9 February 2026

Pahad Ka Pathar

Hindi News, हिंदी समाचार, Breaking News, Latest Khabar, Samachar

उत्तराखंड में सरकारी जमीनों की बंदरबांट को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने किया खुलासा, लगाए गंभीर आरोप

उत्तराखंड में सरकारी जमीनों की बंदरबांट को लेकर कांग्रेस के पूर्व विधायक मनोज रावत ने किया खुलासा, लगाए गंभीर आरोप

कांग्रेस नेता और केदारनाथ के पूर्व विधायक मनोज रावत ने उत्तराखंड में जमीन घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगाया है। मनोज रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में सरकार राज्य की जमीनों को ठिकाने लगाने के नित नए तरीके खोज रही है। सरकार ने 2 साल पहले मसूरी में जॉर्ज एवरेस्ट की 30000 करोड़ मूल्य की जमीन एक करोड़ साल के किराए पर आचार्य बालकृष्ण से संबंध रखने वाली कंपनी को दे दी थी। लगभग 1000 एकड़ जमीन को प्रतिनयुक्ति पर आए फौजी कर्नल ने अवैधानिक प्रक्रिया के द्वारा बालकृष्ण की कंपनी को दिया।
अब राज्य सरकार की नजरे राज्य के विभिन्न विभागों की जमीनों पर है । बेशकीमती जमीने हैं इन स्थानों पर कोई अन्य निजी जमीन उपलब्ध नहीं है इसलिए सरकार अपनी जमीनों को विकसित करने के नाम पर राज्य के एक निगम यूआईडीबी को देकर उसके द्वारा औने पौने दामों पर अपने चाहते व्यापारियों को देगी। विभिन्न सरकारी जमीनों को ठिकाने लगाने की प्रक्रिया में मुख्य सचिव उत्तराखंड की अध्यक्षता में 29 अगस्त 2025 को एक बैठक हुई , जिसमें राज्य के विभिन्न विभागों की हजारों एकड़ भूमियों के इष्टतम उपयोग के नाम पर किसी अन्य विभाग के माध्यम से अपने चाहते लोगों को देने की सहमति बनी । दिसंबर 25 को इन 27 जमीनों में से दो जमीनों — उत्तराखंड जल विद्युत निगम की देहरादून के डाकपत्थर विकास नगर स्थित क्षेत्र 77 हेक्टेयर याने 180 एकड़ याने 3600 नली जमीन को विकसित करने के नाम पर यूआईडी बी को देने का तथा नैनीताल जिले के रामगढ़ स्थित उद्यान विभाग की 8 हेक्टेयर भूमि को हॉस्पिटैलिटी प्रोजेक्ट याने होटल उद्योग के नाम पर यूआईडीबी को देने का शासनादेश नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव आर मीनाक्षी सुंदरम द्वारा जारी किया । इन्हीं अधिकारी आर मीनाक्षी सुंदरम ने यूआईडीएआई के प्रबंध निदेशक के रूप में 15 जनवरी 2026 को देहरादून और नैनीताल के जिला अधिकारी को पत्र लिखकर इन दोनों जमीनों का दाखिल खारिज यूआई आईडीबी के नाम करके इन दोनों भूमियों का सीमांकन करने का आदेश जारी किया ।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम एक सरकारी निगम है जिसके अध्यक्ष मुख्य सचिव उत्तराखंड हैं। बोर्ड की जमीन या संपत्ति किसी को देने के लिए प्रस्ताव निगम के बोर्ड में पास होने चाहिए लेकिन इस मामले में संभवतः प्रबंध निदेशक से कुछ लिखवा कर सारे कानूनों की इति श्री कर ली होगी।
उत्तराखण्ड में ऐसे कामों को करने के लिए भी कुछ चयनित अधिकारी हैं जो अपने अधीनस्थों को धमका कर उनसे ऐसे काम करवा लेते हैं और कागजों में अपना दामन साफ रखते हैं। जॉर्ज एवरेस्ट मामले में अपयश कर्नल ने पाया और मॉल कोई और खा गए। उत्तराखंड में जिस भी बेशकीमती सरकारी जमीन को सरकार खुर्द बुर्द करने का निश्चय कर लेती है उस मामले में सारे संबंधित विभागों सचिव या सभी विभागों के निर्णायक अधिकारी का चार्ज एक ही अधिकारी को दिया जाता है। इस मामले में भी आर मीनाक्षी सुंदरम जमीन देने वाला उत्तराखंड जल विद्युत् निगम प्रमुख सचिव ऊर्जा के अधीन आता है। प्रमुख सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम हैं। इसके अलावा वे सरकारी जमीनों के इष्टतम उपयोग लेने वाले नियोजन विभाग के प्रमुख सचिव भी हैं । इस जमीन को विकसित करने वाले सरकारी निगम यूआईडीबी के प्रबंध निदेशक भी आर मीनाक्षी सुंदरम ही हैं । याने जमीन देने और लेने वाले एक ही अधिकारी थे इसलिए राज्य की अरबो रुपए की जमीन को इधर से उधर करने में इन्हें कुछ ही दिन लगेंगे।
अब यह जमीन है यूआईडी पीके माध्यम से सरकार अपने किसी चहेते व्यापारी या व्यापारिक समूह को दे देगी जैसा कि, उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद ने मसूरी की 30000 करोड़ की जमीन एक करोड़ सालाना किराए में बालकृष्ण की कंपनी को दे दी गई थी। राज्य के सभी विभागों को जमीने समय समय पर किसानों ने दी हैं या सरकार ने ये जमीनें विकास करने के नाम पर किसानों से अधिग्रहीत की हैं। अब इन जमीनों को अपरोक्ष रूप से किसी व्यापारी को देना जनता के साथ धोखा है। इनकी कीमत फिर कभी निकालेंगे।
जमीन ही सरकार की ताकत होती है , बिना जमीन के भी कोई सरकार होती है क्या ? सरकारी जमीन पर राज्य के हर निवासी का हक होता है। इन जमीनों को अधिकारियों के आदेशों द्वारा यदि किसी को औने पौने दामों में दे दिया जाय तो फिर राज्य की केबिनेट या मुख्यमंत्री जख मरने के लिए हैं। राज्य की विधानसभा किस काम के लिए है। विधायक क्यों बनाए गये हैं? सब कुछ लुटाने के बाद भी अब राज्य की जनता नहीं जागी तो भविष्य की पीढ़ियां हम सभी को कोसेंगी।

See also  भीमताल में एक और सड़क के डामरीकरण के लिए बजट मंजूर, विधायक राम सिंह कैड़ा ने जताया सीएम का आभार