उत्तराखंड में विधानसभा का मानसून सत्र तय वक्त से एक दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। जिसके बाद सियासी टकराव और भी बढ़ गया है। इसी घमासान के बीच यशपाल आर्य और प्रीतम सिंह के इस्तीफे से खलबली मच गई। नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा
कांग्रेस विधानमंडल की ओर से कार्य मंत्रणा समिति में चुने सदस्य के रूप में मैंने और मेरे वरिष्ठ साथी प्रीतम सिंह ने इस्तीफा देने का निश्चय किया है। नैनीताल , बेतालघाट, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और उधमसिंह नगर में पुलिस के संरक्षण में हुई अपराधिक घटनाओं ने देवभूमि उत्तराखण्ड को कुशासन वाले राज्यों की पंक्ति में खड़ा कर दिया है।
ये घटनाएं तब हो रही थी जब राज्य के उत्तरकाशी जिले के धराली सहित कही हिस्सों में आपदा ने तबाही मचा रखी थी। सरकार और सत्ता दल भाजपा का ध्यान आपदा राहत के बजाय पंचायत पदों के अपहरण करने पर था।
इन शर्मनाक घटनाओं के तुरंत बाद हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र से हमें बड़ी आशा थी। पूरा विपक्ष चाहता था कि, पंचायत चुनावों में हुई गुंडागर्दी और कानून व्यवस्था की स्थिति के कारण राज्य मेंसंवैधानिक संकट आया है इसलिए चर्चा नियम 310 के तहत होनी चाहिए। विपक्ष आपदा पर भी नियम 310 के तहत चर्चा चाहता था।
सरकार ने यहां भी निराश किया। कार्य मंत्रणा समिति की बैठक के बिना विधानसभा के सत्र को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दिया। हम चाहते थे कि , राज्य के निवासियों की आकांक्षा के प्रतीक गैरसैण में इस सभी विषयों पर नियम 310 में चर्चा होकर कुछ ठोस निष्कर्ष निकले परन्तु सरकार इन गंभीर विषयों को टालना चाहती थी। सरकार राज्य के सर्वोच्च सदन विधानसभा को भी अपने हिसाब से चलाना चाहती है।
इन परिस्थितियों में हमारा कार्य मंत्रणा समिति में रहना सार्थक नहीं है । उन्होंने कहा कि , अतः कांग्रेस विधानमंडल की ओर से कार्य मंत्रणा समिति में चुने सदस्य के रूप में मैने और मेरे वरिष्ठ साथी प्रीतम सिंह ने इस्तीफा देने का निश्चय किया है।
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