17 March 2026

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गोदियाल पर बीजेपी के सवाल

गोदियाल पर बीजेपी के सवाल

उत्तराखंड बीजेपी ने पौड़ी लोकसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल पर अपनी ही पार्टी की पोल खोलने और पहाड़ पुत्र बहुगुणा के अपमान का आरोप लगाया है । 1982 चुनाव में कांग्रेस द्वारा उनके एवं जनता पर किए अत्याचार और स्वयं की बहुगुणा जी से तुलना के लिए माफी मांगने को बात कही है । साथ ही उनके शैक्षिक सफर को भी संदिग्ध बताते हुए सवाल खड़े किए हैं ।

पार्टी के प्रदेश मीडिया सेंटर में पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुए वरिष्ठ नेता एवं पूर्व दायित्वधारी रविंद्र जुगरान ने गढ़वाल सीट के कांग्रेस प्रत्याशी गणेश गोदियाल पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वो अपने हर दूसरे बयान में इस बात का जिक्र करते हैं कि इस बार की गढ़वाल लोकसभा का चुनाव वे बहुगुणा जी की तरह 1982 वाले चुनाव की तरह लड़ रहे हैं। अफसोस स्वयं को पहाड़ पुरुष पूर्व सीएम स्वर्गीय हेमवती नंदन बहुगुणा के समकक्ष खड़ा करने की उनकी कोशिश बेहद शर्मनाक है। इतना ही नहीं ऐसा कहकर वो अपनी ही पार्टी की तत्कालीन प्रधानमंत्री स्वर्गीय इंदिरा गांधी और संगठन के नेताओं को भी कटघरे में खड़ा कर लेते हैं। जिसको लेकर उनकी पार्टी के लोग बेहद नारजा भी हैं । बरहराल ऐसा कहने से पहले उन्हें 80 के दशक में कांग्रेस द्वारा बहुगुणा जी के साथ किए अन्याय एवं पहाड़ की जनता के साथ किया अत्याचार पर सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए और तत्काल कांग्रेस से इस्तीफा देना चाहिए। क्योंकि  बहुगुणा जी के राजनीतिक कैरियर को नुकसान पहुंचाने का काम यदि किसी पार्टी ने किया है तो वो भी कांग्रेस है । ऐसा तो हो ही नहीं सकता की आप बहुगुणा जी के नाम का राजनीतिक लाभ भी लेना चाहें और कांग्रेस के उम्मीदवारी भी बरकरार रहें। फिलहाल वे ऐसा कुछ करें या ना करें लेकिन गढ़वाल और उत्तराखंड की जनता बहुगुणा जी के साथ तत्कालीन कांग्रेस पार्टी एवं वर्तमान में गणेश गोदियाल द्वारा किए जा रहे अपमान को भूल नहीं सकती है।

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गोदियाल की शिक्षा पर भी सवाल

उन्होंने उनके शैक्षिक सफर पर भी सवाल खड़ा करते हुए कहा, उनकी शिक्षा अर्जित करने के काल खंडों में आया बड़ा अंतर ही उसे सबसे अधिक संदिग्ध बताता है । उनके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार 1982 में पुणे से हाई स्कूल करने के बाद सीधा 21 साल बाद 2003 में बेहद रिमोट क्षेत्र से उनके द्वारा विधायक बनने के बाद इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण की गई । उसके बाद 2007 में जब वे स्नातक हुए तो वह भी बतौर निदेशक अपने ही स्कूल से जिसमें वे प्रिंसिपल से लेकर पियोन तक उनके मातहात थे । लिहाजा नैतिकता एवं ज्ञान की दुहाई देने वाले कांग्रेस प्रत्याशी को पहले अपने प्रमाणपत्रों को ध्यान से देख लेना चाहिए कि कितनी ईमानदारी से उन्होंने इसे प्राप्त किया होगा ।

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