12 April 2026

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केशव थलवाल केस पर घिरी टिहरी पुलिस, सफाई पर इंद्रेश मैखुरी ने उठाए सवाल

केशव थलवाल केस पर घिरी टिहरी पुलिस, सफाई पर इंद्रेश मैखुरी ने उठाए सवाल

केशव थलवाल केस की चर्चा पूरे उत्तराखंड में हो रही है। कठघरे में टिहरी पुलिस है। इस मुद्दे पर कामरेड इंद्रेश मैखुरी ने पुलिस पर तंज कसते हुए कुछ सवाल पूछे हैं। मैखुरी ने कहा टिहरी के एसएसपी आयुष अग्रवाल का एक वीडियो उत्तराखंड पुलिस के एक्स (पूर्व में ट्विटर) हैंडल पर देखा, जिसमें वे बता रहे हैं कि केशव थलवाल प्रकरण में आईजी गढ़वाल ने जांच के आदेश दिये हैं और जांच को जिले से बाहर स्थानांतरित करने के आदेश भी दिये हैं. एसएसपी आयुष अग्रवाल यह भी बता रहे हैं कि जिन पुलिस कर्मियों पर केशव थलवाल ने गंभीर आरोप लगाए हैं, उन्हें अन्यत्र थानों में स्थानांतरित कर दिया।

उक्त प्रकरण में पुलिस कर्मियों पर जिस तरह के गंभीर आरोप हैं, वैसे में उन्हें पहले तो निलंबित किया जाना चाहिए और कम से कम लाइन हाज़िर तो किया ही जाना चाहिए.

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सुबह टिहरी पुलिस के फेसबुक पेज पर इंस्पेक्टर धर्मेंद्र रौतेला का वीडियो जारी किया गया, जिसमें वो केशव थलवाल के आरोपों को निराधार बता रहे हैं और केशव थलवाल पर भी जवाब में काफी गंभीर आरोप लगा रहे हैं. लेकिन यह समझ नहीं आया कि उक्त वीडियो का कमेंट सेक्शन पुलिस द्वारा बंद क्यों कर दिया गया ?

अब इस मामले में जांच के आदेश कर दिये गए हैं तो टिहरी पुलिस को यह बताना चाहिए कि जिस पुलिस थाने या कोतवाली में केशव थलवाल को ले जाया गया, वहां सीसीटीवी कैमरा लगे हैं या नहीं ? यह प्रश्न इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि 2 दिसंबर 2020 को उच्चतम न्यायालय ने सभी पुलिस स्टेशनों में सीसीटीवी कैमरा लगाने के आदेश दिये थे. उच्चतम न्यायालय के तीन न्यायाधीशों की खंडपीठ ने अपने आदेश में कहा था कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रत्येक पुलिस स्टेशन, सभी प्रवेश और निकास बिंदुओं, मुख्य द्वार, लॉक-अप, गलियारों, लॉबी और रिसेप्शन के साथ-साथ लॉक-अप रूम के बाहर के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं, ताकि कोई भी हिस्सा छिपा न रहे.

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केशव थलवाल प्रकरण में तो पुलिस थाने का सीसीटीवी कैमरा सबसे महत्वपूर्ण सबूत हो सकता है, इसलिए अगर पुलिस स्टेशन में सी सी टी वी कैमरे हैं तो सबसे पहले उसके फुटेज को संरक्षित किया जाना चाहिए. अगर फुटेज गायब होती है तो यह पुलिस पर लगे आरोपों की पुष्टि ही समझी जाएगी.

और हां ये बहाना नहीं चलेगा कि सीसीटीवी कैमरा चल नहीं रहा था या खराब था क्योंकि राजस्थान के पुलिस स्टेशनों में मानवाधिकार हनन और फिर सीसीटीवी फुटेज देने से इंकार करने का मामला, उच्चतम न्यायालय में आजकल चल रहा है. ऐसा न हो कि राजस्थान के साथ टिहरी पुलिस भी इस मामले उच्चतम न्यायालय में खड़ी हो।

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अंतिम बात ये कि केशव थलवाल ने जो आरोप पुलिस पर लगाए हैं, वे अत्यंत गंभीर हैं, ऐसा अगर पुलिस द्वारा किया गया तो वो न केवल गैरकानूनी है बल्कि अमानवीय भी है. पुलिस जो आरोप केशव थलवाल पर लगा रही है, वे भी गंभीर प्रकृति के हैं. यह दोहराते हुए कि कितने भी गंभीर आरोप भी पुलिस को किसी के साथ अमानवीय और गैर कानूनी सलूक करने की छूट नहीं देते, निश्चित ही स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि आरोप- प्रत्यारोपों के सिलसिले का निर्णायक पटाक्षेप हो सके.