24 August 2026

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श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर बीजेपी ने किया नमन

श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर बीजेपी ने किया नमन

उत्तराखंड बीजेपी ने अपने मार्गदर्शक, संरक्षक एवं प्रेरणता स्वर्गीय डॉक्टर श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी 125 वीं जयंती पर भावभीनी वैचारिक श्रद्धांजलि दी है। समर्पण पखवाड़ा के तहत बूथ स्तर पर आयोजित इन कार्यक्रमों में देश की एकता एवं अखंडता में उनका योगदान याद किया गया। साथ ही एकमत से उनके द्वारा राजनीति में स्थापित राष्ट्रवादी विचारों को बंगाल, कश्मीर के भारतीयकरण और जनकल्याणकारी योजनाओं का जनक बताया गया। श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर बीजेपी ने किया नमन

इसी क्रम में पार्टी प्रदेश मुख्यालय में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में वैचारिक श्रद्धांजलि देते हुए राज्यसभा सांसद एवं राष्ट्रीय सह कोषाध्यक्ष श्री नरेश बंसल ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को पार्टी का प्रेरणा पुरुष और राष्ट्रवादी राजनीति का जनक बताया। कहा, वे एक ऐसा व्यक्तित्व है, जो प्रख्यात शिक्षाविद, न्यायविद और राजनीति के प्रखर चिंतक, विचारक, सामाजिक सुधारक, संवेदनशील व्यक्तित्व के धनी थे। वो सबसे कम उम्र केवल 33 वर्ष की उम्र में कलकत्ता विश्वविद्यालय के चांसलर बने और उन परिस्थितियों में भी शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने व्यापक सुधार किए। उनके प्रखर राष्ट्रवादी विचारों के कारण ब्रिटिश सत्ता ने उनके ऊपर दमनकारी कार्य भी किए। इसके साथ-साथ डॉ. मुखर्जी ने बंगाल को बचाने में बहुत बड़ी भूमिका निभाई। आज का जो बंगाल और कलकत्ता भारत के अंदर है, ये डॉ. मुखर्जी अगर नहीं होते, तो आज भारत का नक्शा दूसरा होता।

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कहा, डॉक्टर मुखर्जी, और अंबेडकर ही वे दो मंत्री थे जिन्हें नेहरू मंत्रिमंडल में गांधी जी के कहने पर शामिल किए गए थे।। देश की अखंडता और पाकिस्तान एवं पूर्वी पाकिस्तान में हिंदुओं की दुर्दशा के जिम्मेदार लियाकत अली समझौते के खिलाफ उन्होंने अपना इस्तीफा नेहरू सरकार से दिया था। जबकि उस समय वो सत्ता के चरम पर थे, देश के उद्योग मंत्री थे। उद्योग मंत्री के रूप में भी उन्होंने महत्वपूर्ण एवं ऐतिहासिक कार्य किए थे। नेहरू लियाकत अली समझौते का दंश पाकिस्तान के हिंदुओं को झेलना पड़ा और उनकी पीड़ा उस समय श्यामा प्रसाद मुखर्जी के मन में थी, वो आज तक भी हमारे नेताओं के मन में थी। इसीलिए, जब हम बहुमत में आए, तो वहां रहने वाले हिंदुओं एवं अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों की समस्या के समाधान के लिए सीएए लेकर के आए। 2019 में मोदी जी की सरकार सीएए लेकर के आई।

उनके नेतृत्व में 21 अक्टूबर 1951 को सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के विचार आधारित जनसंघ पार्टी की स्थापना हुई, जिस पर आगे बढ़ते हुए ही आज भाजपा दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनी है। उन्होंने राष्ट्रीय अखंडता को चुनौती देने वाले कश्मीत की दो विधान, दो निशान और दो प्रधान वाली नीति का पुरजोर विरोध किया। जिसके तहत कश्मीर को देश का अभिन्न अंग बनाने के लिए बिना परमिट वहां गए और आजादी के बाद राष्ट्रीय अखंडता के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले पहले व्यक्ति बने। उनकी रहस्यमयी मौत के बाद जनसंघ ने उस समय एक नारे के साथ प्रण लिया, “जहां बलिदान हुए मुखर्जी, वो कश्मीर हमारा है।” “जो कश्मीर हमारा है, वो सारे का सारा है।” “जो कश्मीर हमारा है, वो सारे का सारा है।”। धारा 370 को समाप्त कर पहली लाइन को तो मोदी जी साकार कर चुके हैं। अब दूसरी लाइन का ज्यादा महत्व हमारे लिए है, जब पीओके हमारे साथ आ जाएगा। विपक्ष के लोग कहते थे कि अगर 370 से छेड़छाड़ की गई तो खून की नदियां बहेंगी, तिरंगा उठाने वाला नहीं मिलेगा। और वास्तविकता यह है कि 370 हटाने के बाद कश्मीर में गली-गली में तिरंगा उठाने वाले मिल रहे हैं, लेकिन पत्थर फेंकने वाले गायब हो गए हैं।

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डॉक्टर मुखर्जी के विचारों को दृढ़ संकल्प के रूप में लेते हुए है, पार्टी लगातार चल रही है। आज की सारी जो कल्याणकारी योजनाएं हैं—गरीबी के लिए 80 करोड़ लोगों को हम मुफ्त अनाज दे रहे हैं, घर-घर में नल से जल पहुंचाया है, 10.5 करोड़ से ऊपर गैस के कनेक्शन दिए हैं, किसानों को सम्मान निधि दे रहे हैं, 5 लाख तक का कैशलेस इलाज दे रहे हैं, जन औषधि केंद्र से सस्ती दवाएं दे रहे हैं। यह सब उनके चिंतन और विचारों का परिणाम है कि आज मोदी जी के नेतृत्व में केंद्र एवं राज्यों में जनसेवा की सरकारें चल रही हैं।

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