उत्तराखंड के दो पूर्व मुख्यमंत्रियों की अचानक हुई मुलाकात की खूब चर्चा हो री है। कड़ाके की ठंड के बीच आज पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत देहरादून की डिफेंस कॉलोनी में पूर्व राज्यपाल और पूर्व सीएम भगत सिंह कोश्यारी के घर पहुंच गए। मुलाकात की वजह क्या थी, अचानक ही मिलने क्यों पहुंचे, इसके मायने क्या हैं ऐसे ही कई सवाल सियासी फिजाओं में तैरना स्वाभाविक है। हालांकि दोनों नेताओं ने इसे शिष्टाचार भेंट बताया है लेकिन जब दो राजनेता मिलते हैं तो मुलाकात के पीछे कोई मकसद ना हो ऐसा संभव नहीं है। लिहाजा हलचल होना भी लाजिमी है।

वैसे 2 महीने में दोनों नेताओं की ये दूसरी मुलाकात है। इससे पहले 22 नवंबर 2023 को भगत ने अस्पताल में भर्ती हरदा का हाल जाना था। तब कोश्यारी ने हरीश रावत कओ राजनीति से संन्यास लेने की सलाह दी थी।
हरीश रावत ने वो सुझाव अब तक माना तो नहीं है लेकिन एक दो बार अपने सोशल मीडिया पोस्ट पर उसका जिक्र जरूर किया है। अब आज जब हरीश रावत खुद कोश्यारी से मिलने उनके घर गए तो सवाल ये है कि क्या उसी सुझाव के सिलसिले को आगे बढ़ने गए या खुद कोई नया सुझाव देकर आए इसे लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हरीश रावत खुद लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं ये बात अलग है कि पार्टी उन्हें मौका देगी या नहीं इसका कोई फैसला नहीं हो पाया है। इस पूरी कवायद के बीच ही भगत दा से मेल मुलाकात की तस्वीरें सियासी गर्मी जरूर बढ़ा रही हैं।
सीखने वाली सियासत
वैसे उत्तराखंड की राजनीति के लिहाज से ये एक सबक भी है कि भले ही विचारधारा अलग अलग हो, राजनीतिक दल अलग अलग हों, सियासत में कितना भी विरोध हो उसका असर निजी रिश्तों पर हरीश रावत ने कभी नहीं पड़ने दिया। भगत सिंह कोश्यारी भी उसी श्रेणी में आते हैं। उत्तराखंड की सभ्यता संस्कृति को आगे बढ़ाने का इससे अच्छा उदाहरण नहीं हो सकता। शायद राजनेताओं की मौजूदा और भविष्य की पीढ़ी को भी इससे जरूर सीख लेनी चाहिए। बहरहाल आज की मुलाकात में क्या हुआ इसका जवाब आने वाले दिनों में जरूर मिलेगा इसकी उम्मीद की जा सकती है।

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