उत्तराखंड में लेफ्ट के नेता और समाजसेवी इंद्रेश मैखुरी ने राम तिराहा कांड पर आए फैसलो को अधूरा इंसाफ बताया है। मैखुरी ने कहा कि 1994 में 1 और 2 अक्टूबर की दरमियान रात हुए मुजफ्फरनगर कांड के 30 साल बाद दो आरोपियों को दोषी करार दिया जाना,उस बर्बर दमन की पुष्टि करता है, जो उस काली रात में उत्तराखंड की माता- बहनों और युवाओं के साथ हुआ,लेकिन अभी भी इस कांड के मुख्य दोषियों को सजा न होना दर्शाता है कि 30 वर्षों में पूर्ण न्याय नहीं बल्कि न्याय का अंश भर ही हो सका है।
मुजफ्फरनगर के तत्कालीन जिलाधिकारी अनंत कुमार सिंह और मेरठ जोन के तत्कालीन डीआईजी बुआ सिंह मुजफ्फरनगर कांड के मुख्य दोषी अधिकारी हैं, जब तक इन्हें सजा नहीं होती तब तक न्याय अधूरा है.
ये विडंबना है कि उत्तराखंड राज्य बनने के 23 वर्षों में किसी सरकार ने उत्तराखंड आंदोलन के दौरान हुए खटीमा, मसूरी, मुजफ्फरनगर और श्रीयंत्र टापू कांड के दोषियों को सजा दिलाने के लिए कोई प्रभावी पैरवी या प्रयास नहीं किया।

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