उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस ने तैयारी तेज कर दी है। पार्टी को फोकस घोषणा पत्र के जरिए जनता का ध्यान अपनी तरफ खींचने और समाज के हर तबके को बतौर मतदाता अपने पक्ष में करने की है। घोषणा पत्र समिति के अध्यक्ष एवं विधानसभा में उपनेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में उत्तराखंड में ‘सरकार’ पूरी तरह नदारद रही है।
सरकार होने का भ्रम पालने वाले लोग वास्तव में केवल ‘मैनेजर’ बनकर रह गए हैं, ऐसे मैनेजर, जो असंवेदनशील और जनता से कटे हुए हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार का अर्थ केवल सत्ता में बैठे लोगों या प्रशासनिक तंत्र से नहीं, बल्कि जनता द्वारा चुनी गई, जनता के लिए और जनता के प्रति जवाबदेह व्यवस्था से है। दुर्भाग्य से पिछले दस वर्षों में सरकार और जनता के बीच संवाद एवं संवेदनशीलता का लगातार अभाव रहा है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस का घोषणा पत्र उत्तराखंड में जनता द्वारा चुनी गई, जनता के लिए और जनता के प्रति जवाबदेह सरकार की पुनर्स्थापना का संकल्प होगा। भुवन कापड़ी ने कांग्रेस के घोषणा पत्र के 5 प्रमुख संकल्प बताये.
1. ‘सरकार’ की पुनर्स्थापना: ऐसी सरकार की स्थापना, जो जनता द्वारा चुनी हुई, जनता के प्रति जवाबदेह और जनता की भागीदारी से संचालित हो तथा निर्णय जनता के हित में ले।
2. जनता की आवाज से बनेगा घोषणा पत्र: घोषणा पत्र को केवल चुनावी वादों का दस्तावेज नहीं, बल्कि जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं और सुझावों का दस्तावेज बनाया जाएगा। इसके निर्माण में समाज के प्रत्येक वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
3. लोकतांत्रिक जवाबदेही और जनभागीदारी: आने वाली कांग्रेस सरकार को जनता से किए गए वादों के प्रति राजनीतिक और लोकतांत्रिक रूप से जवाबदेह बनाया जाएगा तथा सरकार और जनता के बीच संवाद, संवेदनशीलता एवं सहभागिता को शासन का आधार बनाया जाएगा।
4. नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना: शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को पुनः सरकार की मूल जिम्मेदारी के रूप में स्थापित किया जाएगा। सरकारी स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को मजबूत करने, सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था की बहाली का प्रयास किया जाएगा।
5. गांधीवादी-सर्वोदयी ग्रामीण विकास मॉडल की पुनर्स्थापना: विकास का केंद्र गाँव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और समाज का अंतिम व्यक्ति होगा। स्थानीय संसाधनों, श्रम और ज्ञान पर आधारित रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएंगे तथा ग्राम सभाओं और स्थानीय संस्थाओं को अधिक अधिकार देकर ग्राम स्वराज और जनभागीदारी को मजबूत किया जाएगा।
घोषणा पत्र समिति के संयोजक डॉ. प्रेम बहुखण्डी ने कहा कि नेहरूवादी समाजवाद और सार्वजनिक संस्थाओं की पुनर्स्थापना कांग्रेस के घोषणा पत्र का मूलमंत्र होगा। कांग्रेस सरकार बनने पर सरकारी स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालयों को मजबूत करने, सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाने तथा पुरानी पेंशन व्यवस्था की वापसी का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में सार्वजनिक संस्थानों को कमजोर करना तथा स्कूलों और स्वास्थ्य केंद्रों को बंद करना सरकार की नाकामी है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस गांधीवादी-सर्वोदयी ग्रामीण विकास मॉडल को भी पुनर्स्थापित करेगी, जिसमें विकास का केंद्र गाँव, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और अंतिम व्यक्ति होगा। ग्राम सभाओं को मजबूत कर कृषि, बागवानी, पशुपालन, वनोपज, कुटीर उद्योग और स्थानीय उद्यमों के माध्यम से गाँवों में रोजगार बढ़ाकर पलायन रोकने का प्रयास किया जाएगा। उन्होंने कहा, “विकास कुछ लोगों का नहीं, सबका हो और सबसे पहले उस व्यक्ति तक पहुँचे जो सबसे पीछे छूट गया है, यही गांधीवादी सर्वोदयी सोच का मूल है।”
घोषणा पत्र समिति की सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता नेता सूर्यकांत धस्माना ने कहा कि यह विडंबना है कि जिस उत्तराखंड के निर्माण के लिए हजारों लोगों ने आंदोलन किया, आज उसी राज्य में आंदोलनकारियों को अपनी मांगों के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। उन्होंने सवाल किया, “सरकार आखिर कहाँ है? क्या सरकार और जनता के बीच संवाद पूरी तरह समाप्त हो गया है?” उन्होंने कहा कि कांग्रेस घोषणा पत्र निर्माण की प्रक्रिया को जन-आंदोलन का स्वरूप देगी और किसान, मजदूर, युवा, महिलाएँ, कर्मचारी, व्यापारी, शिक्षक, स्वास्थ्यकर्मी, उद्यमी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा ग्रामीण और प्रवासी उत्तराखंडियों सहित हर वर्ग से संवाद कर उनकी समस्याओं, सुझावों और आकांक्षाओं को घोषणा पत्र में शामिल करेगी।
घोषणा पत्र समिति के सदस्य एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुजाता पॉल ने कहा कि रोजगार की मांग करने वाले युवाओं पर लाठीचार्ज तथा जोशीमठ और हेलंग के लोगों की समस्याओं के प्रति सरकार का असंवेदनशील रवैया चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि धरना, प्रदर्शन, आंदोलन और भूख हड़ताल लोकतंत्र की कमजोरी नहीं, बल्कि उसकी ताकत हैं। सरकार का दायित्व है कि वह आंदोलनकारियों से संवेदनशीलता और संवाद के माध्यम से उनकी समस्याओं का समाधान करे। उन्होंने कहा कि कांग्रेस घोषणा पत्र निर्माण में समाज के सभी वर्गों को सहभागी बनाएगी और जनता की आकांक्षाएँ, समस्याएँ एवं सुझाव आने वाली कांग्रेस सरकार के लिए जनता के प्रति राजनीतिक प्रतिबद्धता बनेंगे।
कांग्रेस का स्पष्ट मानना है कि उत्तराखंड की जनता केवल घोषणा पत्र की पाठक नहीं, बल्कि उसके निर्माण की सहभागी होनी चाहिए। जनता की आकांक्षाओं, समस्याओं और सुझावों को घोषणा पत्र में स्थान दिया जाएगा और यह घोषणा पत्र आने वाली कांग्रेस सरकार के लिए जनता के प्रति एक राजनीतिक प्रतिबद्धता बनेगा।

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