18 February 2026

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करन माहरा ने मोदी और धामी को खूब सुनाया, पूछा सवालों का जवाब कब देगी बीजेपी?

करन माहरा ने मोदी और धामी को खूब सुनाया, पूछा सवालों का जवाब कब देगी बीजेपी?

उत्तराखंड कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा ने देहरादून में चल रहे इन्वेस्टर समिट के लिए राज्य सरकार को शुभकामनाएं देते हुए कुछ सवाल किए।

माहरा ने कहा कि 2017 में भारत सरकार द्वारा हिमालयी राज्यों हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, में औद्योगिक विकास के लिए आई0डी0एस0 स्कीम लॉन्च की गयी, आई0डी0एस0 यानी इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट स्कीम लॉन्च की गयी। इस स्कीम के तहत उपरोक्त राज्यों में निवेश करने वाले उद्योगों को भारत सरकार की और से 30 प्रतिशत सब्सिडी देने की बात कही गयी। माहरा ने कहा कि ये र्दुभाग्य ही कहा जा सकता है कि इतनी लाभकारी स्कीम ने 4 वर्षो में ही दम तोड़़ दिया और 2021 में समाप्त कर दी गयी, जबकि वादा 5 वर्षो यानी 2022 तक के लिए था। इस स्कीम के तहत उत्तराखण्ड को जो राशि तय की गई थी उसमें से मात्र 1100 करोड़ ही अतिथि तक प्राप्त हो पाया है उद्योगों को मिलने वाली सब्सिडी का 5 हजार करोड़ भारत सरकार पर अभी भी बकाया हैं।

माहरा ने कहा कि ये जहॉ एक और भारत सरकार का निवेशकों के साथ छल को उजागर करता है वहीं दूसरी और उत्तराखण्ड की उद्योग नीति पर भी बडा़ प्रश्न चिन्ह लगाता है।

बीजेपी सरकार का भ्रमजाल- माहरा

माहरा ने राज्य सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि कुछ समय पहलें त्रिवेन्द्र सरकार ने जिस तर्ज पर 2019 के लोकसभा चुनावों को प्रभावित करने के लिए इन्वेस्टर समिट किया था जिसका नतीजा शून्य ही निकला 2023 का इन्वेस्टर समिट भी उसी का रैप्लिका दिखाई पड़ता है। 2018 में हुए इन्वेस्टर समिट के लिए भी रातों रात सड़को के किनारे खजूर के पेड़ लगा दिए गए थे उसी तरह इस बार उत्तराखण्ड की सड़कों पर गेंदा उगा दिया गया है।

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सजावट में करोड़ों बहाए- करन माहरा

माहरा ने कहा कि राज्य सरकार में इन्वेस्टर समिट के लिए 38 करोड़ से वॉल पेन्टिग, 22 करोड़ से लैंड स्केपिंग और 18 करोड़ की लागत से दुकानों पर भगवा बोर्ड लगाने पर खर्च कर दिए हैं। माहरा ने आशंका जताई कि जितना पैसा पानी की तरह इस समिट के लिए बहाया जा रहा है उसकी भरपाई किस तरह से हो पायेगी।

सवालों का जवाब कब देगी सरकार?

माहरा ने पिछले दिनों प्रेसवार्ता के माध्यम से जो चुनिंदा सवाल इन्वेस्टर समिट को लेकर राज्य सरकार से पूछे उनको लेकर भाजपा प्रवक्ताओं और नेताओं ने चुप्पी साध ली है। माहरा के उन प्रश्नों का सरकार के पास कोई जवाब नही है। माहरा ने राज्य सरकार से पूछा था –

1.मैकेन्जी ग्रुप जो एक ब्लैक लिस्टेड कम्पनी है उसे 2 लाख 50 हजार रुपये प्रतिदिन किस मद से दिये जा रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा दिसंबर 2022 में एक अमेरिकन कम्पनी मैकेन्जी ग्रुप के साथ इस तहत अनुबन्ध किया गया था कि वह राज्य की जीडीपी में बड़ा सुधार करेगी एवं राज्य सरकार को कर्ज मुक्त करने की तरफ कदम बढाएगी। माहरा ने पूछ कि सालाना 80करोड़ रूपये देकर जो कम्पनी हायर की गयी आज लगभग एक साल बीत जाने के बाद राज्य उससे कितना लाभान्वित हुआ?

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2. पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में बिना इन्वेस्टर्स मीट के प्रदेशभर में सिडकुल के तहत देहरादून के सेलाकुई, हरिद्वार के रोशनाबाद, पथरी, भगवानपुर, उधमसिंह नगर के रुद्रपुर, सितारगंज आदि क्षेत्रों में छोटे-बडे 2000 उद्योग स्थापित किये गये। सरकार बताये कि उनमें से कितने अब तक पलायन कर गये?

3. पंडित नारायण दत्त तिवारी जी के शासन में स्थानीय बेरोजगारों के लिए स्थापित उद्योगों में 70 प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की गई थी जिसे भाजपा सरकार ने समाप्त कर दिया है। इसके विपरीत एम्स जैसे संस्थानों में दूसरे प्रदेशों के लोगों को रोजगार देकर स्थानीय बेरोजगारों के हक पर डाका क्यों डाला जा रहा है?

4. भाजपा सरकार द्वारा 2018 में कराये गये इन्वेस्टर्स सम्मिट में 125 हजार करोड़ के इन्वेस्ट का दावा किया गया था। उनमें से कितने धरातल पर उतर पाये? राज्य सरकार ने जनता की गाढ़ी कमाई से 7 लाख को रोजगार देने के बडे-बडे होर्डिंग बोर्ड लगाए थे, कितने बेरोजगारों को रोजगार मिला?

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5. जो उद्योग पूर्व से स्थापित हैं तथा उनके कार्यालय दिल्ली, मुंबई, गाजियाबाद, नोएडा, गुड़गांव में हैं, उनसे एमओयू लंदन में क्यों हो रहे हैं?

6. 24 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा करने तथा विद्युत उत्पादक राज्य होने के बावजूद ऊर्जा प्रदेश में बिजली की आपूर्ति लगातार बाधित हो रही है और विद्युत किमते भी कई राज्यों से अधिक हैं।

7. आपदा प्रबन्धन विभाग के सरकारी आंकडों के अनुसार राज्य में इसी वर्ष बरसात के मौसम में राज्य की 400 से ज्यादा सड़के तीन महीने से भी अधिक समय तक बाधित रही ऐसे में पर्वतीय अंचलों में निवेश कैसे पहुॅचेगा?

8. कांग्रेस की सरकारों में किसी भी बाहरी उद्योग घराने से अनुबन्ध के समय यह करार होता था कि जिस भी प्रयोजन से भूमि आवंटित कराई जाएगी, वह उसी के तहत इस्तेमाल की जाएगी वरना भूमि राज्य सरकार में निहित हो जाएगी। परन्तु भाजपा की सरकार ने आत्मघाती निर्णय लेते हुए उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने हेतु इस नियम को दरकिनार कर दिया और यह प्रावधान समाप्त कर दिया।