29 October 2026

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हरिद्वार में अर्धकुंभ या कुंभ को लेकर बीजेपी के अंदर से ही उठे सवाल, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने डबल इंजन सरकार को घेरा

हरिद्वार में अर्धकुंभ या कुंभ को लेकर बीजेपी के अंदर से ही उठे सवाल, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने डबल इंजन सरकार को घेरा

उत्तराखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष करन माहरा ने बीजेपी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। माहरा ने बीजेपी के अंदर से ही उठ रहे सवालों का हवाला देकर सरकार पर हमला बोला। माहरा ने कहा कि धर्म की राजनीति करने वाली भाजपा सरकार पर अब सवाल उसके अपने वरिष्ठ नेता उठा रहे हैं। हरिद्वार जैसे विश्वप्रसिद्ध धार्मिक नगर में यदि धार्मिक परंपराओं, कुंभ-अर्धकुंभ की व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े विषयों पर भी सरकार को सफाई देनी पड़ रही है, तो स्थिति की गंभीरता समझी जा सकती है।हरिद्वार में अर्धकुंभ या कुंभ को लेकर बीजेपी के अंदर से ही उठे सवाल, पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा ने डबल इंजन सरकार को घेरा

भाजपा के वरिष्ठ नेता, हरिद्वार जिला पंचायत के पूर्व अध्यक्ष, श्री गंगा सभा हरकी पैड़ी के पूर्व अध्यक्ष और मेला प्राधिकरण के पूर्व अध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि वर्ष 2027 में कुंभ की तैयारियों के नाम पर सैकड़ों करोड़ रुपये के विकास कार्य किए जा रहे हैं। अशोक त्रिपाठी ने इन परियोजनाओं की लागत और पारदर्शिता को लेकर गंभीर प्रश्न उठाए हैं। सबसे बड़ा सवाल सती कुंड के विकास कार्य को लेकर है। उनका दावा है कि जिस स्तर का काम लगभग पांच करोड़ रुपये में हो सकता है, उसके लिए लगभग 50 करोड़ रुपये तक की परियोजना की बात सामने आ रही है।

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अगर सरकार के पास इसका तकनीकी और वित्तीय औचित्य है तो वह जनता के सामने रखे। डीपीआर सार्वजनिक करे। टेंडर सार्वजनिक करे। कार्यवार लागत बताए। किस कंपनी को काम दिया गया, किस आधार पर दिया गया और आखिर ऐसी कौन-सी विशेष व्यवस्था की जा रही है कि लागत कई गुना बढ़ रही है—यह सब जनता को जानने का अधिकार है।

माहरा ने कहा धर्म के नाम पर राजनीति करने वालों से जनता यह भी पूछेगी कि क्या अब धर्मस्थलों और धार्मिक आयोजनों के विकास के नाम पर भी सवाल पूछना अपराध हो गया है?गंगा कॉरिडोर को लेकर भी स्थानीय जनता, व्यापारियों और तीर्थ पुरोहितों को पर्याप्त रूप से विश्वास में न लेने के आरोप सामने आए हैं। हरिद्वार किसी कॉरपोरेट परियोजना की खाली जमीन नहीं है। यहां हजारों परिवारों की रोजी-रोटी, पीढ़ियों की परंपराएं, व्यापार और धार्मिक व्यवस्था जुड़ी हुई है। सरकार यदि सचमुच हरिद्वार का विकास करना चाहती है तो उसे बंद कमरों में फैसले करने के बजाय हर प्रभावित व्यक्ति को योजना की पूरी जानकारी देनी चाहिए।

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सबसे गंभीर बात ये है कि अशोक त्रिपाठी ने अपने ऊपर प्रशासनिक दबाव बनाने तक का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री उनसे मिलना नहीं चाहते, लेकिन हरिद्वार-रुड़की विकास प्राधिकरण के कर्मचारी मकान का नक्शा देखने के नाम पर सक्रिय हो जाते हैं।

माहरा ने कहा कि अगर ये केवल सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है तो सरकार दस्तावेज सार्वजनिक करे। और यदि सवाल उठाने के बाद ही अचानक सरकारी विभाग सक्रिय हो रहे हैं, तो मुख्यमंत्री को यह बताना चाहिए कि क्या अब अपनी ही सरकार से सवाल पूछना भी अपराध बन गया है?

सत्ता की यह कैसी स्थिति है कि विपक्ष सवाल पूछे तो उसे राजनीतिक विरोध कहा जाता है और अपने ही दल का वरिष्ठ नेता सवाल पूछे तो उस पर दबाव बनाए जाने के आरोप लगने लगते हैं?

भाजपा सरकार को अब भाषण नहीं, दस्तावेज देने चाहिए।

बताइए—

सती कुंड परियोजना की वास्तविक लागत क्या है?

किस कंपनी को ठेका दिया गया और किस प्रक्रिया से दिया गया?

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गंगा कॉरिडोर की पूरी डीपीआर जनता से क्यों नहीं साझा की जा रही?

करन माहरा ने कहा स्थानीय लोगों को विश्वास में लेने के लिए कौन-सी प्रक्रिया अपनाई गई? और सबसे महत्वपूर्ण—अपनी ही पार्टी के वरिष्ठ नेता द्वारा उठाए गए सवालों का मुख्यमंत्री जवाब क्यों नहीं दे रहे?धर्मनगरी हरिद्वार की आस्था, मां गंगा और जनता का पैसा किसी सरकार की निजी संपत्ति नहीं है। अगर हर काम पारदर्शी है तो सरकार को सवालों से डरना नहीं चाहिए। सारे दस्तावेज सार्वजनिक कीजिए और जनता को बताइए कि विकास के नाम पर आखिर खर्च कहां और कैसे हो रहा है। क्योंकि जब धर्म के नाम पर राजनीति करने वाली सरकार पर धर्म से जुड़े विकास कार्यों में ही अपारदर्शिता के आरोप लगें, तो सवाल और भी बड़े हो जाते हैं।