19 February 2026

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कांग्रेस के टिकट पर टेंशन बढ़ी

कांग्रेस के टिकट पर टेंशन बढ़ी

उत्तराखंड में 2 सीटों पर उम्मीदवार तय करने में कांग्रेस आज भी नाकाम रही। जिसका असर अब कार्यकर्ताओं के मनोबल पर भी पड़ने लगा है। उत्तराखंड कांग्रेस की उलझन और मतभेद की वजह से आलाकमान भी कोई फैसला नहीं कर पा रहा। ये हाल तब है जबकि नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। बीजेपी के उम्मीदवार सभी सीटों पर प्रचार भी तेज कर चुके हैं लेकिन कांग्रेस हरिद्वार और नैनीताल में उम्मीदवार उतारने को लेकर आगे नहीं बढ़ पा रही। आज भी दिल्ली में दिन भर माथापच्ची चलती रही लेकिन रास्ता नहीं निकल पाया। आज उत्तराखंड कांग्रेस प्रभारी कुमारी शैलजा, स्क्रीनिंग कमेटी के अध्यक्ष भक्त चरण दास, उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा और नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य के बीच लंबी बैठक हुई। सभी पहलुओं पर चर्चा की गई और अब फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया गया है।

हरिद्वार के फेर में नैनीताल भी लेट!

सूत्रों के मुताबिक हरिद्वार में फंसे पेंच की वजह से नैनीताल सीट पर भी उम्मीदवार तय नहीं किया जा रहा। बताया जा रहा है कि हरीश रावत हरिद्वार से अपने बेटे वीरेंद्र रावत को टिकट देने का मांग पर अड़े हैं जबकि प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व की मंशा हरीश रावत को चुनाव लड़ाने की है। इसी मसले पर बात अटकी है और अब तो उत्तराखंड का मामला CEC से भी बाहर कर दिया गया है। जानकारी के मुताबिक उत्तराखंड की 2 सीटों पर फैसला करने के लिए कांग्रेस ने हाइपावर कमेटी बनाई है जो एक बार फिर चर्चा करेगी और आलाकमान की सहमति के बाद नामों का ऐलान किया जाएगा। कांग्रेस का इस तरह का अंदरूनी झगड़ा और सीनियर नेताओं की अनबन का असर पूरे चुनाव अभियान पर पड़ रहा है। चुनावी व्यूह रचना कैसे तैयार की जाए इसे लेकिर भी संगठन को अब तक पूरी तरह वक्त नहीं मिल पा रहा क्योंकि टिकट के मसले पर बार-बार दिल्ली दौड़ना पड़ रहा है। कांग्रेस की आंतरिक उलझन की वजह से हरिद्वार और नैनीताल लोकसभा सीट के कार्यकर्ताओं में भी उलझन बनी हुई है। दोनों सीटों पर कांग्रेस से जुड़े कार्यकर्ता और नेता तो यहां तक कहने लगे हैं कि क्या अब 27 मार्च के बाद उम्मीदवारों का ऐलान किया जाएगा? 2012 के बाद उत्तराखंड में कांग्रेस कोई चुनाव नहीं जीती है। 2014 लोकसभा, 2017 विधानसभा, 2019 लोकसभा और 2022 विधानसभा में कांग्रेस की करारी हार हुई। इसकी सबसे बड़ी वजह कांग्रेस की गुटबाजी को माना जाता है। 2016 में तो कांग्रेस में बड़ी टूट हुई उसके बाद भी कांग्रेस नहीं संभली और अब लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवार उतारने में हो चुकी देरी पार्टी के झगड़ों और लाचारी को चौराहे पर ला चुकी है। ऐसे में संगठन कैसे काम करेगा और कब चुनाव का प्लान तैयार करेगा इस पर सवाल उठने लगे हैं।

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पार्टी और रणनीति सब तैयार- करन माहरा

चुनाव अभियान में कांग्रेस के पिछड़ने के सवाल पर पीसीसी चीफ करन माहरा ने साफ किया है कि ये पार्टी का अंदरूनी मामला है और सबकुछ ठीक चल रहा है। माहरा ने कहा कि कांग्रेस लोकतांत्रिक पार्टी है और यहां हर किसी को अपनी बात खुलकर कहने की आजादी है, इसीलिए टिकट को लेकर जो भी प्रक्रिया चल रही है वो सब पार्टी के प्लेटफॉर्म पर हो रहा है। माहरा ने ये भी दावा किया कि पार्टी की चुनावी रणनीति तैयार है 3 सीटों पर उम्मीदवार प्रचार में जुटे हैं और संगठन भी अपने स्तर पर लगातार काम कर रहा है। जैसे ही बची हुई दो सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान हो जाएगा पूरी पार्टी ताकत के साथ प्रचार में उतर जाएगी। करन माहरा ने भरोसा जताया कि जल्द ही नामों की घोषणा हो जाएगी।