18 May 2026

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बिनसर अग्निकांड पर घिरी सरकार

बिनसर अग्निकांड पर घिरी सरकार

शुक्रवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने प्रेस वार्ता कर प्रदेश के ज्वलंत मुद्दों पर धामी सरकार को जमकर निशाना साधा। दसौनी ने कहा कि पिछले दो महीनों से उत्तराखंड भीषण वानग्नि से झुलस रहा है, सुलग रहा है परंतु वन मंत्री और प्रदेश के मुखिया कुंभकरण की नींद में सोए हैं।

दसौनी ने कहा की हजारों हेक्टेयर जंगल जलकर खाक हो गए कई वनकर्मियों की और स्थानीय लोगों की मौतें हो गई पर फिर भी सरकार और प्रशासन का दिल नहीं पिघला।‌ दसौनी ने कहा कि बीते रोज अल्मोड़ा बिनसर में चार वन कर्मियों की मौत अत्यंत दुखद एवं दुर्भाग्यपूर्ण है। दसौनी ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यह कोई स्वाभाविक मौतें नहीं हैं बल्कि सिस्टम के द्वारा की गई हत्या है। दसौनी ने कहा की विभाग को ये जानकारी तक ना होना कि आग बुझाने के लिए आठ कर्मचारी गए थे या नौ अधिकारियों गंभीरता बताती है,उन कर्मचारियों की गाड़ी में सिर्फ एक गैलन पानी का होना और इन वन कर्मियों के पास आग बुझाने के लिए पर्याप्त सुविधाओं और इक्विपमेंट का ना होना विभाग की संवेदनशीलता और उदासीनता को दर्शाता है।

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सरकार और सीएम पर सीधा निशाना

दसौनी ने कहा कि मुख्यमंत्री ने 10 लाख रुपए मुआवजे की घोषणा तो की है पर क्या 10 लख रुपए में 35 वर्षीय दीवान राम 56 वर्षीय त्रिलोक मेहता 50 वर्षीय पुराण मेहरा और 21 वर्षीय करन आर्य जैसे अपने परिवारों के कमाऊ पूत लौटा पाएंगे मुख्यमंत्री? क्या वापस कर पाएंगे बूढ़े मां-बाप को उनकी संताने? विधवाओं को उनके सुहाग और बिलखते बच्चों को उनके पिता? दसौनी ने कहा कि कितनी बड़ी विडंबना है कि प्रदेश की जनता बार-बार भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत की सरकार और पांचो सांसद देने का काम कर रही है लेकिन अल्मोड़ा जैसे जिले में एक बर्न वार्ड तक नहीं है ?महिला अस्पताल ,बेस अस्पताल और मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद ,9 सीएचसी और 6 पीएचसी सेंटर होने के बावजूद बर्न आईसीयू नहीं है

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जो चार वनकर्मी बुरी तरह से झुलस गए थे उनका उपचार अल्मोड़ा में नहीं हो पाया और उन्हें हायर रेफर केंद्र भेज दिया गया।गरिमा ने कहा की लगातार विपक्ष के आगाह करने के बावजूद न वन मंत्री और ना ही मुख्यमंत्री ने इन वारदातों को गंभीरता से लिया। मुख्यमंत्री पहले चुनाव प्रचार में व्यस्त रहे और अब दूसरे प्रदेशों में हो रहे शपथ ग्रहण समारोह में भाग लेने से उन्हें फुर्सत नहीं है। जिस मुखिया का अपना प्रदेश कभी वन अग्नि और कभी चार धाम यात्रा में हो रही कोताही और अव्यवस्थाओं से जूझ रहा हो उसका इस तरह से लंबे अरसे तक प्रदेश की अनदेखी करना और राज्य से गायब रहना उनकी असंवेदनशीलता ही दर्शाता है।