30 August 2025

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हरक सिंह रावत ने साधा सरकार पर निशाना, आपदा प्रबंधन को लेकर उठाए सवाल

हरक सिंह रावत ने साधा सरकार पर निशाना, आपदा प्रबंधन को लेकर उठाए सवाल

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पूर्व मंत्री डॉ0 हरक सिंह रावत ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए राज्य के आपदा प्रबन्धन को पूरी तरह नाकाम बताते हुए कहा कि उत्तराखंड देश का पहला राज्य है जहां राज्य गठन के समय ही अलग से आपदा प्रबन्धन मंत्रालय का गठन किया गया था, किन्तु राज्य में आपदाओं से निपटने के लिए अब तक कोई प्रभावी तंत्र विकसित नहीं हुआ है, जिसके कारण प्राकृतिक व मानवीय आपदाओं से निपटने के लिए कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है। उन्होने कहा कि यह भी बडी विडंबन और आश्चर्य का विषय है कि राज्य का आपदा प्रबन्धन उपनल एवं अस्थायी कर्मचारियों के भरोसे छोड़ा गया है।

डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कि अभी हाल ही में उत्तरकाशी के धराली एवं पौडी जनपद के अनेक स्थानों पर भीषण दैवीय आपदा का दंश लोगों को झेलना पड़ा है। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबन्धन विभाग का कार्य स्वयं मुख्यमंत्री देख रहे हैं जिनके पास अन्य कई महत्वपूर्ण विभाग हैं तथा राज्य में प्रत्येक वर्ष आने वाली भीषण आपदाओं को दृष्टिगत रखते हुए आपदा प्रबन्धन विभाग एक महत्वपूर्ण विभाग है जिसका दायित्व किसी अन्य मंत्री को दिया जाना चाहिए था ताकि आपदा के समय इस जिम्मेदारी का सही से निर्वहन किया जा सके।

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डॉ0 हरक सिंह रावत ने कहा कियूपीए सरकार के समय आपदा के लिए 100 प्रतिशत बजट केन्द्र सरकार वहन करती थी जबकि वर्तमान में 90 प्रतिशत केन्द्र व 10 प्रतिशत राज्य सरकार वहन कर रही है। वर्तमान में प्रदेश में आपदा का बजट मात्र 1012 करोड है जिसे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार द्वारा धराली आपदा के लिए 40 करोड़ रूपये के बजट का आवंटन किया गया है जबकि पौडी सहित अन्य जनपदों में भी लोगों को आपदा से जूझना पड़ा है, परन्तु अन्य आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिए बजट आवंटित नहीं किया गया है राज्य सरकार की ओर से अन्य जिलों के लिए भी समुचित बजट आवंटित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धराली जैसी आपदा में मृतकों के परिजनों को केवल 4 लाख तथा घायलों को 2 लाख का प्रावधान किया गया है जिसे बढ़ाकर कम से कम 25 लाख एवं 10 लाख किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंगभंग की हानि होने की स्थिति में मात्र 74000 रूपये तथा 40 से 60 प्रतिशत विकलांगता पर केवल 2.50 लाख रूपये का प्रावधान किया गया है जबकि 60 प्रतिशत विकलांगता पर कम से कम 15 लाख रूपये का मुआबजा दिया जाय ताकि विकलांग व्यक्ति अपनी आजीविका चला सके। उन्होंने यह भी कहा कि आपदा में घायलों का सम्पूर्ण उपचार राज्य सरकार की ओर से मुफ्त में किया जाना चाहिए।

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डॉ0 हरक सिंह रावत ने राज्य सरकार के इस निर्णय पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि आपदा के कारण जिन लोगों के घर बह गये हैं उन्हें केवल 2500 रूपये देकर उनका मजाक उड़ाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों को कम से कम इतनी राहत राशि दी जानी चाहिए कि वे अपनी आजीविका चला सकें। उन्होंने कहा कि इसी प्रकार कृषि भूमि तथा फसलों के बहने पर भी किसानों को समुचित मुआबजा दिया जाय तथा इसी प्रकार पशुधन की हानि होने पर दिये जाने वाले मुआबजे को बढ़ाया जाय।

डॉ0 हरक सिंह रावत ने यह भी कहा कि केदारनाथ आपदा के समय तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा शासनादेश जारी कर होटल व्यवसाय, रिजार्ट, लॉज वालो के नुकसान की भरपाई के लिए उचित मुआबजे का प्रावधान किया गया था। वर्तमान में भी इन व्यवसायियों को बाजार मूल्य पर मुआबजा दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार के स्तर पर भी राज्य में दीर्घकालीन आपदा प्रबन्धन तैयारियों के लिए राज्य को विषेश पैकेज का प्रावधान किया जाना चाहिए। उन्होंने मैदानी क्षेत्रों में आपदा से घरों को हुए नुकसान झोपडियों, गौशालाओं, विद्यालयों, स्वास्थ्य केन्द्रों पंचायत व सार्वजनिक भवनों को हुए नुकसान की भी उचित क्षतिपूर्ति की मांग की।

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डॉ0 हरक सिंह रावत ने समाचार पत्रों में छपी सरकार आपदा में पहुंची गैरसैण खबर पर भी तंज कसते हुए कहा कि राज्य सरकार विधानसभा सत्र नहीं हिमालय के ऐवरेस्ट में चढ़ रही हो। उन्होंने कहा पूरा राज्य आपदा का दंश झेल रहा है तथा राज्य के लिए यह सैर सपाटे का समय नहीं है परन्तु राज्य सरकार के मंत्री हैलीकॉप्टर से गैरसैण पहुंच रहे हैं तथा अन्य विधायकगण सड़क मार्ग से अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं। पत्रकार वार्ता में महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला, प्रदेश प्रवक्ता डॉ0 प्रतिमा सिंह, शीशपाल सिंह बिष्ट, सोशल मीडिया सलाहकार अमरजीत सिह, विरेन्द्र पोखरियाल, विनोद चौहान एवं एनएसयूआई अध्यक्ष विकास नेगी उपस्थित थे।