पिथौरागढ़ में मढ़ खड़ायत के असुरचुला मंदिर में सदियों से चली आ रही परंपरा के तहत आज विशेष हवन पूजन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्तों की मौजूदगी रही।

आस्था और विश्वास के साथ मढ़ खड़ायत, घुनसेरागांव, सातशिलिंग, जीबी, सिलौली, मढ़गल समेत कई गांवों से भक्त असुर बाबा के दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे। हर साल पूस के महीने में शुभदिन की गणना कर यहां हवन किया जाता है। मान्यता है कि असुरचुला में हवन के बाद बारिश होती है, इस बार भी पहाड़ों में सूखे जैसे हालात हैं, इसीलिए हवन होने के बाद अब भक्तों में बारिश की उम्मीद जगी है।

मढ़ खड़ायत के पुरखों ने इस परंपरा को शुरू किया जिससे धीरे-धीरे आसपास के गांव भी जुड़ते चले गए। जिला मुख्यालय के करीब 8 किलोमीटर दूर असुरचुला का मंदिर है। यहां जाने के लिए सड़क नहीं है। तकरीबन 2 घंटे तक पैदल की खड़ी चढ़ाई चढ़नी पढ़ती है, लेकिन अपने आराध्य देव को लेकर भक्तों में इतनी आस्था है कि सभी उम्र के लोग बिना किसी परेशानी के इस ऊंची चोटी तक पहुंच जाते हैं। असुर देवता 6पट्टी सोर के राजा और रक्षक भी माने जाते हैं। मढ़ खड़ायत के लोग हर पूजा में असुर बाबा को जरूर नमन करते हैं। आज का हवन भी विधिविधान के साथ हुआ और अब भक्तों को उम्मीद है कि भगवान जल्द ही बारिश देंगे और लोगों को सूखे से राहत मिलेगी।

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