26 April 2026

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उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन, केंद्र से मांगा जवाब

उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी को इंसाफ दिलाने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन, केंद्र से मांगा जवाब

उत्तराखंड की पुष्कर सिंह धामी सरकार की तीन वर्ष पूर्व हुए अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर हीला हवाली और उदासीनता से परेशान होकर आज नई दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर अंकिता भंडारी न्याय संयुक्त संघर्ष मोर्चा द्वारा “अंकिता भंडारी न्याय यात्रा” आयोजित की गई । इस आयोजन के पीछे सोच यह थी कि धामी सरकार तो धृतराष्ट्र हो गई है कम से कम क्या पता नारी शक्ति वंदन अधिनियम की बात करने वाले प्रधानमंत्री के कानों में ही अंकिता को लेकर संवेदनाएं उमड़ जाएं। महिला मंच उत्तराखंड की कमला पंत के नेतृत्व आयोजित इस विरोध में शामिल सभी उत्तराखंड के लोगों ने एक स्वर में कहा कि अब तक अंकिता भंडारी को न्याय नहीं मिल पाया है,यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है कि पूरे मामले की जांच ऐसे आधार पर की जा रही है, जो पीड़ित परिवार की शिकायत से मेल नहीं खाता। इस अवसर पर देहरादून से जंतर मंतर नई दिल्ली पहुंची उत्तराखंड कांग्रेस की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने कहा कि सीबीआई द्वारा की जा रही जांच में एक अनिल जोशी की प्राथमिकी को आधार बनाया गया है, जबकि अंकिता भंडारी के माता-पिता द्वारा दिए गए शिकायत पत्र को नजरअंदाज किया गया है। यह अपने आप में गंभीर सवाल खड़े करता है कि आखिर पीड़ित परिवार की आवाज को क्यों दबाया जा रहा है।

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दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड के लोग बहुत स्वाभिमानी होते हैं इसका उदाहरण अंकिता भंडारी अपनी अस्मिता से समझौता न कर खुद अपनी जान कुर्बान करके दे चुकी है। गरिमा ने कहा कि यदि हम उत्तराखंड के लोग अंकिता भंडारी को न्याय नहीं दिला पाते हैं तो आने वाली पीढ़ियां हमें एक नपुंसक समाज के रूप में जानेंगी और हमसे सवाल करेंगी।

गरिमा ने कहा कि इस जघन्य हत्याकांड में मुख्य आरोपी तथा सह-आरोपीयों को जरूर नामजद किया गया है, लेकिन जिस तथाकथित “वीआईपी” के लिए अंकिता पर दबाव बनाया गया और ₹10,000 की पेशकश की गई, उसे अब तक बचाने की कोशिशें साफ नजर आती हैं।

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दसौनी ने कहा कि कैसी विडंबना है कि न्याय देने के बजाय मामले को दबाने और सबूत मिटाने की साजिशें भी लगातार सामने आई हैं

वनंतारा रिजॉर्ट पर बुलडोजर चलाया गया

मात्र 17 दिनों के भीतर दो बार संदिग्ध आगजनी हुई

घटनास्थल से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्यों को नष्ट किया गया

इन सभी घटनाओं से यह संदेह और गहरा होता है कि कहीं न कहीं किसी प्रभावशाली व्यक्ति को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

गरिमा ने कहा कि हम अंकिता भंडारी संयुक्त संघर्ष मोर्चा के लोग ये स्पष्ट रूप से मांग करते हैं कि: जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से हो पीड़ित परिवार की शिकायत को ही जांच का मुख्य आधार बनाया जाए उस “वीआईपी” का नाम सार्वजनिक किया जाए, जिसके कारण ये अपराध हुआ दोषियों को सख्त से सख्त सजा दी जाए।अंकिता भंडारी केवल एक नाम नहीं, बल्कि न्याय की पुकार है। जब तक उसे न्याय नहीं मिलता, यह संघर्ष जारी रहेगा। न्याय न मिला तो आंदोलन जारी रहेगा।

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इस अवसर पर महिला मंच की कमला पंत, निर्मला बिष्ट, इंद्रेश मैखुरी चारु तिवारी, उमाकांत लखेड़ा, पी सी थपलियाल समेत उत्तराखंड और दिल्ली के प्रवासी उत्तराखंडी बड़ी संख्या में जंतर मंतर पहुंचे ।