1 September 2025

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आपदा कंट्रोल रूम से धामी ने लिया राज्य के हालात का जायजा

आपदा कंट्रोल रूम से धामी ने लिया राज्य के हालात का जायजा

उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश के मद्देनजर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आज राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर सभी जनपदों के हालात की समीक्षा की। उन्होंने मौसम विभाग द्वारा भारी बारिश के पूर्वानुमान को देखते हुए सभी जिलाधिकारियों को अगले चौबीस घंटे अलर्ट मोड में रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अगर बारिश ज्यादा हो और भूस्खलन, पत्थर गिरने का खतरा हो तो यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर रोक लिया जाए।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दोपहर करीब साढे़ बारह बजे आईटी पार्क में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण स्थित राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचे। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने मुख्यमंत्री को पिछले चौबीस घंटे में घटित विभिन्न घटनाओं की जानकारी दी।

 जिलाधिकारियों से धामी ने की बात

मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से बारी-बारी सभी जिलाधिकारियों से बात कर बारिश के हालात का जायजा लिया। उन्होंने सभी जिलाधिकारियों से अवरुद्ध मार्गों के संबंध में जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि बारिश के चलते मलबा आने के कारण जहां-जहां भी मार्ग बंद हैं, उन्हें जल्द से जल्द खोला जाए। जहां से भी मार्ग बंद होने की सूचना आती है, तुरंत जेसीबी वे अन्य संसाधनों को प्रभावित स्थान पर भेजकर मार्ग को खुलवाना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने ग्रामीण सड़कों को भी प्राथमिकता के साथ खोलने के निर्देश दिए।  उन्होंने नैनीताल, ऊधमसिंहनगर, हरिद्वार, चंपावत के मैदानी क्षेत्रों में जलभराव के दृष्टिगत विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कहीं जलभराव की स्थिति उत्पन्न होती है तो तुरंत जलनिकासी की व्यवस्था की जाए। जहां खतरा ज्यादा है तथा जिन क्षेत्रों में अधिक जलभराव हो सकता है, वहां से लोगों को तुरंत हटाकर सुरक्षित स्थानों में शिफ्ट किया जाए। उन्होंने पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों पर ले शिफ्ट करने के निर्देश दिए। साथ ही मुख्यमंत्री ने खतरे वाले स्थानों पर एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा जल पुलिस को तैनात करने के निर्देश भी दिए।

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 नदी किनारे एहतियात बरतने की सलाह

सीएम धामी ने  सभी जिलाधिकारियों को नदियों के जलस्तर पर नजर बनाए रखने तथा नदी किनारे लोगों को लगातार सचेत करते रहने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बारिश के चलते यदि कहीं भूस्खलन हो रहा हो या पहाड़ी से पत्थर गिर रहे हों, तो वाहनों को कहीं सुरक्षित स्थान पर रोक लिया जाए और खतरा टलने के बाद यात्री वाहनों को आगे रवाना किया जाए। उन्होंने यात्रा मार्ग बाधित होने पर यात्रियों को सुरक्षित स्थान पर रोकने तथा उनके लिए भोजन और पानी तथा छोटे बच्चों के लिए दूध तथा अन्य खाद्य पदार्थों की समुचित व्यवस्था करने के निर्देश दिए। साथ ही शौचालय की भी व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता है कि बारिश के चलते कम से कम जन-धन की हानि हो। आपदा प्रभावितों के साथ राज्य सरकार मजबूती के साथ खड़ी है। आपदा प्रभावितों को तत्काल राहत राशि मुहैया कराई जा रही है। राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर संचालित किए जा रहे हैं। चारधाम यात्रियों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने यात्रियों से भी मौसम को देखते हुए यात्रा करने की अपील की है।

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इस मौके पर अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप, अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी, संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी, यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार, यूएसडीएमए के विशेषज्ञ  डीडी डालाकोटी, मनीष भगत, डॉ. पूजा राणा, रोहित कुमार, डॉ. वेदिका पंत, तंद्रीला सरकार, जेसिका टेरोन आदि मौजूद थे।

पीडीएनए के प्रस्ताव जल्द भेजें जनपद

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने भी सुबह कंट्रोल रूम से बारिश के चलते उत्पन्न स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सभी जनपदों को पीडीएनए ;पोस्ट डिजास्टर नीड एसेसमेंटद्ध के प्रस्ताव जल्द से जल्द भेजने को कहा ताकि क्षतिपूर्ति की कार्यवाही तेज की जा सके। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव के लिए प्रारूप बना है। इसी के अनुरूप प्रस्ताव भेजा जाए। उन्होंने मानसून सीजन में आपदा के त्वरित गति से राहत और बचाव कार्य संचालित करने पर सभी डीडीएमओ तथा विभिन्न रेखीय विभागों के अधिकारियों और कर्मचारियों की सराहना की।

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नदियों के जलस्तर की लगातार हो मॉनीटरिंग

अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रशासन आनंद स्वरूप ने बारिश के चलते नदियों के जलस्तर की लगातार मॉनीटरिंग करने तथा नदी किनारे लोगों को लगातार एलर्ट करने के निर्देश दिए। वहीं अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रियान्वयन डीआईजी राजकुमार नेगी ने सभी डीडीएमओ का अब तक उनके जनपदों के घटित आपदाओं का अध्ययन कर रिपोर्ट तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जो अच्छे कार्य किए गए तथा जहां कमियां रह गईं, उनका अध्ययन भविष्य की योजना बनाने में मददगार साबित हो सकता है।