अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच के बैनर तले आज देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय का घेराव कर अंकिता भंडारी प्रकरण की जांच में हुई प्रगति के संबंध में विस्तृत ज्ञापन सौंपा गया। प्रदर्शनकारियों ने सीबीआई से मांग की कि छह माह से चल रही जांच की वर्तमान स्थिति को सार्वजनिक किया जाए तथा जांच से जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्नों के स्पष्ट उत्तर दिए जाएं।
प्रदर्शन के दौरान मंच के कार्यकर्ताओं ने जोरदार नारेबाजी करते हुए अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। प्रारंभ में सीबीआई अधिकारियों ने कार्यालय का गेट बंद कर दिया तथा प्रदर्शनकारियों को भीतर जाने की अनुमति नहीं दी। इसके बाद प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच झड़प हुई, जिसके उपरांत चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को सीबीआई कार्यालय के भीतर बुलाया गया।
प्रतिनिधिमंडल में कमला पंत, निर्मला बिष्ट, सुजाता पॉल तथा मोहित डिमरी शामिल थे। प्रतिनिधिमंडल ने सीबीआई के डीएसपी अजय मिश्रा एवं डीएसपी सुभाष चंद्र से मुलाकात कर जांच में देरी और सीबीआई की कार्य प्रणाली पर असंतोष व्यक्त करते हुए ज्ञापन सौंपा।
मुलाकात के दौरान सीबीआई अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में एफआईआर दिल्ली में दर्ज की गई है। मंच ने कहा कि यदि ऐसा है तो एफआईआर की प्रति उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा जांच की वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
सीबीआई अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि मंच द्वारा सौंपे गए ज्ञापन और उसमें उठाए गए सभी प्रश्नों एवं चिंताओं को दिल्ली स्थित सीबीआई मुख्यालय के सक्षम अधिकारियों तक पहुंचाया जाएगा।
ज्ञापन में मंच ने सीबीआई से पूछा है कि छह माह की जांच के दौरान अब तक क्या प्रगति हुई है, क्या दुष्यंत गौतम एवं अजय कुमार से पूछताछ की गई है, क्या अंकिता के माता-पिता द्वारा उठाए गए प्रश्नों को जांच का हिस्सा बनाया गया है, क्या श्रीमती उर्मिला सनावर द्वारा सार्वजनिक रूप से उठाए गए मुद्दों पर जांच हुई है, तथा क्या साक्ष्य मिटाने अथवा जांच को प्रभावित करने के आरोपों की भी जांच की गई है।
मंच ने यह भी मांग की कि जांच की वर्तमान स्थिति, आगे की कार्ययोजना तथा जांच पूर्ण होने की संभावित समय-सीमा के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाए।
अंकिता न्याय यात्रा संयुक्त संघर्ष मंच ने सीबीआई को 7 दिनों का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि एक सप्ताह के भीतर संतोषजनक उत्तर नहीं दिया जाता है, तो मंच व्यापक जनभागीदारी के साथ आंदोलन के अगले चरण की घोषणा करेगा तथा देहरादून स्थित सीबीआई कार्यालय की तालाबंदी अभियान शुरू करेगा। इसके लिए संपूर्ण जिम्मेदारी सीबीआई प्रशासन की होगी।
प्रदर्शन एवं घेराव कार्यक्रम में पदमा गुप्ता, मंजू बलोदी, बिमला, स्मृति नेगी, सुशीला अमोली, पुष्पा नौडियाल, गीता बागड़ी, हिलता नेगी, ज्योति नेगी, मीणा राणा, यशोदा, शांता नैथानी, प्रेमलता बलूनी, शांति सेमवाल, सतेश्वरी देवी सहित भारी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने भाग लिया तथा अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के पक्ष में CBI कार्यालय के मुख्य द्वार पर जोरदार नारे लगाए।
मंच ने कहा कि अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक परिवार का नहीं बल्कि उत्तराखंड की बेटियों की सुरक्षा, न्याय और जनता के विश्वास का प्रश्न है तथा इस मामले में जवाबदेही सुनिश्चित होने तक संघर्ष जारी रहेगा।
*कमला पंत का वक्तव्य*
अंकिता भंडारी प्रकरण केवल एक आपराधिक मामला नहीं बल्कि न्याय व्यवस्था में जनता के विश्वास का प्रश्न है। हमारा उद्देश्य किसी निष्कर्ष पर पहुँचना नहीं, बल्कि यह जानना है कि जांच किस स्थिति में है और जिन सवालों को परिवार तथा समाज लगातार उठा रहा है, उनका परीक्षण किस प्रकार किया जा रहा है।
*सुजाता पाल का वक्तव्य*
छह माह का समय बीत जाने के बाद भी जांच की प्रगति को लेकर अनेक प्रश्न बने हुए हैं। हमारा मानना है कि पारदर्शिता से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है। इसलिए हमने सीबीआई से जांच की वर्तमान स्थिति और आगे की प्रक्रिया के बारे में स्पष्ट जानकारी देने का अनुरोध किया है।
*निर्मला बिष्ट का वक्तव्य*
किसी भी लोकतांत्रिक समाज में न्याय की प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष होनी चाहिए, उतनी ही पारदर्शी भी होनी चाहिए।
*उमा भट्ट का वक्तव्य*
अंकिता भंडारी प्रकरण ने समाज में अनेक गंभीर प्रश्न खड़े किए हैं। हमारा मानना है कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता और नियमित जानकारी उपलब्ध कराना आवश्यक है, ताकि पीड़ित परिवार और आम नागरिकों का विश्वास बना रहे। हम न्यायपूर्ण और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा करते हैं तथा इसी उद्देश्य से अपनी बात लोकतांत्रिक तरीके से रख रहे हैं।”
*मोहित डिमरी का वक्तव्य*
हमारा प्रयास केवल इतना है कि पीड़ित परिवार और समाज को यह भरोसा मिले कि जांच सभी आवश्यक पहलुओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ रही है।

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