21 September 2026

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सीएम धामी ने किया उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव का शुभारंभ

सीएम धामी ने किया उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव का शुभारंभ

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने परेड ग्राउंड, देहरादून में राज्य जनजातीय शोध संस्थान, उत्तराखण्ड द्वारा आयोजित उत्तराखण्ड राज्य जनजातीय महोत्सव 2026 में प्रतिभाग किया। इस अवसर पर देश के 12 राज्यों से आए जनजातीय वर्ग के प्रतिनिधियों ने अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और परंपराओं के माध्यम से महोत्सव को राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया। सीएम धामी ने किया उत्तराखंड जनजातीय महोत्सव का शुभारंभ

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने थारू लोक गायिका स्वर्गीय रिंकू देवी राणा एवं श्री दर्शन लाल को ‘आदि गौरव सम्मान’ से सम्मानित किया। साथ ही, समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत 14,272.185 लाख रुपये की पेंशन ‘वन क्लिक’ के माध्यम से लाभार्थियों के खातों में हस्तांतरित की।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में कहा कि यह आयोजन केवल एक महोत्सव नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की जीवंत विरासत, सादगीपूर्ण जीवन-दर्शन और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि यह मंच जनजातीय भाई-बहनों की पीढ़ियों से संजोई गई लोक परंपराओं और संस्कृति को व्यापक पहचान दिला रहा है उन्होंने राज्य जनजातीय शोध संस्थान को इस भव्य आयोजन के लिए साधुवाद दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय समाज भारतीय संस्कृति की समृद्ध विविधता और प्राचीन परंपराओं का सशक्त आधार है। यह समाज प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीते हुए सतत विकास और सहअस्तित्व का मार्ग दिखाता है तथा सीमांत क्षेत्रों में रहते हुए राष्ट्र की सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक समरसता में महत्वपूर्ण योगदान देता है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय में आवश्यकता है कि जनजातीय परंपराओं, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय उत्पादों को संरक्षित करते हुए नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुंचाया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान, स्वाभिमान और विकास के लिए अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए गए हैं। विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सुशासन की पहचान है। इसी सोच के तहत ‘एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय’, ‘प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान’, ‘वन धन योजना’ और ‘प्रधानमंत्री जनजातीय विकास मिशन’ जैसी योजनाएं लागू की गई हैं, जिनसे शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर सृजित हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा भगवान बिरसा मुंडा की जयंती को ‘जनजातीय गौरव दिवस’ के रूप में मनाने का निर्णय ऐतिहासिक है। साथ ही, देशभर में आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के संग्रहालय स्थापित किए जा रहे हैं, जिससे नई पीढ़ी प्रेरणा ले सके।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनजातीय कल्याण के बजट में तीन गुना वृद्धि की गई है और सीमांत क्षेत्रों के विकास को राष्ट्रीय प्राथमिकता दी गई है। माणा जैसे दूरस्थ क्षेत्र को ‘देश का प्रथम गांव’ कहकर नई पहचान दी गई है।

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उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी इसी दिशा में कार्य करते हुए जनजातीय समाज के जीवन स्तर को सुधारने के लिए निरंतर प्रयासरत है। प्रतिवर्ष जनजातीय महोत्सव और जनजातीय खेल महोत्सव के आयोजन का निर्णय लिया गया है। प्रदेश के 128 जनजातीय गांवों को चिन्हित कर उनके समग्र विकास की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए कालसी, मेहरावना, बाजपुर और खटीमा में एकलव्य विद्यालय संचालित हैं, जबकि चकराता और बाजपुर में नए विद्यालय निर्माणाधीन हैं। छात्रवृत्ति, आश्रम पद्धति विद्यालयों और तकनीकी शिक्षा के माध्यम से युवाओं को सशक्त किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि जनजातीय युवाओं के लिए आईटीआई संस्थान, प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु निःशुल्क कोचिंग, तथा मासिक छात्रवृत्ति की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त, चार जनपदों में जनजाति कल्याण अधिकारियों की नियुक्ति, बेटियों के विवाह हेतु आर्थिक सहायता, तथा शोध संस्थान के लिए कॉर्पस फंड की स्थापना की गई है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पीएम जनमन योजना के अंतर्गत बुक्सा और राजी जनजाति क्षेत्रों में बहुउद्देशीय केंद्र स्थापित किए गए हैं। साथ ही, पिथौरागढ़ में नए एकलव्य विद्यालय के लिए केंद्र से अनुरोध किया गया है।

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उन्होंने बताया कि समाज कल्याण विभाग के अंतर्गत 9 लाख से अधिक लाभार्थियों को मार्च माह की पेंशन के रूप में 142 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी की गई है, जो सरकार की संवेदनशीलता का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनजातीय युवाओं को यूपीएससी, पीसीएस और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु देहरादून में ‘आदि लक्ष्य संस्थान’ स्थापित किया जा रहा है, जिसमें बहुउद्देशीय हॉल का निर्माण भी किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान बिरसा मुंडा का जीवन प्रेरणादायी है और उनकी शिक्षाओं से प्रेरित होकर राज्य सरकार सांस्कृतिक अस्मिता की रक्षा के लिए कार्य कर रही है। सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू किया गया है तथा समान नागरिक संहिता लागू करते हुए अनुसूचित जनजातियों को इससे बाहर रखा गया है, ताकि उनकी परंपराएं सुरक्षित रह सकें।