उत्तराखंड की सियासत में आज श्रीनगर से आई एक तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। श्रीनगर नगर निगम की मेयर आरती भंडारी ने एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी का दामन थाम लिया है। उनके पति लखपत सिंह भंडारी भी भाजपा में लौट आए हैं। इतना ही नहीं, नगर निगम के 10 पार्षदों ने भी भाजपा की सदस्यता ग्रहण की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने सभी का पार्टी में स्वागत किया।

लेकिन सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन भाजपा में आया? बड़ा सवाल है आखिर चुनाव से पहले यह सियासी तस्वीर क्या संकेत दे रही है? याद कीजिए, 2025 के निकाय चुनाव में आरती भंडारी ने भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी को हराकर श्रीनगर नगर निगम की पहली मेयर बनने में कामयाबी हासिल की थी। यानी जिस चेहरे ने भाजपा के उम्मीदवार को चुनावी मैदान में मात दी थी, वही चेहरा अब वापस भाजपा के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है।यही वजह है कि इस ‘घर वापसी’ को महज एक राजनीतिक जॉइनिंग मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि उत्तराखंड में अब नजरें 2027 के विधानसभा चुनाव पर हैं। श्रीनगर गढ़वाल की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र है। ऐसे में मेयर के साथ 10 पार्षदों का भाजपा में आना स्थानीय संगठन को मजबूत करने के साथ-साथ आने वाले चुनाव में पार्टी के समीकरणों को प्रभावित कर सकता है।
सबसे दिलचस्प बात यह है कि 2025 के नगर निगम चुनाव में श्रीनगर में भाजपा के 16 पार्षद चुने गए थे, जबकि 18 पार्षद निर्दलीय और 6 कांग्रेस के थे। अब 10 पार्षदों के भाजपा में आने से नगर निगम के भीतर भी राजनीतिक समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं।
अब भाजपा इसे संगठन के विस्तार और बढ़ते जनसमर्थन के तौर पर पेश करेगी। वहीं विपक्ष के सामने सवाल होगा क्या भाजपा चुनाव से पहले अपने पुराने और प्रभावशाली चेहरों को वापस जोड़कर गढ़वाल में अपनी जमीन और मजबूत करने की कोशिश कर रही है?
और दूसरा सवाल क्या श्रीनगर से शुरू हुई यह ‘घर वापसी’ आने वाले दिनों में उत्तराखंड की राजनीति में और बड़े दल-बदल का संकेत है?
क्योंकि चुनावी राजनीति में एक बात बेहद महत्वपूर्ण होती है।श्रीनगर में आज भाजपा को एक साथ मेयर, उनके पति और 10 पार्षदों का साथ मिलना निश्चित तौर पर आने वाले चुनावी समीकरणों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
अब देखना होगा कि इस ‘घर वापसी’ का असर सिर्फ श्रीनगर नगर निगम तक सीमित रहता है या फिर 2027 के विधानसभा चुनाव तक इसकी राजनीतिक गूंज पूरे गढ़वाल में सुनाई देती है।

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