हरियाणा के कुरुक्षेत्र की पंजाबी धर्मशाला में उत्तराखंड और हरियाणा कांग्रेस के जिलाध्यक्षों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया गया है। इस ऐतिहासिक प्रशिक्षण शिविर के 9वें दिन कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का आगमन हुआ।
राहुल गांधी ने न केवल जिलाध्यक्षों के साथ लगभग चार घंटे तक राजनीतिक, सामाजिक और समसामयिक मुद्दों पर गहन संवाद किया, बल्कि एक अत्यंत मानवीय और संवेदनशील पहल करते हुए जिलाध्यक्षों के परिवारजनों से भी आत्मीय मुलाकात की।

इसी क्रम में परवादून कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल के परिवार से भी उनकी गर्मजोशी भरी भेंट हुई। उनियाल के साथ उनकी पत्नी पल्लवी व बेटे मितांश ने राहुल गांधी से मुलाकात की। इस अवसर पर मोहित उनियाल ने परिवार सहित राहुल गांधी को भारतीय संविधान की प्रस्तावना भेंट की। यह क्षण लोकतांत्रिक मूल्यों, सामाजिक न्याय और संवैधानिक मर्यादाओं के प्रति कांग्रेस की अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक बन गया। उनियाल ने कहा की ये क्षण मेरे लिए ही नहीं, बल्कि सभी कांग्रेस जिलाध्यक्षों और उनके परिवारों के लिए ऐतिहासिक और अविस्मरणीय है। कांग्रेस के इतिहास में यह पहली बार है जब लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जिलाध्यक्षों के परिवारों से मिलकर उन्हें सम्मान और अपनत्व दिया। यह मुलाकात हमारे लिए भावनात्मक संबल, प्रेरणा और नई ऊर्जा का स्रोत है। राहुल गांधी की संवेदनशीलता और मानवीय दृष्टिकोण ने यह सिद्ध कर दिया कि कांग्रेस केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि एक विचारधारा और परिवार है।उन्होंने आगे कहा,परिवारों की भूमिका को पहचानना और उन्हें सम्मान देना, संगठन की जड़ों को और मजबूत करता है। यह मुलाकात हमें संविधान, लोकतंत्र और सामाजिक समरसता की रक्षा के लिए और अधिक संकल्पित करती है।
इस मुलाकात के दौरान राहुल गांधी ने संगठन की मजबूती, जमीनी संघर्ष, सामाजिक समावेशन और लोकतांत्रिक संस्थाओं की रक्षा पर बल दिया। परिवारजनों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस कार्यकर्ताओं और उनके परिवारों का त्याग व धैर्य ही पार्टी की असली ताकत है। राहुल गांधी ने कहा कि परिवार और राजनीति के बीच संतुलन होना बेहद आवश्यक है। हमें जनता के अधिकारों और लोकतंत्र की रक्षा के लिए निरंतर संघर्ष भी करना है, लेकिन साथ-साथ अपने परिवारों को समय देना और उनके साथ मजबूती से खड़ा रहना भी उतना ही ज़रूरी है। ये दिन कांग्रेस के संगठनात्मक इतिहास में एक नई मिसाल के रूप में दर्ज होगा, जिसने राजनीति को मानवीय संवेदना और पारिवारिक सम्मान से जोड़ने का संदेश दिया है ।

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