पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने राशन कार्ड के मुद्दे पर डबल इंजन सरकार को घेरा है। हरीश रावत ने कहा है हरिद्वार में काफी समय पहले से लगभग तीन-चार साल पहले से बीपीएल कार्ड धारकों के कार्ड सत्यापन के नाम पर ले लिये गये हैं या नये बनाने के नाम पर, किसी न किसी बहाने खाद्य विभाग द्वारा ले लिये गये हैं और कहा गया कि नये कार्ड बनाकर के देंगे और तब से वो कार्ड धारक कभी किसी के पास, कभी किसी के पास जा रहे हैं, लेकिन न वो कार्ड उनको दिए जा रहे हैं और न गरीबों को दिए जाने वाला अन्न दिया जा रहा है और ऐसे लोगों की संख्या अकेले हरिद्वार जनपद में हजारों में है।
मैंने विभागीय अधिकारियों से बात की, वो कहते हैं हम देहरादून से आदेश की प्रतीक्षा कर रहे हैं। देहरादून-दिल्ली से आदेश की प्रतीक्षा कर रहा हैं और गरीब कार्ड धारक अपने कार्ड की प्रतिक्षा कर रहा है और उससे मिलने वाली अन्न और दूसरी सुविधाएं हैं उसकी प्रतीक्षा कर रहा है। मैंने आज विभाग को चेतावनी दी है कि यदि आपने इस समस्या का समाधान अगले 10 दिनों में नहीं किया और उनको नए कार्ड बनाकर के नहीं दिए तो मैं विभाग के कार्यालय के सम्मुख धरने पर बैठूंगा। गजब हो गया, एक तरफ केंद्र सरकार गरीबों को मुफ्त का राशन का ढिंढोरा पीटकर उसको अपनी बड़ी उपलब्धि के रूप में दर्शा रही है। जबकि सत्यता यह है कि यह खाद्य सुरक्षा कानून जिसमें दो रुपए किलो गेहूं और तीन रुपए किलो चावल मिलता था, यह कांग्रेस की सरकार करके गई है। इन्होंने केवल उसको पांच किलो तक सीमित कर दिया और हां, दो रुपया और तीन रुपया जो देना पड़ता था प्रति किलो वह माफ कर दिया जो पहले अधिकार था उसको अब भीख में बदल दिया और दूसरी तरफ गरीबों के कार्ड छीनकर सत्यापन के नाम पर उनको परेशान किया जा रहा हैं।

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