सिलक्यारा में सफल रेस्क्यू अभियान के बाद पूरे देश ने राहत की सांस ली है। सभी श्रमिक ठीक हैं जिससे उनके परिजन भी खुश हैं। रेस्क्यू अभियान 17 दिन चला अलग अलग टीमों ने योगदान दिया। अपनी तरह का ये पहला अभियान है जो इतना लंबा चला और सभी श्रमिक बचा लिए गए। इस पूरे अभियान के लिए रेस्क्यू में जुटी सभी टीमों और सर सदस्य को देश सेल्यूट कर रहा है।
वहीं बीजेपी के नेता इस रेस्क्यू अभियान के लिए पीएम मोदी और सीएम धामी को भी क्रेडिट दे रहे हैं। लेकिन पू्र्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने कुछ ऐसा कर दिया जिसे लेकर सियासी गलियारों में चर्चा तेज है और कई मायने भी निकाले जा रहे हैं। त्रिवेंद्र रावत का रुख क्या है वो आपको बताएं उससे पहले बीजेपी के कुछ नेताओं के रिएक्शन जान लीजिए।
निशंक ने मोदी और धामी को सराहा
हरिद्वार से सांसद और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने टनल से श्रमिकों के निकालने के बाद सोशल मीडिया पर लिखा “एक अटूट विश्वास, हौसले और आस्था की जीत !भगवान बद्री केदार जी की असीम कृपा, करोड़ों देशवासियों की प्रार्थना भारत सरकार एवं उत्तराखंड सरकार के विभिन्न एजेंसियों के प्रयास के फलस्वरूप हमारे श्रमिक भाई सकुशल टनल से बाहर आ गए हैं।
आदरणीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के मार्गदर्शन में त्वरित बचाव कार्य को किया गया। माननीय मुख्यमंत्री श्री Pushkar Singh Dhami जी, प्रधानमंत्री जी के पूर्व सलाहकार माननीय भास्कर खुल्बे जी एवं माननीय केंद्रीय मंत्री श्री General V.K. Singh जी पल-पल जमीनी स्तर पर मॉनिटरिंग कर रहे थे, आप सबको बधाई और आप सबका आभार।
यह पूरा अभियान संवेदनशीलता, कुशलता और साहस का प्रतीक रहा है।”
महाराज, धन सिंह ने भी धामी का किया जिक्र
रेस्क्यू अभियान की सफलता को लेकर उत्तराखंड सरकार के मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत ने भी पीएम मोदी के साथ साथ सीएम धामी की तारीफ की।
दोनों ने ही सोशल मीडिया पोस्ट के जरिये बधाई दी।
विधानसभा अध्यक्ष, प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष की पोस्ट
उत्तराखंड विधानसभा की अध्यक्ष ऋतु खंडूरी और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी पीएम मोदी के साथ मुख्यमंत्री धामी को क्रेडिट देने में कोई कसर नहीं छोड़ी।
दोनों ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर जमकर सराहना की।
पूर्व सीएम त्रिवेंद्र रावत ने चौंकाया
उत्तराखंड बीजेपी के ज्यादातर नेता धामी को फुल क्रेडिट दे रहे हैं, उनके नाम के नारे भी लगा रहे हैं और एक बार फिर धाकड़ धामी बताकर जश्न भी मना रहे हैं लेकिन त्रिवेंद्र रावत ने ऐसा नहीं किया। त्रिवेंद्र ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में रेस्क्यू में जुटी टीमों और प्रधानमंत्री का जिक्र किया मगर धामी का नाम तक नहीं लिखा। त्रिवेंद्र ने पोस्ट के जरिये संदेश दिया
“बहादुर श्रमिक भाइयों ने इस विकट स्थिती में धैर्य और दृढ़ता से इस संकट का सामना किया, उनके इस जज्बे को सलाम।
आस्था में ही चमत्कार! बाबा बौखनाग की कृपा दृष्टि, रेस्क्यू ऑपरेशन में रात दिन लगी तमाम एजेंसियां और देश दुनिया से करोड़ों लोगों की दुवाओं के चलते सिलक्यारा टनल में फंसे हमारे श्रमिक भाई जिंदगी की जंग जीत पाए।
बड़ा ही भावुक क्षण भी है, लेकिन मैं नमन करूंगा अपने श्रमिक भाइयों को जिन्होंने धैर्य बनाए रखा और सैल्यूट करूंगा अपनी रेस्क्यू ऑपरेशन की तमाम एजेंसियों को, सेना के जवानों को, विशेषज्ञों को जिन्होंने विश्वास कायम रखा।
मैं विशेष रूप से धन्यवाद प्रकट करना चाहूंगा अपने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का जिन्होंने अपने श्रमिकों की विशेष चिंता करते हुए विदेश से भी अत्याधुनिक तकनीक से लैस मशीनों एवं विशेषज्ञों के साथ ही सेना के हमारे जवानों और उच्च अधिकारियों, विशेषज्ञों को इस जंग को जीतने के लिए भेजा। आप स्वयं इस दौरान की सभी गतिविधियों को मॉनिटर करते रहे। जय बाबा बौखनाग देवता! जय बजरंबली!”

त्रिवेंद्र रावत की इस पोस्ट के सियासी मायने बहुत अहम हैं। जब उत्तराखंड की पूरी बीजेपी धामी को हीरो साबित करने में जुटी है तब त्रिवेंद्र ने मुख्यमंत्री का नाम तक नहीं लिया। ऐसे में सवाल यही है कि क्या त्रिवेंद्र रावत धामी के एफर्ड से खुश नहीं हैं या धामी के साथ मनमुटाव की जो अटकलें लगती हैं वो सही हैं।
बहरहाल ये त्रिवेंद्र और धामी का आपसी मामला है लेकिन जो दिख रहा है वो तो यही बताता है कि त्रिवेंद्र रावत फिलहाल धामी को किसी भी तरह तरजीह देने के मूड में नहीं हैं।



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