6 September 2026

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अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों के बाद उठे सवाल, कामरेड इंद्रेश मैखुरी की राज्यपाल को चिट्ठी, उठाई सीबीआई जांच की मांग

अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों के बाद उठे सवाल, कामरेड इंद्रेश मैखुरी की राज्यपाल को चिट्ठी, उठाई सीबीआई जांच की मांग

अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों और दावों के बाद गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकार पर आरोपियों को बचाने की कोशिश के आरोप भी लगाए जा रहे हैं। इसी मुद्दे पर कामरेड इंद्रेश मैखुरी ने उत्तराखंड के के राज्यपाल को चिट्ठी लिखी है और सीबीआई जांच कराने की मांग की है। चिट्ठी में लिखा है

महामहिम,

18 सितंबर 2022 को हुए जघन्य अंकिता भंडारी हत्याकांड में हमेशा से यह चर्चा रही कि अंकिता भंडारी पर किसी वीआईपी को “स्पेशल सर्विस” देने के लिए दबाव डाला जा रहा था और ऐसा करने से इंकार करने पर अंकिता की हत्या कर दी गयी. इस प्रकरण में हत्या के दोषियों को अदालत द्वारा सजा सुनाए जाने के बाद भी यह रहस्य अनसुलझा ही रहा कि उक्त वीआईपी कौन था, जिसकी वजह से अंकिता भंडारी की हत्या कर दी गयी।अंकिता भंडारी केस में नए खुलासों के बाद उठे सवाल, कामरेड इंद्रेश मैखुरी की राज्यपाल को चिट्ठी, उठाई सीबीआई जांच की मांग

हाल में सामने आये कुछ सनसनीखेज ऑडियो जो उर्मिला सनावर नामक महिला द्वारा सार्वजनिक किये गए हैं, उसमें ज्वालापुर से भाजपा के पूर्व विधायक सुरेश राठौर बताए जा रहे व्यक्ति यह कहते सुने जा सकते हैं कि अंकिता भंडारी मामले में वीआईपी , भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री व उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत कुमार गौतम व भाजपा के उत्तराखंड संगठन महामंत्री अजय कुमार हैं. ऑडियो में तो यहां तक कहा जा रहा है कि दुष्यंत कुमार गौतम के खिलाफ तो महिला संबंधी सात मामले हैं, जिनकी शिकायत भाजपा हाईकमान से की गयी है. और यह भी कहा गया कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपनी पार्टी की छवि बचाने के लिए इस प्रकरण में सीबीआई जांच नहीं होने दी.

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उक्त सभी दावे बेहद गंभीर और क्षोभनीय हैं, जिनकी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच आवश्यक है. इसके लिए जरुरी है कि जिन लोगों को वीआईपी बताया जा रहा है, उनके कॉल डिटेल रिकार्ड्स (सीडीआर) और मोबाइल लोकेशन की जांच हो, उक्त ऑडियो रिकॉर्डिंग्स की फॉरेंसिक जांच हो. पूर्व में इस प्रकरण की जांच उत्तराखंड पुलिस की एसआईटी द्वारा की गयी और वो वीआईपी का खुलासा करने में नाकामयाब रही. स्पष्ट तौर पर इसकी वजह राजनीतिक दबाव है.

इसलिए नए तथ्यों की आलोक में जरूरत है कि इस प्रकरण में स्वतंत्र, निष्पक्ष जांच हो और वह प्रदेश के बाहर की एजेंसी द्वारा की जाए. इसलिए हमारी मांग है कि इस प्रकरण में उच्चतम न्यायालय की निगरानी में सीबीआई जांच करवाई जाए. चूंकि इस प्रकरण में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर भी यह आरोप है कि उन्होंने सीबीआई जांच नहीं होने दी, इसलिए महामहिम आपसे निवेदन है कि स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच के हक़ में आप , उनसे पद से विरत हो जाने के लिए कहें.

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महिला सुरक्षा के लिए उक्त कदम उठाए जाने जरुरी हैं. जिस तरह से बलात्कार के लिए दोषी करार दिए गए कुलदीप सेंगर को जेल से बाहर आने का रास्ता दे दिया गया या बिलकिस बानो के बलात्कारियों को गुजरात सरकार की पहल पर न केवल जेल से रिहा किया गया, बल्कि भाजपा के लोगों द्वारा फूल-मालाओं से उनका स्वागत किया गया, उस तरह का उदहारण कम से कम उत्तराखंड में स्थापित नहीं होने देना चाहिए. आरोपी चाहे कितने ही ताकतवर और रसूखदार क्यों न हों, उन्हें कानून और न्याय के कठघरे में खड़ा किया जाना चाहिए.

 

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