द्वाराहाट से कांग्रेस विधायक मदन बिष्ट ने बीजेपी की डबल इंजन सरकार पर तीखा हमला बोला है। मदन बिष्ट ने सरकार पर जनहित के मुद्दों और विकास योजनाओं पर ध्यान न देने का आरोप लगाया है। साथ ही बुनियादी मसलों की अनदेखी को लेकर भी सरकार को घेरा है। मदन बिष्ट ने सार्वजनिक पोस्ट के जरिए द्वाराहाट की जनता से कहा
सम्मानित क्षेत्रवासियों
अपनी धर्मपत्नी ऊमा बिष्ट जी के खराब स्वास्थ्य कारणों की वजह से मैं गैरसैंण में आहूत मानसून सत्र में प्रतिभाग करने में असमर्थ रहा जिसका मुझे अत्यन्त खेद है । मुझे व्यक्तिगत तौर पर पूरी उम्मीद थी कि गैरसैंण का मानसून सत्र मेरी विधानसभा के लिए कुछ निर्णायक फ़ैसला लेनेवाला साबित होगा , लेकिन अत्यन्त क्षोभ एवं आश्चर्य का विषय है कि उत्तराखंड की निकम्मी सरकार द्वारा मेरे विधानसभा क्षेत्र के अस्पतालों, विद्यालयों और महाविद्यालयों का उच्चीकरण करने के बजाय मेरी विधानसभा के पुलिस थानों का उच्चिकरण करने का तुगलकी फरमान सुनाया है । विगत दिनों में सम्पन्न हुए पंचायती चुनावों के दौरान जिस प्रकार की गुंडागर्दी ने मेरे क्षेत्र का माहौल खराब कर उसे कलंकित किया है उसका भी मुझे अत्यन्त दुख है । ज़ाहिर है पुलिस प्रशासन का निकम्मापन इसके लिए दोषी है , पुलिस द्वारा कानून व्यवस्था बनाए रखने के बजाय निर्दोष लोगों पर मुकदमे लादे गये हैं , जिसका मैं पुरज़ोर तरीक़े से विरोध करता हूँ , उत्तराखंड सरकार द्वारा पुलिस थानों का उच्चीकरण शायद मासूम जनता की आवाजों को दबाने का अगला कदम हो । इसके साथ ही सबसे अधिक आश्चर्य का विषय यह है कि उत्तराखंड सरकार द्वारा गैरसैंण में मानसून सत्र तो आयोजित कर लिया गया लेकिन उसके द्वारा गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाने के विषय में चर्चा तक नहीं की गई । मैं आपको विश्वास दिलाता हूँ कि पहाड़ और पहाड़ियों के दमन की सरकारी नितियों के खिलाफ जिस प्रकार मैं पिछले विधानसभा सत्र के दौरान खड़ा हुआ था ठीक वैसे ही आगामी विधानसभा सत्रों में भी खड़ा रहूँगा । मैं अपनी विधानसभा क्षेत्र की देवतुल्य जनता को यह बात माँ दुनागिरी को साक्षी मानते हुए कहना चाहता हूँ कि मेरी अनुपस्थिति में बेशक मेरी विधानसभा का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई हो लेकिन मेरे वापस पहुँचने पर मेरी विधानसभा के समाजिक तानेबाने से खिलवाड़ की कोशिशों को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा ।
मैं फिर से दोहराना चाहता हूं कि हमें कोतवाली नहीं बल्कि एक बेहतर अस्पताल चाहिए, हमें फ़र्ज़ी मुकदमे नहीं बल्कि ज्ञान का प्रकाश चाहिए, हमें गैरसैंण में डेढ़ दिन का आधा-अधूरा सत्र नहीं बल्कि स्थाई राजधानी के रूप में गैरसैंण चाहिए ।
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