उत्तराखंड में बागेश्वर उपचुनाव की हलचल के बीच दलबदल का खेल हावी है। कांग्रेस में आज आम आदमी पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत कुमार शामिल हुए। बसंत 2022 में आप के उम्मीदवार थे। बसंत कुमार के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें कुछ दिन पहले से ही लगने लगी थी। मगर उससे पहले की रंजीत दास कांग्रेस को चकमा देकर बीजेपी में चले गए। लिहाजा बसंत कुमार की राह और भी आसान हो गई। आज बागेश्वर में करन माहरा, यशपाल आर्य और प्रदीप टम्टा की मौजूदगी में बसंत कुमार अपने समर्थकों के साथ कांग्रेस का हिस्सा बने।
बसंत का टिकट पक्का? कांग्रेस का ‘भविष्य’ कितना अच्छा?
बसंत कुमार की ज्वाइनिंग के साथ ही अब ये चर्चा भी होने लगी है कि क्या टिकट की डील पहले ही फाइनल हो गई थी? क्या टिकट की शर्त पर ही बसंत ने कांग्रेस का हाथ थाम? क्या रंजीत दास को इसकी भनक लग गई इसीलिए वो बीजेपी में गए या फिर दास ने बीजेपी से कुछ और हई बड़ी डील की है? बहरहाल सवाल कई हैं और कुछ दिन में टिकट की तस्वीर भी साफ हो जाएगी। अगर कांग्रेस बसंत कुमार को उपचुनाव में अपना उम्मीदवार बनाती है तो फिर सवाल ये उठेगा कि क्या कांग्रेस के पास अपना कोई ऐसा कार्यकर्ता नहीं है जिसे उपचुनाव लड़ाया जाग सके? सवाल ये भी उठेगा कि जब चंद दिन पहले बाहर से आए किसी नेता को टिकट दिया जा रहा है तो बरसों से पार्टी के लिए पसीना बहाने और डंडा, झंडा उठाने वाले कार्यकर्ता क्या करेंगे? आखिर कार्यकर्ताओं को सम्मान कब मिलेगा? और इन हालात में संगठन कैसे मजबूत होगा और कैसे सेकेंड लाइन लीडरशिप तैयार होगी? इन तमाम सवालों के साथ सबसे बड़ा सवाल तो ये है कि क्या कांग्रेस बागेश्वर में जीत हासिल कर पाएगी?
कांग्रेस का अपना दावा
सियासी उठापटक के बीच कांग्रेस ने तमाम दावे किये हैं। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष करन माहरा के मुताबिक कार्यकर्ताओं में काफी आक्रोश है और वो बीजेपी को सबक सिखाना चाहते हैं। कांग्रेस ने बागेश्वर में जीत के समीकरण बनाने का भी दम भरा है। इसके साथ ही निर्दलीय बागेश्वर विधायक प्रत्याशी भैरव नाथ टम्टा, बीजेपी नेता गोपाल राम टम्टा और बीजेपी के पूर्व अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष कमल टम्टा को भी कांग्रेस में शामिल कराया है। कांग्रेस ने उपचुनाव को लेकर बागेश्वर में बैठक भी की जिसमें आगे की रणनीति बनाई गई। नामांकन की आखिरी तारीख 17 अगस्त है। यानि अब ज्यादा दिन बचे नहीं है, फिलहाल निगाहें इस बात पर भी हैं कि दलबदल का खेल कब तक जारी रहेगा, अभी और कितने चेहरे हैं जो पाला बदलेंगे?









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