ मुद्दों पर वार्ता रहेगी। इसके साथ ही जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति न सिर्फ जोशीमठ बल्कि पूरे हिमालय में ही विकास के विनाशकारी ढांचे के खिलाफ, हिमालयी पर्यावरण प्रकृति, पारिस्थितिकी जैव विविधता और हिमालयी जनता के आपदा मुक्त भविष्य को लेकर भी आवाज उठाती रही है। इसी परिपेक्ष्य में संघर्ष समिति द्वारा कुछ अन्य संगठनों के साथ मिलकर हिमाचल प्रदेश में विभिन्न हिमालयी राज्यों के प्रतिनिधियों का सम्मेलन आयोजित किया था। जिसमें पीपल ऑफ हिमालया फॉर द पीपल ऑफ हिमालया कैंपेन चलाने पर सहमति बनी है । जम्मू काश्मीर,सिक्किम, हिमांचल, अरूणांचल, असम, दार्जिलिंग उत्तराखंड के राज्य प्रतिनिधि अभी इसमें शामिल थे शेषरा ज्यों के प्रतिनिधियों ने भी अपनी सहमति दी है ।

 संघर्ष समिति ने साफ किया है कि

1 . जोशीमठ में निर्धारित किए गए अति संवेदनशील क्षेत्र (डेंजर ज़ोन ) कहीं से भी तर्कसंगत वैज्ञानिक नहीं नजर आते । इनके निर्धारण की पद्धति एवं तर्कसंगतता का खुलासा किया जाए । जब तक यह नहीं किया जाता हम इस निर्धारण को अस्वीकार करते हैं ।

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2 . जोशीमठ नगर के लिए व्यापक विस्थापन एवम पुनर्वास नीति लाई जाए , जिसमें भारत सरकार की विस्थापन एवम पुनर्वास नीति 2007 को आधार बनाया जाए ।

3 . स्थानीय लोगों की सेना के कब्जे वाली भूमि लोगों के पुनर्वास हेतु उपयोग में लाई जाए । सेना को सीमा की तरफ अग्रिम मोर्चों पर विस्थापित करने हेतु केंद्र सरकार से सहमति ली जाए ।

4 . प्रभावितों की भूमि का मूल्य , सरकार द्वारा गठित कमेटी के प्रस्ताव के अनुरूप शीघ्र निर्धारित किया जाए ।

5 . आपदा के चलते जोशीमठ के लोगों को हुए नुकसान की भरपाई शीघ्र की जाए, जिस पर स्वयं मुख्यमंत्री जी की भी सहमति थी ।

6 . जोशीमठ नगर के स्थिरीकरण (stabilization) का कार्य शीघ्र प्रारम्भ किया जाए । इस कार्य की निगरानी हेतु एक मॉनिटरिंग कमेटी भी बनाई जाए , जिसमें जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति के प्रतिनिधि शामिल किए जाएं ।

7 . जोशीमठ से परम्परा , धार्मिक विश्वाश, आस्था, रीति रिवाज,सामुदायिकता,कृषि एवम व्यवसाय से जुड़े लोगों के , इन सब जुड़ाव को अक्षुण्ण रखने हेतु जोशीमठ के दायरे में ही विस्थापन पुनर्वास किया जाए । इस सन्दर्भ में पूर्व में वार्ता क्रम में , प्रशाशन व सरकार द्वारा मांगे जाने पर हमने जगहों स्थानों के सुझाव दिए हैं ।
8 . होम स्टे को व्यावसायिक श्रेणी से हटाए जाने पर पूर्व में बनी सहमति पर अमल किया जाए व होटल/ व्यावसायिक प्रतिष्ठानों पर मुआवजा निर्धारण में लगाए गए स्लैब व्यवस्था को निरस्त किया जाए ।

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9 . राजीव आवास एवम प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने भवनों का मुआवजा भुगतान शीघ्र किया जाए । साथ ही कच्चे भवनों (टीन शेड, पठाल शेड आदि )का मूल्य निर्धारण शीघ्र किया जाए ।

10 . 8 अप्रैल 2023 को मुख्यमंत्री जी के साथ हुई वार्ता उपरान्त बनी सहमति के बिंदुओं को अमल में लाया जाए ।

11 . संवेदनशील क्षेत्र में स्थित कृषि भूमि एवम व्यवसायिक भूमि के मुआवजे पर स्थिति स्पष्ट की जाए ।

12 . विस्थापन पुनर्वास के लिए किए जा रहे सर्वे हेतु दिए जा रहे विकल्प पत्र को व्यापक बनाया जाए, जिसमें लोगों के व्यवसाय रोजगार, हक हकूक , परम्परागत सामाजिक एवम सामुदायिक हितों की सुरक्षा के विकल्पों को भी शामिल किया जाए ।

13 . जोशीमठ बचाओ संघर्ष समिति पीपल ऑफ हिमालया फॉर पीपल ऑफ हिमालया कैंपेन का न सिर्फ हिस्सा है बल्कि इसके आधारभूत संरचना और विचार का संगठक है । 2024 के संसदीय चुनाव में हिमालय के सवाल मुद्दे चुनाव के मुख्य मुद्दा बनें, इसके लिए हिमांचल प्रदेश में विभिन्न हिमालयी राज्यों द्वारा तय किए सवालों पर चलने वाले कैंपेन/अभियान में हम अपनी सक्रीय भागीदारी करेंगे । इससे सम्बन्धित विज़न डॉक्यूमेंट और डिमांड चार्टर हम विस्तार में हम शीघ्र जारी करेंगे ..अभी कुछ मुख्य बिन्दु निम्न हैं ..

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14 . आपदा मुक्त हिमालय हमारे अभियान का मुख्य नारा है ,इसको आधार बनाकर हम विभिन्न राजनैतिक दलों को अपना चार्टर ऑफ डिमांड सौंपेंगे जिससे वह उनके घोषणापत्र में शामिल किया जाए ।

15 . हमारा मानना है कि आपदा मुक्त हिमालय बनाने के लिए हिमालय क्षेत्र में विनाशकारी बड़ी परियोजनाओं पर रोक लगे ।

16 . हिमालय की जैविक सामाजिक सांस्कृतिक सामुदायिक विविधता का संरक्षण किया जाए , इसके लिए हिमालयी भूगोल और समाज के दृष्टिगत नीति एवम योजनाएं बनाई जाएं ।

17 . हिमालयी समाज में शांति एवं सौहार्द की स्थापना की जाए

18 . हिमालय में अंधाधुंध अनियंत्रित पर्यटन के बजाए नियंत्रित और संतुलित पर्यटन की नीति बने ।