16 February 2026

Pahad Ka Pathar

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पहाड़ की ‘हकीकत’…दावों तक सिमटी सरकारी सियासत!

पहाड़ की ‘हकीकत’…दावों तक सिमटी सरकारी सियासत!

उत्तराखंड के कई हिस्से आज भी बुनियादी जरूरतों के लिए तरस रहे हैं। लोगों की जिंदगी चुनौतियों के साथ ही शुरू होती है और चुनौतियों के साथ ही खत्म हो जाती है। बरसात के सीजन में ये चुनौतियां चार गुना बड़ा जाती हैं। सरकार, सियासी दल, समाज के ठेकेदार सिर्फ अपने विकास और अपनी चकाचौंध तक सीमित हैं पहाड़ के लोगों की तकलीफ समझने वाला कोई नहीं हां ताने मारने वालों और झूठ बोलने वालों की कोई कमी नहीं। सरकार के कागजों में पूरे उत्तराखंड का मौसम बेशक गुलाबी है लेकिन सच्चाई यही है कि पहाड़ में आज भी लोग हर पल हर रोज संघर्ष कर रहे हैं यहां तक कि उन्हें एक जगह से दूसरी जगह जाने के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है और ये भी नहीं पता रहता कि सुबह अगर निकल रहे हैं तो शाम को सुरक्षित घर लौट‌ पाएंगे या नहीं। ये वीडियो उत्तराखंड के दर्द की गवाही दे रहा है।

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हर रोज हथेली पर जान

पौड़ी जिले के यमकेश्वर में कई गांव ऐसे हैं, जहां लोग हर रोज जान हथेली पर लेकर घर से निकलते हैं।ग्राम बूंगा, वीरकाटल, मंगल्या गॉव और डौंर गॉव में सड़क की मॉग पिछले कई सालों से ग्रामीण करते आ रहे हैं, लेकिन अभी तक सड़क नहीं होने और नाई गदेरे में पुलिया नहीं होने का दंश ग्रामीण झेल रहे हैं। ग्रामीणों को बरसात में जान जोखिम में डालकर इस गदेरों को पार करके जाना पड़ता है। इस गदेरे पर पिछली आपदा में गिरे हुए सूखे पेड़ की तना के ऊपर चढकर नाले को पार करते हुए वीडियो में नजर आ रहे हैं।

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सरकारी सिस्टम नींद से कब जागेगा?

बूंगा गॉव के मूल निवासी मदन भट्ट का कहना है कि ग्रामीणों के द्वारा गांव के लिए सड़क और पुलिया के निर्माण हेतु पिछले 12 सालों से की जा रही है, किंतु अभी तक सड़क और पुलिया का निर्माण नहीं होना खेद जनक है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के प्रति जनप्रतिनिधियों और प्रशासन का उदासीन रवैया ही यहॉ से लोगों का पलायन करने का मुख्य कारण है।

वहीं पूर्व सैनिक एवं क्षेत्र पंचायत सदस्य सुदेश भट्ट ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि पिछले साल की आपदा में भी यह पेड़ गिरा हुआ था और इसके ऊपर से क्षेत्र में जनप्रतिनिधियों ने और सरकारी प्रशासनिक अधिकारियों ने पार कर गॉव का जायजा लिया था, किंतु खेद के साथ कहना पड़ रहा है कि अभी तक उक्त पुलिया और सड़ का निर्माण नहीं हो पाया।