विधानसभा का गैरसैंण सत्र एक दिन भी पूरा नहीं चल पाया और सरकार ने सदन को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया। यह राज्य की जनता की भावनाओं, लोकतांत्रिक परंपराओं और गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी के रूप में विकसित करने की अवधारणा पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सवाल उठाया कि आखिर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी बताएं कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने का मकसद क्या था? जब सदन में जनता के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा के लिए पर्याप्त समय ही नहीं दिया गया? कांग्रेस का कहना है कि उनके विधायक अंकिता भंडारी हत्याकांड, प्रदेश में व्याप्त भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और आम जनता से जुड़ी समस्याओं पर सरकार से जवाब मांगना चाहते थे, लेकिन इन मुद्दों पर चर्चा के लिए विपक्ष की मांग को स्वीकार नहीं किया गया। इससे सरकार की मंशा पर सवाल उठता है कि क्या सरकार गंभीर सवालों का सामना करने से बच रही है?
उन्होंने कहा कि गैरसैंण में विधानसभा सत्र आयोजित करने के नाम पर मंत्रियों, अधिकारियों और पूरे सरकारी तंत्र को वहां ले जाना तथा कुछ ही घंटों में वापस लौट आना जनता की मेहनत की कमाई और करदाताओं के पैसे का दुरूपयोग है। यदि सत्र को कुछ ही घंटों तक सीमित रखना था, तो इसे देहरादून में भी आयोजित किया जा सकता था। गैरसैंण में सत्र का वास्तविक उद्देश्य केवल औपचारिकता निभाना नहीं, बल्कि राज्य की जनता की समस्याओं पर गंभीर चर्चा करना और सरकार को जवाबदेह बनाना होना चाहिए।
गोदियाल ने स्पष्ट किया कि गैरसैंण उत्तराखंड की जनभावनाओं, संघर्ष और राज्य आंदोलन की आकांक्षाओं का प्रतीक है। इसे केवल प्रतीकात्मक गतिविधियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए। गैरसैंण की गरिमा तभी बनी रहेगी, जब वहां नियमित रूप से पर्याप्त अवधि के विधानसभा सत्र आयोजित हों और जनहित के महत्वपूर्ण विषयों पर सार्थक चर्चा हो।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कांग्रेस की सरकार बनने पर गैरसैंण को स्थाई राजधानी घोषित किया जायेगा। पूर्व में भी गैरसैंण में विधानसभा भवन समेत अन्य सभी परिसम्पतियां कांग्रेस सराकर की देन है। ंगोदियाल ने कहा कि सत्र में प्रत्येक विधायक को अपने क्षेत्र की समस्याएं सदन में उठाने का पर्याप्त अवसर मिलेगा और सरकार को जनता के प्रति अपनी जवाबदेही निभानी होगी।उन्होंने का स्पष्ट मत है कि विधानसभा सत्र केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए नहीं, बल्कि जनता की आवाज उठाने, सरकार से सवाल पूछने और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए होते हैं।

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