14 February 2026

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गरिमा दसौनी बोलीं महेंद्र भट्ट को चुके मानसिक संतुलन

गरिमा दसौनी बोलीं महेंद्र भट्ट को चुके मानसिक संतुलन

गढ़रत्न नरेंद्र सिंह नेगी की अगुवाई में मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल की बर्खास्तगी को लेकर गैरसैंण में हुए जन आंदोलन को उत्तराखंड बीजेपी अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के द्वारा सड़क छाप नेताओं का आंदोलन बताने पर उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने तल्ख प्रतिक्रिया दी है। दसौनी ने कहा कि महेंद्र भट्ट का मानसिक संतुलन बिगड़ चुका है । दसौनी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी शायद इस बात को समझ नहीं पा रही है या आंकने में गलती कर रही है कि प्रेमचंद अग्रवाल का सदन में दिया गया बयान राजनीतिक मुद्दा नहीं है बल्कि भावनात्मक मुद्दा है।

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गरिमा ने कहा कि प्रेमचंद अग्रवाल ने जो कुछ भी लोकतंत्र के मंदिर विधानसभा के अंदर कहा उसने पहाड़ी समुदाय को गहरा आघात पहुंचाया है और उनकी भावनाओं को बहुत चोट पहुंची है । परंतु उसे चोट पर मलहम लगाने की बजाय भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व बार-बार उसे पर नमक घिसने का काम कर रहा है। गरिमा ने कहा कि पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट का कभी उत्तराखंड वासियों को मुकदमे की धमकी देना और अब राज्य आंदोलनकारी को सड़क छाप नेता कहना पूरे प्रकरण को करेला ऊपर से नीम चढ़ा बना रहा है। दसोनी ने कहा कि आज तो प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने हद ही कर दी जब गैरसैंण में तमाम संगठनों के द्वारा विगत दिवस गढ़ रत्न नरेंद्र सिंह नेगी एवं राज्य आंदोलनकारी की अगुवाई में प्रेमचंद अग्रवाल की मंत्री पद से बर्खास्तगी को लेकर एक व्यापक जनआंदोलन किया गया और रैली निकाली गई उन तमाम लोगों को महेंद्र भट्ट ने सड़क छाप नेता कह दिया। गरिमा ने कहा कि क्या महेंद्र भट्ट को नहीं पता कि इस आंदोलन का आहवाहन उत्तराखंड का मान और गौरव बढ़ाने वाले नरेंद्र सिंह नेगी जी ने किया था? गरिमा ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी की पहाड़ विरोधी सोच आज पूरी तरह से निर्वस्त्र हो चुकी है, शायद पहाड़ के लोगों के अपमान में प्रेमचंद अग्रवाल से कोई कोर कसर रह गई थी जिसे आज महेंद्र भट्ट ने पूरा कर दिया।
शायद उत्तराखंड के लिए पहाड़ के लोगों ने इसीलिए कुर्बानियां दी कि आज राज्य गठन के रजत जयंती वर्ष में उनको उनके ही राज्य में गलियों से नवाजा जाए और सड़क छाप कहा जाए? गरिमा ने कहा कि इससे दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण दिन उत्तराखंड राज्यवासियों के लिए हो ही नहीं सकता।