22 July 2026

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आपदा प्रबंधन को लेकर सफलता के साथ हुई मॉक ड्रिल

आपदा प्रबंधन को लेकर सफलता के साथ हुई मॉक ड्रिल

उत्तराखण्ड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के दिशा-निर्देशन एवं निकट पर्यवेक्षण में आयोजित दो दिवसीय राज्य स्तरीय मॉक ड्रिल का दूसरा चरण सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। दूसरे दिन राज्य के शेष आठ जनपदों-हरिद्वार, देहरादून, ऊधमसिंह नगर, चमोली, चम्पावत, टिहरी, पिथौरागढ़ तथा अल्मोड़ा में बहु-स्थलीय मॉक अभ्यास आयोजित कर आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों को परखा गया।

राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र से सभी माॅक ड्रिल के सभी चरणों की निरंतर निगरानी की गई। इस दौरान विभिन्न संभावित आपदा परिदृश्यों, जैसे बाढ़, भूस्खलन, भूकम्प, औद्योगिक दुर्घटना, वनाग्नि, सड़क दुर्घटना, मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं भगदड़ पर आधारित अभ्यास कर विभागों के बीच समन्वय, त्वरित प्रतिक्रिया एवं संसाधनों के उपयोग का परीक्षण किया गया।

सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने कहा कि इन अभ्यासों के माध्यम से विभिन्न जनपदों में आपदा प्रबंधन तंत्र की तैयारियों का व्यापक परीक्षण किया गया, जिसमें सभी विभागों एवं एजेंसियों के बीच अच्छा समन्वय देखने को मिला। त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों की उपलब्धता तथा जमीनी स्तर पर कार्य करने की क्षमता संतोषजनक रही है। मॉक अभ्यासों के दौरान जो भी कमियां एवं चुनौतियां सामने आई हैं, उन्हें गंभीरता से लेते हुए उनका विस्तृत विश्लेषण किया जाएगा ।

जनपद हरिद्वार में हर की पैड़ी, शिवपुल, मनसा देवी मार्ग, लक्सर एवं रुड़की क्षेत्रों में मॉक ड्रिल आयोजित की गई। गंगा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से बाढ़ एवं भगदड़ की स्थिति, श्रद्धालुओं के नदी में बहने, तटबंध टूटने तथा नहर में लोगों के बहने जैसे परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। टीमों द्वारा त्वरित रेस्क्यू, भीड़ नियंत्रण, घायलों को प्राथमिक उपचार एवं सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की कार्यवाही का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।

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जनपद देहरादून में ऋषिकेश, विकासनगर, मसूरी एवं कालसी क्षेत्रों में विभिन्न परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। चारधाम यात्रा ट्रांजिट कैंप में विस्फोट, भारी वर्षा से नदी में बहाव, भूकम्प के बाद आग लगना, मसूरी मार्ग पर भूस्खलन एवं बस दुर्घटना जैसी घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया का अभ्यास किया गया। अभ्यास के दौरान पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग एवं अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से कार्य करते हुए राहत एवं बचाव कार्यों का प्रभावी प्रदर्शन किया ।

जनपद ऊधमसिंह नगर में किच्छा, गदरपुर, खटीमा, काशीपुर एवं पंतनगर क्षेत्रों में मॉक अभ्यास आयोजित किया गया। बाढ़, नहर तटबंध क्षति, मानव-वन्यजीव संघर्ष तथा औद्योगिक इकाईयों में संभावित दुर्घटनाओं के परिदृश्यों पर राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया।

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जनपद चमोली में टनल धंसाव, भूकम्प से भवन क्षति, भूस्खलन, एवलांच एवं वनाग्नि जैसी घटनाओं पर आधारित मॉक ड्रिल की गई। विभिन्न स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने, घायलों को चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्य संचालित करने का अभ्यास किया गया।

जनपद चम्पावत के चम्पावत, पूर्णागिरि, लोहाघाट, बाराकोट एवं पाटी में रोड ब्लॉक, भूस्खलन, बाढ़, जलभराव, भूकम्प, मानव-वन्यजीव संघर्ष एवं वनाग्नि जैसे परिदृश्यों पर मॉक अभ्यास किया गया। विभिन्न साइटों पर टीमों द्वारा त्वरित प्रतिक्रिया, संसाधनों के समन्वय एवं राहत-बचाव कार्यों का प्रभावी प्रदर्शन किया गया।

जनपद पिथौरागढ़ में मॉक अभ्यास के दौरान विभिन्न आपदा परिदृश्यों को ध्यान में रखते हुए बहु-स्थलीय अभ्यास आयोजित किया गया। इसके अंतर्गत भूकम्प, भूस्खलन, राष्ट्रीय राजमार्ग अवरोध (रोड ब्लॉक), वनाग्नि तथा केमिकल गैस रिसाव जैसी घटनाओं पर आधारित राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास किया गया। जिला चिकित्सालय क्षेत्र में भूकम्प के परिदृश्य के तहत भवन क्षति एवं घायलों के रेस्क्यू तथा चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराने की कार्यवाही का अभ्यास किया गया। वहीं दूनाघाट क्षेत्र में भूस्खलन की स्थिति को दर्शाते हुए मार्ग अवरुद्ध होने एवं प्रभावित लोगों को सुरक्षित निकालने की प्रक्रिया को परखा गया। धारचूला क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर भूस्खलन से रोड ब्लॉक की स्थिति में विभिन्न एजेंसियों द्वारा मार्ग खोलने, फंसे लोगों को निकालने एवं यातायात बहाल करने की कार्यवाही का अभ्यास किया गया।

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जनपद अल्मोड़ा में रानीखेत, द्वाराहाट, सल्ट, भिकियासैंण एवं लमगड़ा क्षेत्रों को चिन्हित करते हुए विभिन्न घटनाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया की कार्यवाही की गई। रानीखेत क्षेत्र में भूकम्प के परिदृश्य के तहत भवन क्षति, लोगों के मलबे में दबने एवं घायलों के रेस्क्यू का अभ्यास किया गया। द्वाराहाट क्षेत्र में वनाग्नि की घटना का परिदृश्य प्रस्तुत किया गया, जिसमें जंगल में आग लगने की सूचना पर संबंधित विभागों द्वारा त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर नियंत्रण पाने एवं प्रभावित व्यक्तियों को सुरक्षित निकालने का अभ्यास किया गया। भिकियासैंण क्षेत्र में बस दुर्घटना के तहत बड़ी संख्या में यात्रियों के घायल होने की स्थिति में समन्वित राहत एवं बचाव कार्य संचालित किए गए।