उत्तराखंड कांग्रेस में विवाद थम नहीं रहा। लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी की अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ रही है। नेताओं के बीच जुबानी जंग हावी है और एक दूसरे को नसीहत देने से कोई बाज नहीं आ रहा। पिथौरागढ़ से विधायक मयूख महर ने भी कांग्रेस की उत्तराखंड लीडरशिप पर जमकर हमला बोला।
मयूख महर ने प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य को निशाने पर लिया और मंच से ही दोनों नेताओं को खूब खरी खोटी सुनाई। मयूख महर ने लोकसभा चुनाव को लेकर कई सुझाव भी दिए और ये भी साफ कर दिया कि अगर सुझावों पर अमल नहीं हुआ तो कांग्रेस की हार एक बार फिर तय है।
प्रदीप टम्टा को टिकट ना देने की मांग
विधायक मयूख महर ने पिथौरागढ़ में आयोजित कांग्रेस के जिला सम्मेलन के दौरान प्रदीप टम्टा का खुलकर विरोध किया। नाम लिए बिना मयूख महर ने कहा कि जब तक दकियानूसी सोच और पुरानी विचारधारा वाले नेताओं को नहीं बदला जाएगा, जब तक अल्मोड़ा पिथौरागढ़ सीट से पुराना उम्मीदवार नहीं हटाया जाएगा तब तक किसी कीमत पर कांग्रेस नहीं जीत सकती।
मयूख महर ने ये भी कहा कि कांग्रेस को आज पानी में आग लगाने वाले नेता चाहिए तभी बीजेपी को हराया जा सकता है। मयूख महर ने करन माहरा और यशपाल आर्य पर भी तंज कसा और कहा कि चुनाव नजदीक हैं इसीलिए डेढ़ साल बाद प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को पिथौरागढ़ का दौरा करने की याद आई। मयूख महर के इन तेवरों से साफ है कि कांग्रेस में चुनाव के दौरान भी तकरार तय है। मयूख महर ने ईवीएम पर भी सवाल उठाए और कांग्रेस की सुस्ती को लेकर नाराजगी जताई।
करन माहरा की नसीहत
पीसीसी चीफ करन माहरा ने मंच से ही सभी आरोपों और सवालों का जवाब दिया। माहरा ने कहा कि उम्मीदवार कौन होगा बदला जाएगा या नहीं बदला जाएगा इसका फैसला सबकी सहमति से ही होगा। करन माहरा ने नाम लिए बिना मयूख महर और कांग्रेस के दूसरे सीनियर लीडर्स को बीजेपी के खिलाफ बोलने की नसीहत दी। माहरा ने कहा कि कांग्रेस के लोग अपनी ही पार्टी की जड़ें कमजोर कर रहे हैं और बीजेपी के खिलाफ बोलने को तैयार नहीं हैं।
माहरा ने साफ किया कि जब तक कांग्रेसी एक दूसरे की टांग खींचते रहेंगे तब तब जीतना मुश्किल है। करन माहरा ने सभी नेताओं से एकजुट होकर लोकसभा चुनाव में उतरने को कहा। मयूख महर और करन माहरा के बीच मंच पर ही दिखी इस तल्ख बयानबाजी के कई मायने निकाले जा रहे हैं। खास तौर पर इसे गुटबाजी की राजनीति से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में सवाल ये है कि अलग अलग गुटों में बंटी पार्टी 2024 में कैसे जीत पाएगी?

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