संकट और प्रदूषित नदियों से जूझ रहे भारत के लिए जापान की अपशिष्ट जल उपचार प्रणाली *झोकासो* को विकेन्द्रीकृत स्तर पर सीवेज प्रबंधन का एक बड़ा समाधान बताया गया है।यूके नेशन इंडिया न्यूज के संपादक सुनील नेगी ने हाल ही में IIC में डाइकी एक्सिस जापान के चेयरमैन एवं CEO हिरोशी ओगामे और डाइकी एक्सिस इंडिया के MD रियो वाजा से बातचीत की। इस दौरान दोनों ने झोकासो तकनीक के जरिए भारत में विकेन्द्रीकृत स्तर पर अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की।

बातचीत में हिरोशी ओगामे और रियो वाजा ने कहा कि झोकासो जिसे जापानी में “जोहकासो” भी कहा जाता है, का शाब्दिक अर्थ है “शुद्धिकरण के लिए टैंक”। यह एक कॉम्पैक्ट, ऑन-साइट उपचार प्रणाली है जिसे जापान में दशकों से बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि बड़ी केंद्रीयकृत सीवेज प्लांट और विशाल सीवर नेटवर्क पर निर्भर रहने के बजाय झोकासो इकाइयां घरों, अपार्टमेंट, स्कूलों और छोटे समुदायों में ही स्रोत पर गंदे पानी का उपचार करती हैं। इस प्रणाली में पहले ठोस कचरा अलग किया जाता है, फिर जैविक विधि से पानी को साफ किया जाता है और अंत में कीटाणुशोधन के बाद उसे बागवानी, फ्लशिंग और अन्य गैर-पीने योग्य कार्यों के लिए सुरक्षित रूप से पुनः इस्तेमाल किया जा सकता है। झोकासो से उपचारित पानी जापान के कड़े मानकों पर खरा उतरता है और इसमें BOD स्तर 10 mg प्रति लीटर से भी कम रहता है।
रियो वाजा ने कहा कि यह तकनीक भारत के लिए इसलिए सबसे उपयुक्त है क्योंकि यह कॉम्पैक्ट है, ऊर्जा कुशल है और इसे चलाने के लिए पूरे सीवर नेटवर्क की जरूरत नहीं होती। यही कारण है कि यह ग्रामीण क्षेत्रों, हाउसिंग सोसायटियों और शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों के लिए आदर्श है जहां बड़ी पाइपलाइन बिछाना कठिन और महंगा है। जापान में वर्तमान में 8.6 मिलियन से अधिक छोटे झोकासो यूनिट काम कर रहे हैं, ज्यादातर उन इलाकों में जो बड़े शहरों के सीवर सिस्टम से नहीं जुड़े हैं।
कंपनी के बारे में जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि डाइकी एक्सिस जापान भारत में अपनी CSR पहल *DIAL Project – Daiki Axis India Action and Innovation for the Environment* के माध्यम से इस तकनीक को बढ़ावा दे रहा है। हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित DIAL 2025-26 के राष्ट्रीय फाइनल में छात्र टीमों ने ग्रामीण से शहरी भारत तक विकेन्द्रीकृत अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण के लिए झोकासो का उपयोग करने पर प्रोजेक्ट प्रस्तुत किए। कंपनी का लक्ष्य छात्रों को व्यावहारिक कार्य योजनाएं बनाने में मदद करना है ताकि वे *विकसित भारत @ 2047* के लक्ष्य में योगदान दे सकें।
रियो वाजा ने झोकासो की विकेन्द्रीकृत विशेषता को गेम चेंजर बताते हुए कहा कि भारत में आज भी बड़ी मात्रा में सीवेज बिना उपचार के नदियों में बहाया जा रहा है। ऐसे में झोकासो जैसी तकनीक स्थानीय स्तर पर उपचार और पानी के पुनः उपयोग को संभव बनाकर इस अंतर को पाट सकती है। उन्होंने कहा कि डाइकी एक्सिस इंडिया फंडिंग, मेंटरशिप और जापान के अध्ययन दौरे के माध्यम से इस पहल को और विस्तार देगा और इसका उद्देश्य इस तकनीक को रिसर्च से निकालकर व्यापक जन उपयोग तक पहुंचाना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि झोकासो तकनीक स्वच्छ भारत मिशन, जल संरक्षण और सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, खासकर उन क्षेत्रों में जहां पारंपरिक सीवरेज संभव नहीं है।

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