उत्तराखंड बीजेपी ने दिवंगत बेटी अंकिता को चौथी बरसी पर श्रद्धांजलि देते हुए, महिला अपराधों को लेकर कठोरतम रवैये की प्रतिबद्धता दोहराई है। प्रदेश प्रवक्ता अनुकृति गुसाईं रावत ने कहा, मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में न्यायिक प्रक्रिया से अंकिता के हत्यारे, आजीवन सलाखों के पीछे अपने पाप की सजा भुगत रहे हैं। वहीं सरकार द्वारा पीड़ित परिवार की मांग अनुशार सीबीआई जांच एवं यथा संभव मदद की गई है। लिहाजा कांग्रेस एवं अन्य सभी पक्षों को इस मुद्दे पर गिद्ध राजनीति नहीं करके, दिवंगत आत्मा के अपमान से बचना चाहिए।
पार्टी की तरफ से उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार बेटी अंकिता को न्याय दिलाने और दोषियों को कठोरतम कानूनी सजा सुनिश्चित करने के लिए पूरी मजबूती से खड़ी है। अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को उम्रकैद की सजा मिलना भी इस बात का प्रमाण है। प्रदेश सरकार ने इस संवेदनशील प्रकरण में पहले दिन से लेकर न्यायालय के अंतिम फैसले तक अपराधियों को कठोर सजा दिलाने के लिए पूरी गंभीरता और मजबूती से कार्य किया। घटना सामने आने के बाद मुख्यमंत्री धामी ने तत्काल कठोर कार्रवाई के निर्देश दिए थे। 24 घंटे के भीतर आरोपियों को जेल भेजा गया और मामले की निष्पक्ष एवं गहन जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया। आरोपियों के विरुद्ध गैंगस्टर अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की गई। जांच के दौरान करीब 500 पन्नों की विस्तृत चार्जशीट तैयार की गई, जिसमें लगभग 100 गवाहों के बयान सहित महत्वपूर्ण साक्ष्यों को शामिल किया गया। न्यायालय में अभियोजन पक्ष द्वारा लगातार मजबूती से पैरवी की गई, जिसके चलते आरोपियों की जमानत अर्जियां बार-बार खारिज हुईं और वे मुकदमे के दौरान सलाखों के पीछे रहे। मजबूत जांच और प्रभावी अभियोजन के परिणामस्वरूप अंततः अंकिता के कातिलों को उम्रकैद की सजा मिली।
वहीं बताया कि प्रदेश सरकार ने पूरी प्रक्रिया के दौरान अंकिता के माता-पिता और परिवार की भावनाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिजनों की मांग के अनुरूप तीन बार सरकारी अधिवक्ता बदले गए। इतना ही नहीं, अंकिता के माता-पिता द्वारा सीबीआई जांच की मांग किए जाने पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उनकी भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रकरण की सीबीआई जांच के आदेश भी दिए। सरकार ने परिवार को संबल प्रदान करने के लिए ₹25 लाख की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई। इसके साथ ही दिवंगत अंकिता के भाई और उनके पिता को नौकरी प्रदान कर परिवार के साथ खड़े होने की अपनी प्रतिबद्धता को भी पूरा किया। इस पूरे प्रकरण में मुख्यमंत्री धामी और पार्टी का रुख पहले दिन से स्पष्ट रहा कि अपराधी कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसे कानून के कठघरे तक पहुंचाकर कठोरतम सजा दिलाई जाएगी। जांच को लेकर उठाए गए सवालों के बीच न्यायिक स्तर पर भी जांच प्रक्रिया को संतोषजनक माना गया और मजबूत अभियोजन के परिणामस्वरूप दोषियों को सजा तक पहुंचाया गया।
वहीं कांग्रेस और विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए अनुकृति ने कहा कि तथाकथित ‘VIP’ नाम की आड़ में वे लगातार जनता के बीच भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं। अगर इस संबंध में किसी के पास कोई ठोस तथ्य अथवा साक्ष्य था, तो उसे जांच एजेंसियों और न्यायालय के समक्ष रखा जाना चाहिए था। अदालत के बाहर झूठे आरोप लगाना और जनता को भ्रमित करना, देवभूमि की बेटी से जुड़े अत्यंत संवेदनशील प्रकरण पर घृणित राजनीति करने जैसा है।
वहीं दोहराया, प्रदेशवासी गवाह है कि मुख्यमंत्री धामी और पार्टी ने पहले दिन ही स्पष्ट कर दिया था कि बेटी अंकिता को न्याय दिलाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। अंकिता को न्याय दिलाने की लड़ाई में हम केवल आश्वासनों तक सीमित नहीं रहे है बल्कि कठोरतम कार्रवाई, मजबूत पैरवी और निर्णायक परिणाम में परिवार के साथ खड़ी रही है। जबकि विपक्ष ऐसे तमाम संवेदनशील एवं गंभीर मुद्दों पर भी गिद्ध राजनीति से हमेश तात्कालिक लाभ लेने में जुटा रहा। भाजपा के लिए यह मुद्दा राजनैतिक नहीं है, इसलिए हमें विश्वास है कि समय आने पर देवतुल्य जनता लोकतांत्रिक तरीके से नकारत्मक राजनीति करने वालों को करारा जवाब देगी।

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