15 February 2026

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एक देश एक चुनाव पर बनी संसदीय समिति के सामने उत्तराखंड बीजेपी ने रखा अपना पक्ष

एक देश एक चुनाव पर बनी संसदीय समिति के सामने उत्तराखंड बीजेपी ने रखा अपना पक्ष

उत्तराखंड बीजेपी प्रतिनिधिमंडल ने आज ‘एक देश एक चुनाव’ मुद्दे पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के सम्मुख पार्टी का पक्ष प्रस्तुत किया है। जिसमें विकसित भारत निर्माण के लिए इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए उत्तराखंड भाजपा की तरफ से पूर्ण समर्थन किया गया। वहीं कोविद समिति की इस रिपोर्ट को देश की भावना बताते हुए, देशहित में जरूरी बताया।

दो दिवसीय प्रवास के तहत देहरादून पहुंची जेपीसी सदस्यों से आज मुलाकात करने वाले प्रतिनिधिमंडल में विधायक सहसपुर श्री सहदेव पुंडीर, दायित्वधारी एवं वरिष्ठ भाजपा नेता डॉक्टर देवेंद्र भसीन, रमेश गाड़िया, प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान शामिल हुए। इस मुलाकात में उन्होंने संसदीय समिति सदस्यों के सम्मुख मौखिक एवं लिखित रूप से स्पष्ट किया कि भाजपा उत्तराखण्ड इस विचार तथा इस दिशा में अपनाई जा रही प्रकिया का पूर्ण समर्थन करती है। जिसमें कहा गया कि आज भारत बदल रहा है और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एक नई ऊंचाई को स्पर्श कर रहा है। प्रधानमंत्री एक भारत श्रेष्ठ भारत के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसी क्रम में उन्होंने ‘एक राष्ट्र एक चुनाव’ के सिद्धांत को पुन: प्रतिपादित कर देश को नई दिशा दी है।

पार्टी का पक्ष रखते हुए कहा गए कि भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है । परिस्थितिजन्य कारणों से केंद्र, राज्य और स्थानीय निकाय स्तर पर अलग-अलग समय पर चुनाव कराए जाते हैं । इस व्यवस्था के कारण राजनीतिक अस्थिरता, विकास कार्यों में बाधा और अत्यधिक व्यय जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। ऐसे में “एक देश, एक चुनाव” का विचार इन समस्याओं का समाधान भी है और देश को नये समय के साथ नया आयाम देने वाला है। इसमें लोक सभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय के चुनाव चरणबद्ध तरीके से कराने की व्यवस्था है। यह व्यवस्था प्रशासनिक सुधार, लोकतंत्र की मजबूती और संसाधनों की बचत की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। भारत में स्वतंत्रता के बाद 1952, 1957, 1962 और 1967 में संपन्न लोकसभा और राज्यों की विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए गए थे। किंतु 1968–69 में कुछ राज्य सरकारें समय से पहले गिर गईं, जिससे यह क्रम टूट गया। इसके बाद असमय सरकारों के भंग होने के कारण चुनावों की समय-सीमा अलग-अलग होती गई और आज की स्थिति यह है कि लगभग हर वर्ष देश के किसी न किसी हिस्से में चुनाव होते रहते हैं और देश हमेशा चुनावी मोड पर रहता है। चुनाव आयोग हो या राजनीतिक दल, प्रशासनिक मशीनरी, सुरक्षा बल व अन्य विभिन्न एजेंसियां देश में कहीं न कहीं चुनाव में व्यस्त दिखाई देती हैं। भाजपा उत्तराखण्ड का मानना है कि यह स्थिति जन हित में नहीं है इसलिए “एक राष्ट्र एक चुनाव” देश के लिए आवश्यक है।

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भाजपा का इस बात पर विश्वास है कि “एक राष्ट्र एक चुनाव ” से कई चुनावी, प्रशासनिक, आर्थिक, राजनीतिक सुधार और लाभ जुड़े हैं। एक साथ चुनाव कराने से चुनावों पर वर्तमान में जो व्यय हो रहा है उसमें भारी कटौती आएगी। वर्ष 2024 के लोक सभा चुनाव में ही 1 लाख करोड़ रुपए व्यय हुए। यदि चुनाव एक साथ कराए जाएंगे तो व्यय में 12000 करोड़ रुपये की बचत होती और जी डी पी में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि होती। बार-बार चुनाव कराने से सुरक्षा बल, सरकारी अधिकारी, स्कूल भवन, वाहन, इत्यादि की बार-बार आवश्यकता होती है। एक साथ चुनाव से इन संसाधनों की बचत होगी।

