यशपाल आर्य, नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंड में बाघ का आतंक लगातार बढ़ रहा है। जनपदों के दूरस्थ गांवों में आए दिन ऐसी घटनाएँ सामने आ रही हैं, जहां बाघ ग्रामीणों को अपना निवाला बना रहा है। लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक बात ये है कि शासन और प्रशासन की संवेदनशीलता कहीं दिखाई नहीं देती।
नेता प्रतिपक्ष आर्य ने कहा कि क्या हमारी जिम्मेदारी सिर्फ फाइलों तक सीमित रह गई है? क्या ग्रामीणों की जान की कोई कीमत नहीं है? आज हालत यह है कि लोग जंगल जाने से डर रहे हैं, बच्चे स्कूल जाने से डर रहे हैं और महिलाएं रोज मौत का सामना कर रही हैं।

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि ये केवल वन्यजीव संरक्षण का विषय नहीं है, यह मानव जीवन की सुरक्षा का प्रश्न है। हम बाघ को बचाना चाहते हैं-यह हमारी जिम्मेदारी है, लेकिन क्या इंसान की जान उससे कम महत्वपूर्ण है?
यशपाल आर्य ने कहा कि मैं सरकार से कुछ स्पष्ट मांगें रखना चाहता हूं
संवेदनशील क्षेत्रों में तुरंत विशेष निगरानी और पेट्रोलिंग बढ़ाई जाए।
हर प्रभावित क्षेत्र में रैपिड रिस्पॉन्स टीम तैनात की जाए।
ग्रामीणों के लिए सुरक्षा उपकरण और जागरूकता अभियान चलाए उन्होंने कहा कि जिन परिवारों ने अपनों को खोया है, उन्हें तत्काल और सम्मानजनक मुआवजा दिया जाए और सबसे महत्वपूर्ण कि स्थानीय लोगों की आवाज को नीति का हिस्सा बनाया जाए।नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि सरकार अगर आज भी नहीं जागी, तो यह सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं होगी, यह मानवीय संवेदनाओं की हार होगी।

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