2 August 2026

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टिहरी में आयुष अस्पताल का मुद्दा बना बीजेपी के गले की फांस, कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

टिहरी में आयुष अस्पताल का मुद्दा बना बीजेपी के गले की फांस, कांग्रेस ने लगाया भ्रष्टाचार का आरोप

टिहरी जनपद की जाखणीधार तहसील के खंडोगी (जेलम) में प्रस्तावित 50 बेड के आयुष अस्पताल का निर्माण वर्षों बाद भी पूरा न होने को लेकर कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं एडवोकेट शांति प्रसाद भट्ट ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया गया यह अस्पताल पिछले करीब नौ वर्षों से अधर में लटका हुआ है। उन्होंने कहा कि दो करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी धनराशि खर्च होने के बावजूद मौके पर केवल अधूरी सीसी सुरक्षा दीवार (पुस्ता) ही दिखाई देती है और अस्पताल का निर्माण आज तक शुरू नहीं हो पाया।

भट्ट ने कहा कि भाजपा और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की “जीरो टॉलरेंस” नीति की वास्तविकता इस परियोजना से सामने आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य जैसी महत्वपूर्ण परियोजना को वर्षों तक लटकाकर क्षेत्र की जनता के साथ अन्याय किया गया है। उनके अनुसार यह मामला संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत नागरिकों के जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करता है।

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उन्होंने बताया कि स्थानीय निवासी मकान सिंह ने जनहित में आयुष अस्पताल निर्माण के लिए अपनी लगभग आठ नाली भूमि दान की थी, लेकिन वर्षों बाद भी अस्पताल का निर्माण पूरा नहीं हो सका। उनका कहना है कि जिन किसानों की भूमि पर आंशिक निर्माण कार्य हुआ, उन्हें भी अब तक भूमि अधिग्रहण कानून के अनुरूप उचित प्रतिकर नहीं दिया गया।

कांग्रेस प्रवक्ता ने ये भी आरोप लगाया कि इस अस्पताल को लेकर भाजपा के पूर्व और वर्तमान जनप्रतिनिधियों के बीच मतभेद सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं। उनका कहना है कि अब उसी परियोजना के लिए किसी अन्य स्थान पर भूमि चयन का प्रस्ताव सामने आ रहा है, जबकि पहले से करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं।

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शांति प्रसाद भट्ट ने सरकार और संबंधित विभाग से कई सवाल पूछे। उन्होंने कहा कि यदि वर्षों से यह परियोजना निर्माणाधीन थी तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की? दो करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने के बावजूद अस्पताल का निर्माण क्यों नहीं हो पाया? जिन प्रभावित काश्तकारों की भूमि का उपयोग हुआ, उन्हें मुआवजा क्यों नहीं मिला? और अब अचानक परियोजना के लिए नया स्थान चुनने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है?

उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, खर्च हुई धनराशि का सामाजिक और तकनीकी ऑडिट कराने तथा दोषी अधिकारियों और जिम्मेदार व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही सरकार से आग्रह किया कि अस्पताल निर्माण कार्य को शीघ्र पूरा कर क्षेत्र की जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

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