नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने धामी सरकार पर तीखा हमला बोला। विधानसभा के मॉनसून सत्र में सरकार के रवैया को लेकर कई सवाल उठाए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि विधानसभा सत्र में कांग्रेस ने साथर्क विपक्ष का रोल अपनाते हुए उपलब्ध समय और हर संसदीय प्रक्रिया का प्रयोग किया तो सरकार सदन में हर तरह से जिम्मेदारियों से भागती रही ।विधानसभा का सत्र तीन दिन चला कर सरकार ने दिखा दिया है कि , वह जनता के प्रति जबाबदेह नहीं है।जिन दो दिनों सत्र चल उसमें भी सरकार ने सदन के सम्मुख आये विषयों का जबाब देने में लापारवाही की है।
नियमों का पालन नहीं हो रहा
यशपाल आर्य ने कहा कि सदन को विधानसभा परिचालन नियमावली और परम्पराओं के अनुसार नहीं चलाया जा रहा है। इस कारण माननीय विधायकगण राज्य के अधिकांश ज्वलन्त मुद्दों को सदन में नहीं उठा पा रहे हैं। सदन में प्रश्न काल के लिए 7 दिनों को मुख्यमंत्री सहित सभी मंत्रियों में बांटा रहता है। संबधित वार को ही माननीय मंत्री गणों या माननीय मुख्यमंत्री जी से उनके विभागों से संबधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं। विधानसभा सत्र कुछ महिनों बाद होता है। यदि विधानसभा सत्र को दो दिन में ही स्थगित कर दिया जाता है तो उन दिनों के प्रश्नों को फिर उठाने का अवसर 8- 9 महिनों में ही आयेगा।
सोमवार को सत्र क्यों नहीं?
यशपाल आर्य ने सोमवार को विधानसभा की कार्यवाही ना होने पर पर सवाल खड़े किए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि उत्तराखंडर में सोमवार के दिन सालों से सत्र आहूत नहीं है। वर्तमान में सोमवार का दिन माननीय मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री के लिए तय है। जिनके पास राज्य के 40 के लगभग महत्वपूर्ण विभाग हैं। याने सोमवार के दिन सत्र आहूत न होने के कारण माननीय विधायकगण माननीय मुख्यमंत्री और संसदीय कार्यमंत्री जी से उनके विभागों के प्रश्न नहीं पूछ पा रहे हैं। ‘‘उत्तराखण्ड संभवतया देश का पहला राज्य होगा जहां नेता सदन यानी मुख्यमंत्री और संसदीय कार्य मंत्री को सरकार विधानसभा में अपने विभागों से संबधित प्रश्नों का जबाब देने से बचा रही है।
विपक्ष ने निभाई जिम्मेदारी- नेता प्रतिपक्ष
यशपाल आर्य ने कहा कि विपक्ष के मानननीय विधायक सदन को लंबा चलाने के संबध में कई बार प्रश्न उठा चुके हैं परंतु सरकार ने कोई जबाब नहीं दिया है। अब प्रदेश की जनता को भी बिभिन्न माध्यमों से प्रश्न करना चाहिए कि , उत्तराखण्ड की विधानसभा में सोमवार का दिन कब आयेगा ?विपक्ष ने कार्यस्थगन में उत्तराखण्ड में आपदा प्रबंधन ,अतिक्रमण के नाम पर जनता का उत्पीड़न ,बिगड़ती कानून-व्यवस्था और बेरोजगारी के मामले में सरकार को बुरी तरह से घेरा । सरकार के पास बिगड़ती कानून व्यवस्था और हर भर्ती में हो रहे घोटालों से संबधित विपक्ष के आरोपों का कोेई जबाब नहीं था। दो दिन के प्रश्न काल में माननीय मंत्री गण विपक्ष के सवालों और तर्कों के सामने कंही नहीं टिक पाए।

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