उत्तराखंड में लगातार साम्प्रदायिक उन्माद पैदा करने की कोशिशों की भाकपा (माले) तीव्र निंदा करती है और सांप्रदायिक जहर घोलने की कोशिश करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए कठोर कानूनी करने की मांग करती है। लेफ्ट की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि श्रीनगर (गढ़वाल) में जिस तरह घृणा भरे भाषण दे कर अल्पसंख्यकों के विरुद्ध जहर उगला गया, अल्पसंख्यकों का आर्थिक बहिष्कार करने का आह्वान किया गया और दुकानें जलाने की धमकी दी, वह न केवल अत्यंत आपत्तिजनक है बल्कि कानून व्यवस्था को ध्वस्त करने की खुली धमकी है।
उच्चतम न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए पौड़ी पुलिस को इस मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मुकदमा दर्ज करके कठोर कार्यवाही करनी चाहिए. साथ ही निर्दोष अल्पसंख्यकों की सुरक्षा की गारंटी भी की जानी चाहिए. किसी भी समुदाय के व्यक्ति द्वारा अपराध किये जाने की दशा में भी कार्यवाही करने का हक पुलिस को है, किसी उन्मादी भीड़ को नहीं। देहरादून के रायपुर क्षेत्र में युवती के साथ सामूहिक दुष्कर्म के आरोपों के बाद भी घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की गयी, वह अत्यंत निंदनीय है. यह हैरत में डालता है कि बलात्कार के आरोप लगने पर एक उन्मादी भीड़ सिर्फ इसलिए आरोपियों के पक्ष में उतर आती कि आरोपी स्व धर्मी हैं। हर मसले को सांप्रदायिक रंग देने और उसे उन्माद- उत्पात का माध्यम बनाने वाले तत्वों पर कठोर कार्यवाही की जानी चाहिए.

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