16 May 2026

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12 दिसंबर से देहरादून में होगा आयुर्वेद कांग्रेस का आयोजन

12 दिसंबर से देहरादून में होगा आयुर्वेद कांग्रेस का आयोजन

आयुर्वेद के परंपरागत ज्ञान को समझने-जानने के अलावा इसके उपचार की सुविधा भी एक ही जगह पर मिले तो इससे बेहतर और क्या हो सकता है। वर्ल्ड आयुर्वेद कांग्रेस एवं आरोग्य एक्सपो-2024 में ऐसा ही मौका उपलब्ध हो रहा है। विश्व स्तरीय इस कार्यक्रम में विषय विशेषज्ञ आयुर्वेद के हर एक पहलु पर बात करेंगे, तो विशेषज्ञ चिकित्सक डेलीगेट्स के साथ ही सामान्य लोगों को भी इसका उपचार उपलब्ध कराएंगे। इसके लिए 12 तरह की ओपीडी पूरे समय एक्टिव रहेंगी। हर एक ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सक तैनात रहेंगे, जिनसे परामर्श भी मिलेगा और उपचार भी।

परेड ग्राउंड, देहरादून में यह कार्यक्रम 12 दिसंबर से शुरू होने जा रहा है। जो कि 15 दिसंबर तक चलेगा। आयुर्वेद का विश्व स्तरीय यह कार्यक्रम उत्तराखण्ड में पहली बार हो रहा है। वर्ष 2002 से इस तरह के कार्यक्रम की शुरूआत हुई थी। पिछले वर्ष गोवा को इस कार्यक्रम की मेजबानी मिली थी। उत्तराखण्ड इस आयोजन के लिए उत्साहित है और तैयारियों पर पूरा जोर है। वैसे भी आयुर्वेद के लिहाज से उत्तराखण्ड की समृद्ध विरासत रही है। इसलिए यहां से इस कार्यक्रम के संदेश देश-दुनिया में प्रभावी ढंग से जाएंगे।

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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि विश्व आयुर्वेद कांग्रेस और आरोग्य एक्सपो-2024 परंपरागत आयुर्वेद चिकित्सा को समझने और जानने के लिए एक बेहतरीन अवसर है। देवभूमि में आयुर्वेद के विभिन्न पहलुओं पर विचार मंथन निश्चित तौर पर सभी के लिए उपयोगी साबित होगा। इसके अलावा निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर में विशेषज्ञ डाॅक्टरों के अनुभव का लाभ भी लोगों को मिलेगा।

अपर सचिव आयुष डॉ. विजय कुमार जोगदंडे के अनुसार, कार्यक्रम स्थल पर 12 ओपीडी सक्रिय रहेंगी। इसके लिए तैयारियां चल रही हैं। हर ओपीडी में दो-दो विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे। मकसद ये ही है कि कार्यक्रम का हिस्सा बनने वालों को आयुर्वेद का ज्ञान भी मिले, साथ ही उनके रोगों का निदान भी परंपरागत चिकित्सा से संभव हो पाए।

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ओपीडी मर्म चिकित्सा (अस्थि संधि एव मर्म आघात चिकित्सा हेतु), नाड़ी परीक्षा, क्षार सूत्र, अग्नि कर्म एवं रक्तमोक्षण, नेत्र, शिरो, नासा एवं कर्ण रोग चिकित्सा, पंचकर्म चिकित्सा, स्त्री एवं प्रसूति रोग चिकित्सा, बाल रोग चिकित्सा, वृद्धजन्य रोग एवं मानस रोग चिकित्सा, स्वस्थवृत्त एवं अष्टांग योग चिकित्सा, किचन फार्मेसी एवं अरोमा थैरेपी, प्राकृतिक चिकित्सा और होम्योपैथी चिकित्सा के अंतर्गत चिकित्सीय परामर्श और उपचार किया जाएगा।