30 August 2025

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राज्य निर्वाचन आयोग के एक्शन पर लेफ्ट के सवाल, बेतालघाट कांड में आधा अधूरा एक्शन लेने का हवाला देकर इंद्रेश मैखुरी ने बोला हमला

राज्य निर्वाचन आयोग के एक्शन पर लेफ्ट के सवाल, बेतालघाट कांड में आधा अधूरा एक्शन लेने का हवाला देकर इंद्रेश मैखुरी ने बोला हमला

राज्य निर्वाचन आयोग पर लेफ्ट ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। कामरेड इंद्रेश मैखुरी ने कहा नैनीताल जिले के बेतालघाट में ब्लॉक प्रमुख चुनाव के दौरान हुई फायरिंग और हिंसा की घटना को देखते हुए, उत्तराखंड निर्वाचन आयोग द्वारा भवाली के क्षेत्राधिकारी (सीओ) प्रमोद साह के विरुद्ध विभागीय कार्यवाही और बेतालघाट के थानाध्यक्ष अनीस अहमद के विरुद्ध निलंबन की संस्तुति की गयी है। उक्त कार्यवाही की संस्तुति अपर्याप्त और आधी-अधूरी है। मैखुरी ने कहा कि ये कार्यवाही की संस्तुति, हिंसा की जिम्मेदारी तय करने से ज्यादा उच्च पदस्थ अफसरों को जिम्मेदारी से बचाने के लिए की गयी है. नैनीताल में जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के दौरान हुई हिंसा के मामले में किसी कार्यवाही की संस्तुति न किया जाना भी दर्शाता है कि उक्त संस्तुतियों का मकसद समग्र कार्यवाही नहीं है।

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बेतालघाट में फायरिंग और नैनीताल में हिंसा की घटना होने की संपूर्ण जिम्मेदारी नैनीताल जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक प्रहलाद नारायण मीणा पर आयद होनी चाहिए और उन्हें पद से हटाते हुए निलंबित किया जाना चाहिए. 14 अगस्त को उच्च न्यायालय में सुनवाई के दौरान जिस तरह श्री मीणा ने सुनवाई की तिथि और समय के दौरान खरीदे स्टाम्पों पर पांच दिन पुराना शपथ पत्र दर्शाने की कोशिश की, उस पर उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश ने श्री मीणा पर अत्यंत कठोर टिप्पणी की. उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश की टिप्पणी के बाद तो यह स्पष्ट हो ही गया कि श्री मीणा कानून के दायरे के बाहर जा कर पक्षपातपूर्ण तरीके से कार्य कर रहे हैं. इसलिए उनको तत्काल हटाया जाना चाहिए और उनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए.

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क्षेत्र पंचायत प्रमुख के चुनाव के दौरान ही अल्मोड़ा जिले के द्वाराहाट में भी जिस तरह की हिंसक घटनाओं के वीडियो सामने आये, वे पुलिस की नाकामी और कानून व्यवस्था के ध्वस्त हो जाने के सबूत हैं. इसलिए अल्मोड़ा जिले के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक एवं अन्य पुलिस कर्मियों को जिम्मेदार मानते हुए, उन्हें पदों से हटाया जाना चाहिए और उनपर कठोर दंडात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए.

जिस तरह से त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की शुरुआत से उत्तराखंड पंचायत राज अधिनियम के प्रावधानों के विरुद्ध जाने का रास्ता उत्तराखंड निर्वाचन आयोग ने खोला और पूरे चुनाव को मज़ाक में तब्दील कर दिया, उसके लिया जरूरत तो यह भी है कि उत्तराखंड निर्वाचन आयुक्त सुशील कुमार और सचिव राहुल गोयल को भी तत्काल पद से हटाया जाए.

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