एक देश एक चुनाव के कारण पूरे देश में विकास कार्यों में तेजी आएगी। वर्तमान में हर वर्ष देश में कहीं न कहीं आदर्श आचार संहिता लगी रहती है और इसका सीधा प्रभाव उन स्थानों पर विकास कार्यों के रुक जाने के रूप में हमारे सामने आता है। बार-बार लागू होने वाली आदर्श आचार संहिता से विकास योजनाएँ बाधित होती हैं। यदि चुनाव एक बार में संपन्न हो जाएँ तो उसके बाद सरकारें स्थिरता से कार्य में जुट सकती हैं।

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एक राष्ट्र एक चुनाव की व्यवस्था राजनीतिक दलों के लिए भी अनुकूल है।बार-बार चुनाव के कारण राजनीतिक दलों का समय, धन और ऊर्जा चुनाव प्रचार में जो व्यय होता है वह एक साथ चुनाव कराने से काफी कम हो जाएगी और राजनीतिक कार्यकर्ताओं का समय और शक्ति भी बचेगी। इसके अलावा चुनाव में काले धन के उपयोग और अवांछित गतिविधियां करने वालों पर भी लगाम लगेगी ।

बार बार चुनाव कराने से मतदाताओं में उदासीनता का भाव जागृत होता है जो लोक तंत्र के लिए अच्छा नहीं है, इससे मतदान प्रभावित होता है। आँकड़े बताते हैं कि जिन स्थानों पर लोकसभा व विधानसभा चुनाव एक साथ कराए गए वहां मतदान प्रतिशत बढ़ा और जहां अलग अलग समय पर कराए गए वहां कमी आई। यदि चुनाव एक साथ हों, तो मतदाता अधिक सजगता और सशक्त रूप से अपने मताधिकार का प्रयोग करते हैं। वहीं बार-बार चुनाव कराना राजनीतिक माहौल को अस्थिर बनाते हैं और कई बार राजनीतिक भ्रष्टाचार का कारण भी बनते हैं। जबकि एक साथ चुनाव स्थायित्व और सुशासन को बढ़ावा देते हैं।

वहीं एक राष्ट्र एक चुनाव को लेकर विभिन्न आयोगों और समितियों की सिफारिशें भी इसके पक्ष में हैं। लॉ कमीशन (2018) ने अपनी रिपोर्ट में सिफारिश की थी कि एक देश, एक चुनाव संभव है, लेकिन इसके लिए कई संवैधानिक संशोधन आवश्यक होंगे।

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नीति आयोग (2017): ने भी इस व्यवस्था को व्यवहारिक रूप से सही बताया और चरणबद्ध तरीके से इसे लागू करने की सिफारिश की। लालकृष्ण आडवाणी समिति तथा अन्य विशेषज्ञ समूहों ने भी इस प्रणाली को समय की माँग बताया है। अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य पर दृष्टि डालने पर ज्ञात होता है कि

कई लोकतांत्रिक देशों में एक साथ चुनाव होते है जैसे कि स्वीडन, दक्षिण अफ्रीका, इंडोनेशिया आदि। वहाँ देखा गया है कि इससे न केवल प्रशासनिक सुविधा होती है, बल्कि मतदाता अधिक सजग होकर मतदान करते हैं। भारत जैसे देश में जहां लोक तंत्र की जड़े काफी गहरी हैं में भी इसे लागू करने में कोई अवरोध नहीं है।

पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “एक राष्ट्र एक चुनाव” को लेकर गठित कोविद समिति द्वारा पूरे विषय का अध्ययन करने, विभिन्न कानूनविदों,जन प्रतिनिधियों , सामाजिक समूहों आदि से उनका मत लेकर रिपोर्ट दी है। समिति ने प्रथम चरण में लोक सभा व विधान सभाओं के चुनाव एक साथ कराने और दूसरे चरण में लोक सभा, विधानसभा और स्थानीय निकायों के चुनाव भी एक तय अवधि में कराने की सिफारिश की है।  भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड का मानना है कोविद समिति की रिपोर्ट देश की भावना को प्रकट करती है । भारतीय जनता पार्टी उत्तराखण्ड “एक राष्ट्र एक चुनाव” को देश हित में मनाती है और पूरे ह्रदय से इसका समर्थन करती है। “एक देश, एक चुनाव” भारतीय लोकतंत्र को अधिक स्थिर, सुदृढ़ और प्रभावी बना सकता है। यह संसाधनों की बचत, प्रशासनिक सुधार और मतदाता जागरूकता के क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन लाने की क्षमता रखता है । भारत जैसे संघीय राज्य में यह व्यवस्था भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक क्रांतिकारी कदम है।